Mauganj News : धू-धू जला अहंकार और अन्याय का प्रतीक रावण का पुतला, जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा मऊगंज

Mauganj Dussehra Celebrations : कगास नदी में विलीन हुईं ढाई हजार से अधिक मूरतें, अष्टभुजा धाम में उमड़ा आस्था का महाकुंभ

Mauganj News : धू-धू जला अहंकार और अन्याय का प्रतीक रावण का पुतला, जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा मऊगंज

राजेंद्र पयासी @ मऊगंज

शरद ऋतु की शीतल सांझ जब मऊगंज का सिंचाई विभाग परिसर के दशहरा मैदान पर उतरी तो वहां दृश्य अलौकिक था। हजारों नेत्र एक ही दिशा में टकटकी लगाए थे। जैसे ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के प्रतीक अग्निबाण ने 51 फीट ऊंचे रावण के अहंकारी सीने को भेदा, दशानन धू-धू कर जल उठा और पूरा मैदान "जय श्रीराम" के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा। यह केवल पुतला दहन नहीं था, यह अहंकार, अन्याय और अधर्म के विनाश का शंखनाद था।

विजयादशमी का यह पावन पर्व मऊगंज जिला मुख्यालय से लेकर हनुमना, नईगढ़ी के कस्बाई और सुदूर ग्रामीण अंचलों तक पूर्ण हर्षोल्लास, श्रद्धा और शांतिपूर्ण सौहार्द के साथ मनाया गया। जिला मुख्यालय में आयोजित मुख्य समारोह का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन से हुआ।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक प्रदीप पटेल की विशेष उपस्थिति रही, तो अध्यक्षता नगर परिषद अध्यक्ष बृजवासी पटेल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में जिले के कलेक्टर राजेश कुमार ओगरे एवं पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र कुमार जैन मंचासीन रहे। उनके साथ-साथ क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में आमजन इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

कार्यक्रम की आत्मा रही रामलीला मंडली द्वारा प्रस्तुत श्री हनुमान लीला। कलाकारों के सजीव, ओजपूर्ण और भावविभोर कर देने वाले मंचन ने उपस्थित जनसमूह को राम युग में पहुंचा दिया। जैसे ही पुतला दहन हुआ, रंग-बिरंगी और मनमोहक आतिशबाजी ने रात्रि के अंधेरे को चीरकर आसमान को इंद्रधनुषी आभा से रोशन कर दिया।

नवरात्रि में वर्षा भक्ति रस, अष्टभुजा धाम बना आस्था का केंद्र

यह विजय केवल एक दिन की नहीं, बल्कि नौ दिनों की आराधना की सिद्धि थी। शारदीय नवरात्रि के दस दिवसीय महोत्सव में इस वर्ष भक्ति का अभूतपूर्व सैलाब देखा गया। जिला प्रशासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के कुशल मार्गदर्शन में नगर निकाय और पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था में पर्व निर्विघ्न सम्पन्न हुआ।


शहर से गांव तक देवी पंडालों में भक्ति रस की अविरल धारा बहती रही। वहीं विंध्य की आस्था की अधिष्ठात्री, ऐतिहासिक अष्टभुजा धाम नईगढ़ी में तो जैसे आस्था का महाकुंभ उमड़ पड़ा। अंचल ही नहीं, मध्यप्रदेश के साथ-साथ उत्तरप्रदेश और अन्य राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मां अष्टभुजा के दरबार में शीश नवाकर घर-परिवार और राष्ट्र के सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।

कगास के देवलहा घाट पर आस्था का प्रवाह

विजयादशमी का दूसरा सबसे भावुक क्षण रहा मूर्ति विसर्जन। दुर्गा नवमी की संध्या से प्रारंभ हुआ विसर्जन का क्रम अनवरत 36 घंटे से अधिक समय तक चला। अष्टभुजा धाम के सभी प्रवाहित होने वाली मोक्षदायिनी कगास नदी के पवित्र देवलहा घाट पर भक्तों ने अश्रुपूरित नेत्रों से, अगले बरस तू जल्दी आ के जयघोष के साथ माता रानी की विदाई की।


प्रशासनिक जानकारी के अनुसार इस दौरान मऊगंज ही नहीं, बल्कि पड़ोसी रीवा और सीधी जिलों से आए श्रद्धालुओं ने लगभग ढाई हजार से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं का विधि-विधान पूर्वक विसर्जन किया। मूर्ति विसर्जन स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं कमर कसकर मोर्चा संभाला, जिसके कारण श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

महाप्रसाद ने जोड़ी मानवता की डोर

माता के दरबार में आस्था के साथ-साथ मानवता भी परवान चढ़ी। विसर्जन में आए हजारों भक्तों और कर्तव्य पथ पर तैनात पुलिस एवं प्रशासन के कर्मयोगियों ने अंबिका बीज भंडार एवं रामपाल सिंह उचेहरा मित्र मंडली नईगढ़ी तथा व्यापारी समाज द्वारा आयोजित विशाल भंडारे में महाप्रसाद ग्रहण किया। यह भंडारा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि युवा समाजसेवियों के समूह द्वारा अपने श्रम की कमाई से वर्षों से किया जा रहा पुनीत कार्य है, जो "नर सेवा ही नारायण सेवा है" की सनातन परम्परा का जीवंत प्रतीक है।