राष्ट्रपति मुर्मू का बस्तर दौरा : मांझी-चालकियों की सुनीं समस्याएं, बोलीं - बस्तर के युवा भी जीत सकते हैं ओलिंपिक में मेडल
President Bastar Visit : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर के मुरिया दरबार में मांझी-चालकियों से मुलाकात की। उन्होंने मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन किए और बस्तर की संस्कृति देखी।
President Bastar Visit : जगदलपुर, छत्तीसगढ़। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बस्तर दौरे पर हैं। उन्होंने जगदलपुर के सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार में मांझी-चालकियों और जनजातीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने उनसे बातचीत की और उनकी समस्याओं तथा विचारों को सुना। इसके पहले उन्होंने मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे लालबाग मैदान पहुंचीं, जहां उन्होंने बस्तर दशहरा और जनजातीय संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

मुरिया दरबार में जनजातीय प्रतिनिधियों से संवाद
राष्ट्रपति ने मुरिया दरबार की परंपरा को जनजातीय समाज और स्थानीय व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। मांझी-चालकियों ने उन्हें इस परंपरा की जानकारी दी। राष्ट्रपति ने कहा कि मुरिया दरबार के माध्यम से स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएं लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बस्तर दशहरा जनजातीय समाज के जीवन और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है।
मां दंतेश्वरी मंदिर में की पूजा-अर्चना
बस्तर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सबसे पहले मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और जनजातीय देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मां दंतेश्वरी के दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बस्तर दशहरा की लगभग 75 दिनों तक चलने वाली परंपराओं और यहां की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।

बच्ची से पूछा- बड़ी होकर क्या बनोगी?
लालबाग मैदान में आमसभा से पहले राष्ट्रपति ने बस्तर की संस्कृति और परंपराओं पर आधारित स्टॉल देखे। यहां उन्होंने स्थानीय विरासत और सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी ली। इसी दौरान राष्ट्रपति एक बच्ची से मिलीं और उससे पूछा कि वह बड़ी होकर क्या बनना चाहती है। बच्ची ने जवाब दिया कि वह कलेक्टर बनना चाहती है। राष्ट्रपति और बच्ची के बीच हुई इस छोटी-सी बातचीत ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा।

नक्सलवाद से मुक्ति और विकास पर दिया जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से बस्तर नक्सलवाद की समस्या से बाहर निकलकर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के युवाओं को अवसर मिलें, तो वे विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों की सराहना की और उम्मीद जताई कि यहां के युवा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भी पदक जीतेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया बस्तर के विकास का रोडमैप
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति के बस्तर आगमन को सौभाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस बार बस्तर दशहरा माओवाद से मुक्ति के बाद विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार दूरस्थ क्षेत्रों तक परिवहन और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने पर काम कर रही है।
उन्होंने रायपुर से रावघाट रेल सेवा, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे, जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी और गीदम में मेडिकल कॉलेज जैसी पहलों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर दशहरा के रथ का प्रतीक भी भेंट किया।

मुरिया दरबार के बाद संपन्न होती है दशहरा परंपरा
धर्म एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। इसके बाद पर्व का समापन होता है। इस आयोजन में मांझी-चालकियों, जनजातीय समाज और राजपरिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण देश के अन्य दशहरा आयोजनों से अलग पहचान रखता है। राष्ट्रपति का इस आयोजन में शामिल होना बस्तर की जनजातीय संस्कृति और विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर है।


