Akshat Agarwal Murder : अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में कंपनी के पूर्व कर्मचारी को उम्रकैद, नार्को टेस्ट में चौंकाने वाला खुलासा
Akshat Agarwal Murder : स्टील कारोबारी अक्षत अग्रवाल की हत्या मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
Akshat Agarwal Murder : सरगुजा। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में स्टील कारोबारी अक्षत अग्रवाल की हत्या के करीब दो साल बाद अदालत ने मामले में फैसला सुनाया है। जिला कोर्ट के सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने उसे आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। आरोपी को आर्म्स एक्ट के तहत भी पांच साल की सजा मिली है। मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है और इस दौरान पुलिस ने कई तरह के सबूत जुटाए थे।
कार में मिला था अक्षत का शव
20 अगस्त 2024 की शाम अंबिका स्टील इंडस्ट्रीज के संचालक महेश केडिया का 23 वर्षीय बेटा अक्षत अग्रवाल कार से घर से निकला था। शाम करीब 6:30 बजे उसका मोबाइल बंद हो गया। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिवार ने पुलिस को सूचना दी।
अगले दिन पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और CCTV फुटेज की मदद से जांच आगे बढ़ाई। अक्षत की कार चठिरमा गोशाला के पास जंगल में मिली। कार के अंदर उसका खून से लथपथ शव था और सीने में गोली लगी थी।
पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल गिरफ्तार
जांच के दौरान CCTV फुटेज में अक्षत की कार में उसकी फर्म में पहले काम कर चुका संजीव मंडल दिखाई दिया। पुलिस ने उसे 21 अगस्त को उसके घर से हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद संजीव ही पुलिस को उस जगह ले गया, जहां अक्षत की कार खड़ी थी।
पुलिस ने अगले दिन उसे गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से तीन पिस्टल, 31 कारतूस, 50 हजार रुपए नकद और अक्षत की सोने की चेन, ब्रेसलेट व अंगूठी बरामद होने की बात अभियोजन ने कोर्ट में कही।
आरोपी ने किया था चौंकाने वाला दावा
गिरफ्तारी के बाद संजीव मंडल ने पुलिस के सामने दावा किया था कि अक्षत ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी। उसके मुताबिक, अक्षत ने उसे गोली मारने के लिए कहा था। संजीव ने दावा किया कि वह पहले गोली नहीं चला सका और बाद में अक्षत ने खुद ट्रिगर दबा दिया। आरोपी के अनुसार, इसके बाद उसने भी दो गोलियां चलाईं। हालांकि, अदालत में संजीव अपने पुलिस बयान से मुकर गया और खुद को निर्दोष बताया।
33 गवाहों और सबूतों के आधार पर फैसला
मामले की करीब दो साल तक सुनवाई चली। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों, डॉक्टरों, फॉरेंसिक टीम, परिवार के सदस्यों और दोस्तों समेत 33 लोगों के बयान दर्ज किए गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अक्षत को तीन गोलियां पास से लगने की बात सामने आई।
अभियोजन के अनुसार, परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से घटना के समय अक्षत और संजीव की घटनास्थल पर मौजूदगी की पुष्टि हुई। पुलिस ने कोर्ट की अनुमति से संजीव का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था, लेकिन इन जांचों से कोई नया तथ्य सामने नहीं आया।
हत्या और हथियार रखने में दोषी
अदालत ने संजीव मंडल को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का दोषी माना। इसके तहत उसे आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत पांच साल के कारावास की सजा दी गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या की वजह को लेकर आरोपी ने अलग दावा किया था, लेकिन अदालत ने उपलब्ध परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर उसे दोषी ठहराया।
Deekshamehra 
