T-72 Tank : जबलपुर में 472 करोड़ से T-72 टैंकों की ओवरहॉलिंग, सालाना 12 होंगे अपग्रेड; राजनाथ बोले- ड्रोन युग में भी टैंक जरूरी

T-72 Tank : केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम में व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में T-72 टैंक ओवरहॉल प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया।

T-72 Tank : जबलपुर में 472 करोड़ से T-72 टैंकों की ओवरहॉलिंग, सालाना 12 होंगे अपग्रेड; राजनाथ बोले- ड्रोन युग में भी टैंक जरूरी

जबलपुर। आज युद्ध का तरीका बदल रहा है। ड्रोन और मिसाइल का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैंकों की जरूरत खत्म हो गई है। टैंकों को नई तकनीक, बेहतर सेंसर और नई क्षमताओं से लैस करना जरूरी है।  यह बात केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में कही है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

टैंक ओवरहॉल प्रोजेक्ट का किया भूमिपूजन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में T-72 टैंक ओवरहॉल प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया। करीब 472 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस सुविधा में भारतीय सेना के T-72 टैंकों की बड़ी मरम्मत, तकनीकी जांच और अपग्रेड का काम होगा। परियोजना शुरू होने के बाद जबलपुर में भी पुराने टैंकों को लंबे समय तक सेना के इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सकेगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

हर साल 12 T-72 टैंकों का होगा ओवरहॉल

आधुनिक प्लांट के साथ बनेगा टेस्टिंग ट्रैक। परियोजना के पहले चरण में व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में हर साल 12 T-72 टैंकों का पूरा ओवरहॉल और तकनीकी अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए आधुनिक प्लांट तैयार किया जाएगा। साथ ही टैंकों की क्षमता और तकनीकी स्थिति जांचने के लिए टेस्टिंग ट्रैक भी बनाया जाएगा। इससे बड़ी मरम्मत की जरूरत वाले टैंकों को दोबारा सेना के इस्तेमाल के लिए तैयार करने की क्षमता बढ़ेगी।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में तेजी का दावा

भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपए था। अब यह बढ़कर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात भी करीब 1,000 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा है। मध्यप्रदेश को भी रक्षा उत्पादन और निवेश के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

अभी आवड़ी में होता है T-72 का मुख्य ओवरहॉल

जबलपुर में बढ़ेगी ओवरहॉल क्षमता। फिलहाल T-72 टैंकों के ओवरहॉल की मुख्य जिम्मेदारी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) की हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF), आवड़ी के पास है। जबलपुर में नई सुविधा तैयार होने के बाद इस काम की क्षमता बढ़ जाएगी।

बड़ी मरम्मत या तकनीकी सुधार की जरूरत वाले T-72 टैंकों को जबलपुर में भी तैयार किया जा सकेगा। इससे सेना को टैंक दोबारा इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में मदद मिलने की उम्मीद है।

प्रोजेक्ट से पहले दो T-72 का ट्रायल ओवरहॉल

पायलट प्रोजेक्ट में मिली सफलता। 472 करोड़ रुपए की स्थायी परियोजना शुरू होने से पहले व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर ने इसका ट्रायल किया था। फैक्ट्री ने दो T-72 टैंकों का ओवरहॉल पूरा कर उन्हें भारतीय सेना को सौंपा।

इस दौरान टैंकों की तकनीकी जांच की गई। जरूरत के अनुसार खराब और पुराने पुर्जों की मरम्मत या उन्हें बदला गया। सेना के निर्धारित तकनीकी और गुणवत्ता मानकों के अनुसार टैंकों का परीक्षण भी किया गया। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने के बाद अब जबलपुर में स्थायी सुविधा विकसित की जा रही है।

ओवरहॉल का मतलब सिर्फ सामान्य सर्विसिंग नहीं

टैंक के प्रमुख हिस्सों की गहन जांच होती है। लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद टैंक के जरूरी हिस्सों की विस्तृत जांच और बड़ी मरम्मत की जाती है। इसे ओवरहॉल कहा जाता है। इसमें इंजन, ट्रांसमिशन, हथियार प्रणाली, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच की जाती है।

खराब पुर्जों को ठीक किया जाता है या जरूरत पड़ने पर नए पुर्जे लगाए जाते हैं। इसके बाद टैंक को अलग-अलग परीक्षणों से गुजरना पड़ता है। सभी टेस्ट में सही पाए जाने के बाद उसे फिर सेना के इस्तेमाल के लिए भेजा जाता है।

जबलपुर की चार रक्षा फैक्ट्रियों ने बनाया रिकॉर्ड

रक्षा उत्पादन में शहर की भूमिका और मजबूत होगी। जबलपुर लंबे समय से देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्रों में शामिल है। यहां व्हीकल फैक्ट्री समेत कई रक्षा निर्माणियां सेना के लिए अलग-अलग उपकरण तैयार करती हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में जबलपुर की चार प्रमुख रक्षा निर्माणियों ने मिलकर 4,622 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड उत्पादन किया। इनमें व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का उत्पादन करीब 1,056 करोड़ रुपए रहा। T-72 परियोजना से रक्षा क्षेत्र में जबलपुर की भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है। स्थानीय उद्योगों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं।

T-72 को भारतीय सेना की बख्तरबंद ताकत की रीढ़ माना जाता है

लंबे समय से सेना में महत्वपूर्ण भूमिका। T-72 भारतीय सेना के प्रमुख मेन बैटल टैंकों में शामिल है। इसका मूल डिजाइन सोवियत संघ में विकसित हुआ था और भारत में भी इसका निर्माण तथा अलग-अलग स्तर पर तकनीकी अपग्रेड किया गया है।

इसमें 125 मिमी स्मूथबोर गन और ऑटो-लोडर सिस्टम दिया गया है। ऑटो-लोडर के कारण इसे तीन सदस्यों का क्रू संचालित करता है। टैंक पारंपरिक गोला-बारूद के अलावा एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल भी दागने में सक्षम है।

T-72 'अजेय' की खासियत

आर्मर से लेकर फायर कंट्रोल तक कई खूबियां। T-72 में मजबूत आर्मर और स्मोक ग्रेनेड सिस्टम जैसी सुरक्षा सुविधाएं हैं। इसके फायर कंट्रोल सिस्टम में समय के साथ तकनीकी सुधार किए गए हैं, जिससे लक्ष्य पर निशाना साधने की क्षमता बेहतर हुई है।

इसमें करीब 780 हॉर्सपावर क्षमता वाला इंजन बताया जाता है। यह अलग-अलग और कठिन इलाकों में संचालन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ओवरहॉल और तकनीकी अपग्रेड के जरिए इन टैंकों को लंबे समय तक सेना की जरूरतों के अनुरूप बनाए रखने की योजना है।

नई सुविधा से बढ़ेगी सेना की तकनीकी क्षमता

जबलपुर बनेगा T-72 सपोर्ट का अहम केंद्र। नई ओवरहॉल सुविधा शुरू होने के बाद जबलपुर में T-72 टैंकों की मरम्मत, जांच और तकनीकी उन्नयन का काम नियमित रूप से किया जा सकेगा। पहले चरण में हर साल 12 टैंकों के ओवरहॉल का लक्ष्य रखा गया है।

इससे भारतीय सेना की बख्तरबंद क्षमता को बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही यह परियोजना जबलपुर को रक्षा उत्पादन और सैन्य वाहन रखरखाव के क्षेत्र में और महत्वपूर्ण केंद्र बना सकती है।