Nepal Flood Updates : नेपाल जलप्रलय से अब तक 16 मौत, 36 लापता; UP के महाराजगंज-कुशीनगर में बाढ़ का खतरा

Nepal Flood Updates : नेपाल में अचानक आई बाढ़ से 16 लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही कई लोगों के घायल होने की बात भी कही जा रही है।

Nepal Flood Updates : नेपाल जलप्रलय से अब तक 16 मौत, 36 लापता; UP के महाराजगंज-कुशीनगर में बाढ़ का खतरा

Nepal Flood Updates : नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं 36 लोग लापता हैं। शुरुआती रिकॉर्ड के अनुसार 384 यात्रियों और पर्यटकों का पता नहीं चल पाया है। नेपाल में हालात बिगड़ने के बाद भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है।

यूपी में गंडक-नारायणी को लेकर अलर्ट

नेपाल में बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों जिलों के प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने अधिकारियों से जरूरी तैयारियां पहले से पूरी रखने को कहा है। निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनने पर तत्काल राहत और बचाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिहार में NDRF की टीमें तैनात

बिहार में भी कोसी और गंडक नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर स्थिति पर चर्चा की है। राज्य के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को सतर्क किया गया है।

बिहार के छह जिलों के लिए NDRF की टीमें रवाना की गई हैं। कोसी और गंडक बेसिन में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

टिमुरे बाजार और सीमा क्षेत्र में नुकसान

बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी का पानी अचानक बढ़ गया। तेज बहाव से टिमुरे बाजार और रसुवा सीमा नाके के कस्टम क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ। कई वाहन पानी में बह गए। बाढ़ से 13 जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। कई जगह बांध, विद्युतगृह और परियोजनाओं तक पहुंचने वाले रास्तों को नुकसान पहुंचा है। प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है।

384 यात्री और पर्यटक लापता

पर्यटन और ट्रैवल कंपनियों से मिले शुरुआती रिकॉर्ड के अनुसार 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी मिली है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक बताए गए हैं।

आंकड़ों की ट्रैवल एजेंसियों, गाइड, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की मदद से जांच की जा रही है। लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक शामिल हैं।

कैलाश यात्रा के 31 लोग लापता

कैलाश जर्नी से जुड़े कुल 31 यात्रियों के लापता होने की जानकारी है। इनमें 26 विदेशी नागरिक हैं, जिनकी राष्ट्रीयता की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पांच नेपाली नागरिक भी लापता बताए गए हैं।

पर्यटन बोर्ड, पर्यटक पुलिस, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लापता लोगों की जानकारी जुटा रही हैं। ट्रेकिंग गाइडों की मदद से प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चलाया जा रहा है।

25 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बस्नेत के अनुसार बुसी और तुसु जैसे प्रभावित क्षेत्रों से 25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। राहत और बचाव अभियान में 15 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं।

इनमें सात नेपाली सेना के और आठ अन्य एजेंसियों के हैं। मछली ट्रेनिंग कैंप में मेडिकल सेंटर बनाया गया है। यहां घायलों का इलाज किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों के साथ बचाव दल भी तैनात हैं।

13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित

बाढ़ के तेज बहाव से नेपाल की 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। कई परियोजनाओं के बांध, पावरहाउस और पहुंच मार्ग प्रभावित हुए हैं। टिमुरे बाजार और सीमा क्षेत्र में खड़े कई वाहन भी पानी में बह गए।

नुकसान का वास्तविक आकलन जमीनी जांच के बाद किया जाएगा। बाढ़ के खतरे को देखते हुए काठमांडू ट्रैफिक पुलिस ने रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिंग जाने वाले वाहनों की आवाजाही रोक दी है।

भारत- नेपाल सीमा पर SSB सतर्क

नेपाल में बाढ़ के बाद भारत-नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा और राहत व्यवस्था बढ़ा दी गई है। SSB ने 11 रेस्क्यू एंड रिलीफ टीमों को तैयार रखा है। सात अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर हैं। कोसी और नारायणी नदी बेसिन में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए निगरानी की जा रही है।

उत्तर और पूर्वी बिहार के साथ उत्तर प्रदेश में घाघरा-कर्णाली तथा उत्तराखंड में महाकाली नदी तंत्र से जुड़े संवेदनशील इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है। सीमा पर तैनात SSB बटालियनों को स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर इन टीमों को राहत और बचाव अभियान में लगाया जाएगा।