सिर्फ iPhone ही नहीं अब भारत में बनेंगे Apple के ये प्रोडक्ट्स
मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, Apple भारत में अपने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क का विस्तार करने की तैयारी में है। इसका फायदा सिर्फ iPhone उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा।
Apple Products Manufactured in India : भारत को मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा ग्लोबल हब बनाने की कोशिश तेज हो गई है। सरकार अब देश में सिर्फ स्मार्टफोन असेंबलिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती। लक्ष्य मोबाइल के साथ कंपोनेंट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर का उत्पादन बढ़ाना है। इसी दिशा में Apple भारत में iPhone के अलावा दूसरे हार्डवेयर प्रोडक्ट्स तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Google भी चीन से अपने एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड डिवाइस का कुछ उत्पादन भारत में शिफ्ट करने की योजना बना रहा है। इससे भारत की ग्लोबल सप्लाई चेन में भूमिका और मजबूत हो सकती है।
Apple iPhone के बाद दूसरे प्रोडक्ट्स पर करेगा फोकस
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, Apple भारत में अपने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क का विस्तार करने की तैयारी में है। इसका फायदा सिर्फ iPhone उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा।
कंपनी के दूसरे हार्डवेयर और कंपोनेंट्स के उत्पादन से स्थानीय सप्लायर्स को नए ऑर्डर मिल सकते हैं। इससे कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। सरकार इसे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के विस्तार के लिए अहम कदम मान रही है।
Google चीन से भारत ला सकता है डिवाइस प्रोडक्शन
Google को लेकर भी भारत में उत्पादन बढ़ाने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी चीन में बनाए जाने वाले अपने कुछ एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड डिवाइस का उत्पादन भारत में शिफ्ट करने की योजना बना रही है।
अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो भारत में Google के स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के उत्पादन का दायरा बढ़ सकता है। इससे भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट बेस के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। कंपनियों का चीन पर निर्भरता कम करना भी भारत के लिए अवसर पैदा कर रहा है।
62,500 रूपए करोड़ की नई मैन्युफैक्चरिंग स्कीम
सरकार ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए करीब 62,500 करोड़ रूपए की Mobile Phone Manufacturing Scheme को मंजूरी दी है। यह योजना मौजूदा वित्त वर्ष से 2030-31 तक लागू रहने वाली है।
इसका उद्देश्य पिछली Production Linked Incentive (PLI) योजना के बाद मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को नई गति देना है। सरकार का फोकस सिर्फ मोबाइल असेंबल करने पर नहीं है। देश में कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और ज्यादा वैल्यू एडिशन बढ़ाना भी योजना का अहम हिस्सा है।
कंपनियों को बिक्री और लोकल खरीद पर इंसेंटिव
नई योजना के तहत पात्र मोबाइल कंपनियों को बिक्री के आधार पर 2.25% से 5% तक मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव मिलने का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कंपोनेंट खरीद को बढ़ावा देने के लिए 1.5% तक अतिरिक्त सहायता दी जा सकती है।
भारतीय ब्रांड्स के लिए अलग से 5% इंसेंटिव की योजना है। भारत में डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त 3% इंसेंटिव भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे कंपनियों को उत्पादन के साथ डिजाइन और तकनीकी विकास पर निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
मोबाइल एक्सपोर्ट में भारत ने बनाया बड़ा मुकाम
पिछले एक दशक में भारत के मोबाइल फोन एक्सपोर्ट में तेजी आई है। आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से 2025 के बीच देश के मोबाइल फोन एक्सपोर्ट में करीब 166 गुना बढ़ोतरी हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट में भी मोबाइल फोन का योगदान लगातार बढ़ा है।
भारत अब दुनिया के प्रमुख मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग देशों में शामिल हो चुका है। Apple और Google जैसी वैश्विक कंपनियों के उत्पादन में संभावित बढ़ोतरी से इस स्थिति को और मजबूती मिल सकती है।
भारतीय ब्रांड्स और डिजाइन को भी मिलेगा फायदा
नई मैन्युफैक्चरिंग योजना का फायदा भारतीय कंपनियों को भी मिलने की उम्मीद है। सरकार स्थानीय ब्रांड्स और भारतीय डिजाइन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है। जानकारी के मुताबिक, सरकार भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर अगले 10 से 14 महीनों में हाई-वॉल्यूम सेगमेंट के लिए बेहतर स्मार्टफोन डिजाइन तैयार करने पर भी काम कर रही है। इससे देश में केवल विदेशी कंपनियों का उत्पादन बढ़ाने के बजाय घरेलू कंपनियों की तकनीकी क्षमता और प्रतिस्पर्धा को भी मजबूत करने का लक्ष्य है।

