SIR के विरोध में विपक्ष का दिल्ली मार्च: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत 5 मांगें, जानिए पूरा मामला

SIR के विरोध में INDIA ब्लॉक दिल्ली में Save Democracy March निकालेगा। विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR रद्द करने और बैलेट पेपर से चुनाव की मांग की है।

SIR के विरोध में विपक्ष का दिल्ली मार्च: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत 5 मांगें, जानिए पूरा मामला

'Save Democracy March' : Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर INDIA ब्लॉक के विपक्षी सांसद दिल्ली में 'Save Democracy March' निकालने की तैयारी में हैं।

विपक्षी सांसद संसद से भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय तक पैदल मार्च करेंगे। प्रस्तावित मार्च की दूरी करीब 3 किलोमीटर बताई जा रही है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता, चुनाव प्रक्रिया में जवाबदेही और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।

विपक्ष की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी की तीन प्रमुख मांगों को स्पष्ट किया है। उनके मुताबिक इनमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। दूसरी मांग SIR प्रक्रिया को वापस लेने की है। तीसरी मांग चुनाव में EVM की जगह बैलेट पेपर के इस्तेमाल की है।

खड़गे ने SIR को लेकर दावा किया है कि इस प्रक्रिया के चलते करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। हालांकि, यह विपक्ष की ओर से किया गया राजनीतिक दावा है, जिस पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग हो सकता है।

INDIA ब्लॉक की 19 पार्टियां मार्च में होंगी शामिल

विपक्षी गठबंधन के मुताबिक इस मार्च में INDIA ब्लॉक की 19 पार्टियां हिस्सा लेंगी। इन दलों के लोकसभा में कुल 178 और राज्यसभा में 62 सांसद बताए गए हैं। मार्च में शामिल होने वाली पार्टियों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, NCP (SP), शिवसेना (UBT), RJD, CPM, CPI, नेशनल कॉन्फ्रेंस, PDP, JMM, CPI-ML, IUML, KC (M), MDMK, VCK, RSP, AIFB और KC (J) शामिल हैं।

पहले भी चुनाव आयोग तक मार्च कर चुका है विपक्ष

SIR को लेकर विपक्ष का विरोध नया नहीं है। 11 अगस्त 2025 को भी INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च किया था। उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए थे। उस समय भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और SIR को लेकर सवाल उठाए गए थे।

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवाल

SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इस बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से संबंधित फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी या उनकी सिफारिश के बिना जारी किए गए थे।

इन्हीं दावों को आधार बनाकर विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठा रहा है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। हालांकि, इन आरोपों और रिपोर्ट में किए गए दावों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

30 सितंबर की बैठक में विपक्ष ने रखीं 5 बड़ी मांगें

30 सितंबर को हुई विपक्षी गठबंधन की बैठक में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। विपक्ष की ओर से मुख्य रूप से पांच मांगें सामने रखी गईं।

विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। विपक्ष चाहता है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित जानकारी बूथ और विधानसभा स्तर तक सार्वजनिक की जाए। विपक्ष का कहना है कि किसी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाना चाहिए और अपील का अवसर भी मिलना चाहिए।

 विपक्षी दलों का कहना है कि SIR की प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। इसलिए उनकी मांग है कि भविष्य के चुनावों में SIR से पहले मौजूद मतदाता सूची को आधार बनाया जाए। विपक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही पहली बार मतदान करने वाले लोगों के लिए मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने की बात कही गई है।

INDIA गठबंधन के दलों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही के मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की है। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के मत का अधिकार सर्वोपरि होना चाहिए।

क्या है SIR और क्यों हो रहा है विरोध?

Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना होता है।

विपक्ष का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है। विपक्ष विशेष रूप से गरीब, प्रवासी और कमजोर वर्ग के मतदाताओं को लेकर चिंता जता रहा है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का मूल उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना बताया जाता है। इसलिए SIR को लेकर विवाद का मुख्य केंद्र यही है कि मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया में किसी योग्य नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित न हो।