क्या भारत में आ गया H1N1 का कोई नया स्ट्रेन? बढ़ रहे केस पर क्या बोला ICMR
Swine Flu Cases : NCDC की मौजूदा जानकारी में भी H1N1 को सीजनल इन्फ्लुएंजा के रूप में शामिल किया गया है और इसके लिए निगरानी व उपचार संबंधी दिशानिर्देश जारी हैं।
Swine Flu Cases : नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने लगे हैं। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वायरस का कोई नया स्ट्रेन तेजी से फैल रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन सामने आने की जानकारी नहीं है। मौजूदा वायरस को सीजनल इन्फ्लुएंजा का हिस्सा माना जा रहा है। इसलिए फिलहाल किसी नए या असामान्य खतरे को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। ICMR का नेशनल इन्फ्लुएंजा सेंटर देश में फैल रहे वायरस की लगातार निगरानी करता है।
मौसम बदलते ही एक्टिव हो जाता है वायरस
ICMR के मुताबिक अभी फैल रहा H1N1 कोई नया वायरस नहीं है। यह सीजनल इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है और मौसम में बदलाव के दौरान इसके मामले बढ़ सकते हैं। भारत में इन्फ्लुएंजा का प्रसार सालभर हो सकता है। हालांकि बारिश और दूसरे मौसमी बदलावों के दौरान संक्रमण बढ़ने की संभावना रहती है। NCDC की मौजूदा जानकारी में भी H1N1 को सीजनल इन्फ्लुएंजा के रूप में शामिल किया गया है और इसके लिए निगरानी व उपचार संबंधी दिशानिर्देश जारी हैं।

नया स्ट्रेन आने के सबूत नहीं मिले
वैज्ञानिकों के अनुसार मौजूदा H1N1 में ऐसा कोई नया बदलाव सामने नहीं आया है, जिससे इसे पहले से ज्यादा खतरनाक माना जाए। भारत में H1N1 की निगरानी लगातार की जा रही है। ICMR-NIV का नेशनल इन्फ्लुएंजा सेंटर Influenza A H1N1pdm09 समेत दूसरे श्वसन वायरस के नमूनों की जांच करता है। इसका उद्देश्य वायरस में होने वाले बदलावों पर नजर रखना और किसी संभावित नए खतरे की समय पर पहचान करना है।
मामले बढ़ने के पीछे मौसम भी वजह
दिल्ली एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल के अनुसार, फ्लू का संक्रमण केवल सर्दियों तक सीमित नहीं है। मौसम में लगातार बदलाव, बारिश और उमस के दौरान संक्रमण फैलने की परिस्थितियां बन सकती हैं। ऐसे मौसम में लोग कई बार बंद कमरों में ज्यादा समय बिताते हैं। एयर कंडीशनर चलने और खिड़की-दरवाजे बंद रहने से हवा का आवागमन भी कम हो सकता है। अगर ऐसे कमरे में संक्रमित व्यक्ति मौजूद हो, तो वायरस दूसरे लोगों तक पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।

इम्युनिटी कम होने पर बढ़ सकता है संक्रमण
वायरस का समुदाय में मौजूद रहना भी मामलों में बढ़ोतरी की एक वजह हो सकता है। जिन लोगों में वायरस के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता नहीं है, उनमें संक्रमण का खतरा ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा संक्रमण फैलने के लिए अनुकूल मौसम और परिस्थितियां भी भूमिका निभा सकती हैं। फ्लू जैसे लक्षणों वाले लोगों की जांच पहले की तुलना में ज्यादा होने से भी रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या बढ़ सकती है।
बुजुर्ग और बच्चों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
ज्यादातर स्वस्थ लोगों में फ्लू कुछ समय बाद ठीक हो सकता है। लेकिन बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए इन वर्गों के लोगों को फ्लू जैसे लक्षण होने पर ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

घबराने के बजाय बचाव पर दें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि H1N1 के बढ़ते मामलों को लेकर पैनिक करने की जरूरत नहीं है। लोगों को सामान्य सावधानियां अपनानी चाहिए। हाथों को अच्छी तरह धोकर ही भोजन करें। भीड़भाड़ या संक्रमण के जोखिम वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करें। फ्लू के लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना भी संक्रमण रोकने में मदद कर सकता है। सरकार की ओर से भी मौसमी इन्फ्लुएंजा की निगरानी, समय पर जांच और इलाज पर जोर दिया जा रहा है।


