चिन्मय अमृत महोत्सव : PM ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से की बात, बोले- विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक
Chinmaya Amrit Mahotsav 2026 : PM मोदी ने कहा कि, चिन्मय एक विचार है जिसकी शुरुआत एक चिन्मय ऋषि ने की थी। जो चिन्मय है, वह स्वयं ही अमर है। इसलिए इस इवेंट का नाम भी इतना ही महत्वपूर्ण है।
Chinmaya Amrit Mahotsav 2026 : नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आधुनिक 3D तकनीक के जरिए स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के होलोग्राम से संवाद किया। इस अनोखे अनुभव ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। स्वामी चिन्मयानंद का निधन 3 अगस्त 1993 को हुआ था। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने उनके साथ अपनी पुरानी मुलाकात को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें दोबारा गुरुदेव के दर्शन का सौभाग्य मिला है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi inaugurates the Chinmaya Amrit Mahotsav Global Sammelan at Bharat Mandapam. (Source: DD News) https://t.co/3f7fN5Kqgv
— ANI (@ANI) October 23, 2026
2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की आजादी के 100 साल वर्ष 2047 में पूरे होंगे। इसी समय चिन्मय मिशन भी अपने 100 वर्ष पूरे करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य और चिन्मय मिशन की विचारधारा एक-दूसरे से जुड़ी हैं। देश को आत्मनिर्भर बनाने और नई चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मिशन से जुड़े लोग विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
स्वामी चिन्मयानंद से 1993 में हुई थी मुलाकात
प्रधानमंत्री ने बताया कि फरवरी 1993 में उनकी स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात हुई थी। उस समय वे अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह के लिए स्वामीजी को आमंत्रित करने गए थे। मोदी ने कहा कि स्वामीजी ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विचारों को दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गुरु के आशीर्वाद ‘शेर की तरह दहाड़ो’ का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामीजी के विचार आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।
भारत की सांस्कृतिक विरासत पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसका सम्मान बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में विदेशों से 600 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत वापस लाई गई हैं। उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर, उज्जैन के महाकाल धाम और केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का भी उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि भारत अपने ऋषियों और राष्ट्रभक्तों के विचारों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहा है।
वेदों की सीख और नई शिक्षा नीति का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने वेदों की उस भावना को याद किया, जिसमें राष्ट्र को महान बनाने का संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने भगवद्गीता के ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने का अभियान चलाया। आज बड़ी संख्या में युवा भारतीय संस्कृति के संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं। मोदी ने शिक्षा में संस्कृति और तकनीक के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान के साथ भारतीय परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
दुनिया के कई देशों में फैला है चिन्मय मिशन
स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने वर्ष 1951 में चिन्मय मिशन की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य गीता, उपनिषद और वेदांत की शिक्षाओं को आम लोगों तक पहुंचाना है। मिशन का नेटवर्क भारत के कई राज्यों में फैला हुआ है। इसके तहत 80 से अधिक चिन्मय विद्यालय और कई उच्च शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं। मिशन की वेबसाइट के अनुसार, दुनिया भर में इसके 350 से अधिक केंद्र और 1,000 से ज्यादा आध्यात्मिक अध्ययन समूह हैं। तीन दिवसीय चिन्मय अमृत महोत्सव 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है।

