MP: डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में 60.60 लाख की गड़बड़ी का आरोप, EOW ने 6 अधिकारियों-कर्मचारियों पर दर्ज की FIR

मध्य प्रदेश के डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में 60.60 लाख रुपये के कथित अवैध भुगतान का मामला। EOW जबलपुर ने तत्कालीन CMHO, DHO समेत 6 लोगों पर FIR दर्ज की।

MP: डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में 60.60 लाख की गड़बड़ी का आरोप, EOW ने 6 अधिकारियों-कर्मचारियों पर दर्ज की FIR

डिंडौरी। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के स्वास्थ्य विभाग में सरकारी राशि के गबन का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के जबलपुर कार्यालय ने 60.60 लाख रुपये के अवैध और दोहरे भुगतान के मामले में छह अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि IFMIS पोर्टल पर एरियर की गलत गणना, फर्जी प्रविष्टियों और बिना वैधानिक आधार के भुगतान के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।

EOW के मुताबिक, मामला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय डिंडौरी का है। जांच में सामने आया कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने पात्रता से अधिक राशि के भुगतान स्वीकृत किए। यह मामला 1 अप्रैल 2016 से 31 दिसंबर 2025 के बीच की अवधि से जुड़ा है। प्रकरण में अपराध क्रमांक 109/2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

इन 6 लोगों के खिलाफ FIR

EOW ने जिन छह लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें तत्कालीन CMHO और जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) के साथ कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल हैं।

  1. आर.के. मेहरा — तत्कालीन CMHO, डिंडौरी
  2. रमेश सिंह मरावी — तत्कालीन CMHO, डिंडौरी
  3. बुधदेव सिंह भलावी — तत्कालीन DHO, डिंडौरी
  4. भरत सिंह टेकाम — तत्कालीन DHO, डिंडौरी
  5. गुलाब प्रसाद साहू — सहायक ग्रेड-3
  6. प्रकाश परस्ते — सुपरवाइजर

IFMIS पोर्टल पर गलत एंट्री कर भुगतान का आरोप

EOW की जांच के अनुसार, आरोपी घटना की अवधि में CMHO कार्यालय की लेखा शाखा में क्रिएटर, वेरिफायर और अप्रूवर जैसी भूमिकाओं में काम कर रहे थे। आरोप है कि IFMIS पोर्टल पर एरियर की गलत गणना की गई और बिना जरूरी कार्यालयीन दस्तावेजों की जांच के अधिक राशि के भुगतान की प्रविष्टियां दर्ज की गईं।

जांच एजेंसी के मुताबिक, पहले मैन्युअल रूप से भुगतान किए जा चुके एरियर की राशि को भी पोर्टल पर नेगेटिव एंट्री के जरिए दर्ज कर करीब 49.89 लाख रुपये का कथित अवैध भुगतान किया गया।

NPA और गृह भाड़े के नाम पर 5.89 लाख का भुगतान

EOW के अनुसार, बिना वैधानिक आदेश के मद परिवर्तन कर नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) और गृह भाड़े के रूप में करीब 5.89 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

इसके अलावा, आरोपी गुलाब प्रसाद साहू को जुलाई 2024 में IFMIS पोर्टल के ‘After July 2017 Arrear Screen’ का इस्तेमाल कर करीब 4.78 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का आरोप है। EOW का कहना है कि यह भुगतान आवश्यक कार्यालयीन आदेश और संबंधित दस्तावेजों के बिना किया गया। उस समय गुलाब प्रसाद साहू स्वयं लेखा शाखा के प्रभारी थे।

वेंडर भुगतान में भी गड़बड़ी का आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक, वेंडरों को दी जाने वाली राशि में भी कथित तौर पर गलत या दोहरा भुगतान किया गया। EOW का आरोप है कि संबंधित बिलों को पात्रता नियमों की अनदेखी करते हुए डिजिटल हस्ताक्षर से स्वीकृत किया गया, जिसके बाद सरकारी राशि लाभार्थियों या संदिग्ध बैंक खातों में ट्रांसफर हुई।

EOW के अनुसार, इन सभी भुगतानों की कुल राशि 60.60 लाख रुपये है। प्रथम दृष्टया सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने और पद का दुरुपयोग करने के आरोप सामने आने के बाद छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। आरोपों की पुष्टि और संबंधित लोगों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।