पिता 5 बार MPPSC में फेल हुए: बेटा जेल से एग्जाम देकर बना DSP

पिता 5 बार MPPSC में फेल हुए, बेटा जेल से हथकड़ी के बीच देता रहा एक्जाम, आखिरकार DSP बनकर पूरा किया पिता का अधूरा सपना

पिता 5 बार MPPSC में फेल हुए: बेटा जेल से एग्जाम देकर बना DSP

भिंड: पिता ने एक सपना देखा था, वे डीएसपी बनना चाहते थे, 5 पीएससी परीक्षा भी दी, लेकिन सफलता नहीं मिली, बेटे को झूठे केस में जेल हो गई, लेकिन उसने पिता के सपने को अपने अंदर जिंदा रखा। हथकड़ी में जेल से परीक्षा देने गया और आखिरकार डीएसपी की वर्दी और कंधे पर सितारे सजाकर पिता का सपना पूरा कर डाला। भिंड जिले के डोंगरपुरा गांव के जैनेंद्र कुमार निगम की सफलता की कहानी कई उतार-चढ़ाव से गुजरी है। एक किसान परिवार से आने वाले जैनेंद्र ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल की। उनके इस सफर में पारिवारिक विवाद, जेल में बिताया वक्त और बीमारी के बीच परीक्षा देने जैसी चुनौतियां शामिल रहीं।

जैनेंद्र का लक्ष्य केवल सरकारी नौकरी हासिल करना नहीं था। वह अपने पिता के उस सपने को पूरा करना चाहते थे, जिसे पूरा करने के लिए उनके पिता ने भी वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की थी।

पिता 5 बार मुख्य परीक्षा में बैठे, अधूरा रह गया DSP बनने का सपना

जैनेंद्र के पिता केशव कुमार निगम ने वर्ष 1996 से 2000 के बीच पांच बार MPPSC की मुख्य परीक्षा दी थी। हालांकि, वह DSP नहीं बन सके। परिवार की परिस्थितियों के बीच उनका यह सपना अधूरा रह गया। जैनेंद्र ने इसी सपने को अपना लक्ष्य बनाया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए। उनका सफर आसान नहीं रहा, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया।

जेल में भी नहीं छोड़ी पढ़ाई, हथकड़ी में परीक्षा केंद्र पहुंचे थे

जैनेंद्र के जीवन में 2019-20 के दौरान मुश्किल दौर आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पारिवारिक विवाद और मुकदमों के चलते उन्हें दो बार जेल जाना पड़ा। इस दौरान भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी।

उनकी कहानी का सबसे असाधारण पहलू जेल में रहते हुए परीक्षा देना रहा। बताया गया है कि परीक्षा के दौरान पुलिसकर्मी उन्हें हथकड़ी लगाकर परीक्षा केंद्र तक ले जाते थे। जनवरी 2021 में जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने इंदौर में रहकर सेल्फ स्टडी और टेस्ट सीरीज के जरिए अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया।

कई परीक्षाओं में मिली सफलता, लेकिन लक्ष्य DSP बनने का रहा

जैनेंद्र ने अलग-अलग वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। उनके सफर में पुलिस आरक्षक, सब-इंस्पेक्टर और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में सफलता के साथ MPPSC के जरिए नायब तहसीलदार और सहायक संचालक, स्कूल शिक्षा पद पर चयन भी शामिल रहा। इन उपलब्धियों के बावजूद उनका प्रमुख लक्ष्य DSP बनना था। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और MPPSC की परीक्षा में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए मेहनत करते रहे।

मलेरिया और टाइफाइड के बीच दी मुख्य परीक्षा

जैनेंद्र के संघर्ष का एक और कठिन दौर मार्च 2024 में आया, जब MPPSC 2023 की मुख्य परीक्षा के दौरान उन्हें मलेरिया और टाइफाइड होने की जानकारी सामने आई। बताया गया है कि इस दौरान उन्हें सुबह-शाम ग्लूकोज की ड्रिप लगवानी पड़ती थी। बीमारी के बावजूद उन्होंने 11 से 16 मार्च के बीच मुख्य परीक्षा दी। इसके बाद घोषित परिणाम में उन्होंने 12वीं रैंक हासिल की और DSP बनने की दिशा में बड़ी सफलता प्राप्त की।