कैलाश विजयवर्गीय की बैठक में 5 MLA नदारद : विधायक मालिनी गौड़ बोलीं, बैठकों में काम ही नहीं होते, तो जाने का क्या मतलब!
इंदौर जल संकट बैठक में शामिल नहीं होने वाली पूर्व महापौर और मौजूदा विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ ने कहा, बैठकों में चर्चा करने से कुछ नहीं होता, धरातल पर काम होना चाहिए। इसी वजह से मैंने बैठक में जाना उचित नहीं समझा।
मध्य प्रदेश। इंदौर में पानी की समस्या को लेकर बुलाई गई बैठक अब खुद सियासत का नया मुद्दा बन गई है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जल संकट पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई, लेकिन इंदौर के नौ विधायकों में से सिर्फ चार ही पहुंचे। बाकी पांच विधायकों की गैरमौजूदगी पर विजयवर्गीय ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि शायद उनके क्षेत्रों में जल संकट नहीं होगा। लेकिन इस बैठक में शामिल नहीं होने वाली पूर्व महापौर और मौजूदा विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ ने अपनी गैरमौजूदगी की ऐसी वजह बताई, जिसने नगर निगम के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ये है पूरा मामला
दरअसल, इंदौर में जल संकट की आहट को लेकर गुरुवार को नगरी विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के द्वारा एक बड़ी बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें इंदौर के 9 में से केवल पांच विधायक की शामिल हुए थे, वहीं इस बैठक में कई आला अधिकारी भी मौजूद रहे थे। जब विधायकों की गैर मौजूदगी को लेकर मीडिया ने सवाल किया तब मंत्री विजयवर्गीय नेताजी करते हुए कहा था कि जो विधायक शामिल नहीं हुए शायद उनकी विधानसभा में जल संकट नहीं होगा।
बैठक में चर्चा करने से कुछ नहीं होता
वहीं गुरुवार को आयोजित बैठक में गैर मौजूद रही विधानसभा चार की बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने इंदौर में जल संकट और अपनी विधानसभा की अनदेखी को लेकर नगर निगम के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मैं कई बार जलकार्य प्रभारी और महापौर के सामने अपनी बात रख चुकी हूं, लेकिन बैठकों में चर्चा करने से कुछ नहीं होता, धरातल पर काम होना चाहिए। इसी वजह से मैंने बैठक में जाना उचित नहीं समझा।
क्या बोलीं विधायक मालिनी गौड़
मालिनी गौड़ ने कहा कि उनकी विधानसभा के गोंदावले धाम में पानी की टंकी तैयार है, लेकिन अब तक डिस्ट्रीब्यूशन लाइन नहीं डाली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दिन अधिकारी दौरा करते हैं, उस दिन टंकी पूरी भर दी जाती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा। कई बैठकों में मुद्दा उठाने के बावजूद उचित सुनवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि उनकी विधानसभा को पूरी तरह अनदेखा किया जा रहा है। मैं भी महापौर रह चुकी हूं और जानती हूं कि अधिकारियों पर कमांड होना जरूरी है। मेरे कार्यकाल में इंदौर को 125वें स्थान से नंबर वन तक लाए थे और ठेकेदारों के भुगतान सहित व्यवस्थाएं भी ठीक चल रही थीं।
मालिनी गौड़ ने कहा कि इस साल कम बारिश के कारण जल संकट और बढ़ सकता है। नर्मदा का पानी जिस तरह शहर में आ रहा है, उसके वितरण को दुरुस्त करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज उठाना हमारा काम है और आज इंदौर आ रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने भी वह इस मुद्दे पर चर्चा करेंगी।
वहीं अब इस पूरे घटनाक्रम में सवाल सिर्फ पांच विधायकों की गैरमौजूदगी का नहीं है। सवाल यह भी है कि जब शहर में जल संकट गंभीर है, तब जनप्रतिनिधियों की शिकायतों और जनता की समस्याओं का समाधान आखिर क्यों नहीं हो पा रहा? पानी की समस्या दूर करने के लिए बुलाई गई बैठक अब निगम के कामकाज, आपसी तालमेल और राजनीतिक खींचतान की परीक्षा बन गई है।

