Health Tips: अगर कम सोते हैं तो हो जाइए सावधान! शरीर के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
नींद पूरी न होना सिर्फ थकान ही नहीं, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है। लंबे समय तक कम या खराब नींद लेने से हाई ब्लड प्रेशर का खतरा। जानिए रोज कितने घंटे सोना जरूरी है।
Health Tips : लाइफस्टाइल डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का दबाव और अनियमित दिनचर्या लोगों की नींद को प्रभावित कर रहे हैं। कई लोग रोजाना 5-6 घंटे सोकर ही अपना दिन शुरू कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। पर्याप्त नींद न मिलने से ब्लड प्रेशर, तनाव और शरीर के मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, नींद की अवधि और गुणवत्ता का संबंध दिल की सेहत से भी जुड़ा है। ऐसे में अच्छी नींद को केवल आराम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का जरूरी हिस्सा समझना चाहिए।
रोज कितने घंटे की नींद लेना है जरूरी?
वयस्कों को आमतौर पर हर रात कम से कम 7 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि, उम्र और व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार नींद की आवश्यकता अलग हो सकती है। कभी-कभार कम सोना और लगातार नींद पूरी न होना, दोनों अलग स्थितियां हैं। अगर आप रोजाना पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी दिनचर्या में सोने और जागने का समय तय करें। अच्छी नींद के लिए केवल घंटों की संख्या ही नहीं, बल्कि नींद का लगातार और आरामदायक होना भी जरूरी है।
कम नींद से ब्लड प्रेशर और दिल पर क्या असर पड़ता है?
अच्छी नींद के दौरान शरीर को आराम मिलता है और सामान्य तौर पर ब्लड प्रेशर में भी गिरावट आती है। लेकिन लगातार कम या खराब नींद इस प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक नींद की कमी को हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।

इसके अलावा, नींद की गड़बड़ी तनाव और शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है। हाई ब्लड प्रेशर दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। हालांकि, कम नींद का मतलब यह नहीं है कि
किसी व्यक्ति को दिल की बीमारी जरूर होगी, लेकिन इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
नींद में बार-बार जागना, हो सकते हैं बीमारी के संकेत
रात में 7-8 घंटे बिस्तर पर रहने के बावजूद अगर सुबह थकान महसूस होती है, बार-बार नींद खुलती है या दिन में बहुत ज्यादा नींद आती है, तो नींद की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। तेज खर्राटे लेना और सोते समय सांस रुकने जैसी समस्या स्लीप एपनिया के संकेत हो सकते हैं। इस स्थिति में नींद के दौरान सांस बार-बार बाधित होती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो सकता है। स्लीप एपनिया को हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। ऐसे लक्षण लगातार दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लें।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आसान आदतें
नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए रोजाना सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखें। सोने से पहले मोबाइल, टीवी और दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें और सुबह प्राकृतिक रोशनी में कुछ समय बिताएं। रात को सोने के लिए शांत, अंधेरा और आरामदायक कमरा चुनें। शाम के समय चाय-कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय पदार्थों से बचना भी मददगार हो सकता है। अगर लंबे समय से नींद नहीं आ रही है, रात में बार-बार नींद टूटती है या दिनभर अत्यधिक सुस्ती रहती है, तो डॉक्टर से परामर्श लें। याद रखें, अच्छी नींद शरीर को तरोताजा रखने के साथ-साथ दिल की सेहत का ध्यान रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

