Fake Degree Case : बालाघाट के तत्कालीन BMO की डिग्री पर सवाल, FIR के आदेश से मामला चर्चा में
Fake Degree Case : 12 साल की नौकरी के बाद शैक्षणिक योग्यता की प्रामाणिकता पर उठे सवाल; 2024 की जांच और 2026 के घटनाक्रम ने बढ़ाई विभागीय पड़ताल की अहमियत
Fake Degree Case : भोपाल। बालाघाट जिले के बिरसा में तत्कालीन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) रहे डॉक्टर सुनील कुमार सिंह की शैक्षणिक डिग्री को लेकर मामला चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, संबंधित डिग्री की प्रामाणिकता के संबंध में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद नियुक्ति प्रक्रिया और पूर्व में हुई जांच की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
दो जांचों के निष्कर्षों को लेकर चर्चा
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू वर्ष 2024 में संबंधित डॉक्टर को जांच के बाद क्लीन चिट मिलने की जानकारी है। वहीं, वर्ष 2026 में सामने आए घटनाक्रम में एफआईआर के आदेश की बात कही जा रही है। ऐसे में दोनों जांचों के निष्कर्षों और उनके आधार को समझना जरूरी हो गया है। हालांकि, डिग्री को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
करीब 12 वर्षों तक सरकारी सेवा में रहने और बीएमओ जैसे जिम्मेदार पद पर कार्य करने के दौरान प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था, यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है। साथ ही, पूर्व जांच में किन दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया था, इसकी स्पष्टता आवश्यक है।
जांच के निष्कर्षों पर टिकी निगाहें
एफआईआर दर्ज करने के आदेश का अर्थ अपने आप में आरोपों का प्रमाणित होना नहीं है। मामले में संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण, डिग्री जारी करने वाली संस्था के अभिलेख और विभागीय जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आगे की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पूर्व जांच के निष्कर्षों की समीक्षा किस प्रकार होती है।
इनका कहना है
फिलहाल डॉ. सुनील सिंह के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। विजय कैन, थाना प्रभारी, बिरसा शासन द्वारा डॉ. सुनील सिंह की डिग्री की जांच पूरी कर ली गई है। शासन ने डिग्री को फर्जी पाया है और एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए हैं। संबंधित अधिकारी को एफआईआर के लिए पत्र लिख दिया गया है। जांच में सामने आया है कि देवास के डॉक्टर के नाम पर सुनील सिंह बालाघाट में नौकरी कर रहे थे।
- डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया, सीएचएमओ, बालाघाट

