MP Tigress Death : बांधवगढ़ की शान रही 'क्वीन डॉटी’ ने तोड़ा दम, वन मुख्यालय में बैठे अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
MP Tigress Death : बांधवगढ़ की पहचान और शान रही बाघिन क्वीन डॉटी का निधन हो गया। इस घटना से वन्यजीव प्रेमियों में शोक व्याप्त है।
MP Tigress Death : भोपाल। मध्यप्रदेश में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफर क्षेत्र से एक और दुखद खबर सामने आई। बांधवगढ़ की पहचान और शान रही बाघिन ‘क्वीन डॉटी’ के निधन से वन्यजीव प्रेमियों में शोक है। लगातार सामने आ रही बाघों की मौत की घटनाओं के बीच अब सवाल केवल एक बाघिन की मौत का नहीं, बल्कि प्रदेश में बाघ संरक्षण की निगरानी और जवाबदेही का भी है।

बाघ संख्या बढ़ी लेकिन सुरक्षा पर चिंता
बाघों की बढ़ती संख्या को संरक्षण की सफलता के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य निगरानी, प्राकृतिक आवास और मृत्यु के कारणों की पड़ताल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। हर मौत के बाद जांच और रिपोर्ट की प्रक्रिया शुरू होती है, मगर बड़ा सवाल यह है कि क्या इन घटनाओं से सबक लेकर ठोस सुधार भी किए जा रहे हैं?

वन मुख्यालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल है प्रदेश में बाघों की मौतों की समीक्षा का क्या परिणाम निकल रहा है? क्या प्रत्येक मामले में मृत्यु के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती है? संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और समय रहते बीमारी या खतरे की पहचान के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था है?

'क्वीन डॉटी’ की मौत ने एक बार फिर इन सवालों को सामने ला दिया है। अब जरूरत केवल शोक जताने की नहीं, बल्कि प्रत्येक मौत के कारणों, संरक्षण व्यवस्था की कमियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की है। बाघों की गिनती संरक्षण की उपलब्धि हो सकती है, लेकिन उनकी सुरक्षित जिंदगी ही संरक्षण व्यवस्था की असली परीक्षा है।

