Bhopal Master Plan 2047: भोपाल में मास्टर प्लान का विरोध, 66 गांवों के किसान उतरे सड़कों पर

Bhopal Master Plan 2047: भोपाल मास्टर प्लान 2047 के BIZ-1 और BIZ-2 प्रावधानों को लेकर किसानों का विरोध तेज है। करीब 66 गांवों के किसान कृषि भूमि, आजीविका और ग्राम सभाओं की सहमति को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

Bhopal Master Plan 2047: भोपाल में मास्टर प्लान का विरोध, 66 गांवों के किसान उतरे सड़कों पर

Bhopal Farmers Protest : भोपाल में प्रस्तावित Bhopal Master Plan 2047 को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। करीब 66 गांवों के किसान जमीन के उपयोग से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों को आशंका है कि भोजताल संरक्षण क्षेत्र में जमीन के लैंड यूज में बदलाव से खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। किसानों ने मांग की है कि उनकी जमीन का उपयोग कृषि ही रखा जाए और योजना को अंतिम रूप देने से पहले प्रभावित ग्राम पंचायतों की राय ली जाए।

मुगलिया छाप से निकली किसानों की रैली

मास्टर प्लान के विरोध में किसानों ने मुगलिया छाप गांव से रैली निकाली। प्रदर्शन को देखते हुए नीलबड़ चौराहे पर पुलिस बैरिकेडिंग किए जाने की जानकारी सामने आई है। किसान प्रस्तावित योजना में अपनी जमीन के भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल लोगों की सटीक संख्या और मौके पर पुलिस की तैनाती की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

BIZ-1 और BIZ-2 हटाने की मांग

किसानों की प्रमुख आपत्ति भोजताल संरक्षण क्षेत्र से जुड़े BIZ-1 और BIZ-2 प्रावधानों को लेकर है। उनका कहना है कि वे वर्षों से अपनी जमीन पर खेती कर रहे हैं और पहले के मास्टर प्लान में भी जमीन का उपयोग कृषि के रूप में दर्ज था। किसानों को आशंका है कि नए प्रावधान लागू होने पर खेती के साथ मकान निर्माण और अन्य गतिविधियों पर भी सीमाएं लग सकती हैं।

किसानों ने मांग की है कि उनकी जमीन का लैंड यूज कृषि ही रखा जाए और BIZ-1 तथा BIZ-2 के प्रावधानों की समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके लिए किसानों की आजीविका और जमीन से जुड़े अधिकारों पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

ग्राम सभाओं की सहमति को लेकर उठाए सवाल

किसानों का आरोप है कि मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया में प्रभावित गांवों की ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं की राय पर्याप्त रूप से नहीं ली गई। उनका कहना है कि जमीन के उपयोग में बदलाव का सीधा असर ग्रामीण परिवारों, खेती और स्थानीय विकास पर पड़ सकता है इसलिए किसानों ने मांग की है कि प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजित कर प्रस्तावित योजना की जानकारी दी जाए और लोगों की आपत्तियां दर्ज की जाएं। उनका तर्क है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से जमीन के इस्तेमाल और गांवों के भविष्य को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान निकाला जा सकता है।

मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर आपत्तियां

भोपाल मास्टर प्लान 2047 अभी प्रस्तावित विकास योजना है। इसके प्रावधानों को अंतिम नियम मानने से पहले ड्राफ्ट और संबंधित जमीन के आधिकारिक लैंड यूज की स्थिति देखना जरूरी है। योजना को लेकर किसानों के अलावा अन्य लोगों ने भी जमीन के उपयोग, प्रस्तावित सड़कों और विकास से जुड़े मुद्दों पर आपत्तियां उठाई हैं।

अब प्रशासन के सामने विकास की योजना, भोजताल के पर्यावरण संरक्षण और किसानों की चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। किसानों की मांग है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि खेती और ग्रामीण आजीविका पर अनावश्यक असर न पड़े।