प्रॉपर्टी डील में नंबर-2 में कैश मांगने का VIDEO : सिग्मा बिल्डर का दावा - सरकारी गाइडलाइन पर रजिस्ट्री, बाकी कैश में लूंगा; सरकार को करोड़ों का चूना
पब्लिक वाणी के स्टिंग ऑपरेशन में बिल्डर अरविंद कोरी से बातचीत का वीडियो सामने आया, भोपाल के बाग मुगालिया में सरकारी गाइडलाइन पर रजिस्ट्री और बाकी रकम नकद लेने की बात बिल्डर ने कही।वियांश विहार प्रोजेक्ट में अनुमति और निर्माण को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
Public Vani Sting Operation : भोपाल। राजधानी भोपाल के रियल एस्टेट कारोबार में संपत्ति की रजिस्ट्री, नकद भुगतान और सरकारी राजस्व से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं। पब्लिक वाणी के स्टिंग ऑपरेशन में बिल्डर अरविंद कोरी से ग्राहक बनकर की गई बातचीत की गई। जिसमें बिल्डर की ओर से सरकारी गाइडलाइन के अनुसार रजिस्ट्री कराने और शेष राशि नकद में लेने की पेशकश की गई।
पब्लिक वाणी की टीम ने ग्राहक बनकर बिल्डर से संपत्ति खरीदने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर बातचीत की। इस दौरान रिपोर्टर ने स्पष्ट किया कि वह संपत्ति खरीदने के लिए बैंक फाइनेंस नहीं कराना चाहता। इसके जवाब में अरविंद कोरी ने सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक रजिस्ट्री कराने और बाकी रकम नकद में लेने की बात कही। इस बातचीत का वीडियो स्टिंग ऑपरेशन में सामने आया है।
रजिस्ट्री की रकम और वास्तविक भुगतान में अंतर का सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संपत्ति की खरीद-बिक्री में सरकारी गाइडलाइन और वास्तविक लेन-देन के बीच अंतर रखा जा रहा है? यदि ऐसा है, तो सरकारी राजस्व पर इसका कितना असर पड़ता है और इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच से ही सामने आ सकेंगे।
अधिकारियों ने शिकायत मिलने पर कार्रवाई की बात कही
मामले को लेकर पब्लिक वाणी की टीम ने उप पंजीयक अंजू मिश्रा से संपर्क किया और कथित तौर पर गलत रजिस्ट्री कराए जाने के संबंध में सवाल पूछे। इस पर उन्होंने शिकायत करने की बात कही और कहा कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, जिला पंजीयक से भी इस संबंध में चर्चा की गई। उन्होंने शिकायती आवेदन देने की बात कहते हुए जांच के बाद कार्रवाई किए जाने की बात कही। अब सवाल यह है कि शिकायत और जांच की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है। यदि दस्तावेजों में वास्तविक भुगतान और रजिस्ट्री की रकम के बीच अंतर मिलता है या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार क्या कार्रवाई होगी?
वियांश विहार प्रोजेक्ट में अनुमति और निर्माण को लेकर भी सवाल
मामला केवल रजिस्ट्री और नकद भुगतान की कथित पेशकश तक सीमित नहीं है। बिल्डर के नए प्रोजेक्ट वियांश विहार को लेकर भी अनुमति और निर्माण पर सवाल उठाए गए हैं।
आरोप है कि प्रोजेक्ट के लिए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) से प्लॉटिंग की अनुमति ली गई, जबकि मौके पर विला बनाए गए। इसके अलावा, एक अन्य मामले में जमीन पर पहले से मकान होने के बावजूद रजिस्ट्री प्लॉट के रूप में कराई गई है।

