पब्लिक वाणी खास खबर : कमाऊ जिलों के मोह और सियासी संरक्षण में अटकी ट्रांसफर-पोस्टिंग

Public Vani Khas Khabar : मध्यप्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में 92 से 93 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की पदोन्नति अटकी है। DPC बैठक के महीनों बाद भी नई पदस्थापना और प्रमोशन सूची जारी नहीं हुई।

पब्लिक वाणी खास खबर : कमाऊ जिलों के मोह और सियासी संरक्षण में अटकी ट्रांसफर-पोस्टिंग

अजीत द्विवेदी @ भोपाल

मध्यप्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया तीन महीने गुजर जाने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। विभागीय अधिकारियों की आपसी खींचतान, कमाऊ जिलों के मोह और सियासी संरक्षण के चलते विभाग में इस तरह के हालात बने हैं। दरअसल, विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और औषधि निरीक्षकों की पदोन्नति के लिए 13 जुलाई को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित की गई थी। इसके बाद से ही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की न तो नई पदस्थापना की गई है और न ही डीपीसी की सूची सार्वजनिक की गई है। यह बात दीगर है कि 17 सितंबर को राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) नरेंद्र शिवाजी पटेल ने दावा किया था कि एक सप्ताह के भीतर पदोन्नति और नई पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए जाएंगे। डीपीसी हुए दो महीने का समय गुजर जाने के बावजूद सूची सार्वजनिक नहीं हुई और आदेश भी जारी नहीं हुए।

92 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की पदोन्नति भी अटकी

वर्तमान में लगभग 92 से 93 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की पदोन्नति होनी है। हालांकि इनमें से अधिकांश अधिकारी अपने मौजूदा मनपसंद जिलों को छोड़ना नहीं चाहते हैं। कुछ अधिकारी (जिनका हाल ही में तबादला हुआ था) अपने रसूख के दम पर वापस कमाऊ वाले बड़े जिलों में जाना चाहते हैं। विभागीय नियमावली और स्थानांतरण के मापदंडों पर मची इसी रस्साकशी और अधिकारियों की लॉबिंग के कारण खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की प्रमोशन लिस्ट अधर में लटकी हुई है।

औषधि निरीक्षकों का मामला

6 अक्टूबर 2026 को जारी की गई औषधि निरीक्षकों की सूची में नियमों को ताक पर रखकर लगभग 8 वर्षों से इंदौर में पदस्थ योगेश गुप्ता का स्थानांतरण नहीं किया गया और उन्हें पदोन्नति के बाद भी इंदौर में ही बनाए रखा गया। आरोप है कि औषधि निरीक्षकों की पूरी लिस्ट केवल प्रभाव और सेटिंग के चलते अटकी पड़ी थी।

ट्रांसफर नीति को दरकिनार करने का खेल

सूत्रों की माने तो लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (और वर्तमान मुख्य सचिव) अशोक वर्णवाल तथा विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह ने नोटशीट में स्पष्ट नियम तय किया था। नियम के तहत जो अधिकारी (खाद्य सुरक्षा अधिकारी व औषधि निरीक्षक) 3 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही स्थान/जिले में पदस्थ है, उन्हें पदोन्नति के बाद अनिवार्य रूप से किसी अन्य जिले में स्थानांतरित किया जाएगा। उनके हाल में तबादले हुए हैं और स्वीकृत पदों की संख्या अनुकूल है, उन्हें यथावत रखा जाएगा। इस नियम के सामने आने के साथ कई ऐसे मठाधीश अधिकारी (जो पिछले 8 से 10 सालों से इंदौर और भोपाल जैसे बड़े और मलाईदार जिलों में जमे हुए हैं) अपने स्थानांतरण को रुकवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने में जुट गए है।