HC Judges Appointment : MP हाई कोर्ट में 7 नए जजों की नियुक्ति पर विवाद! SC-ST प्रतिनिधित्व को लेकर जनहित याचिका दायर

MP High Court Judges Appointment : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सात नए जजों की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। OBC एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने जबलपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

HC Judges Appointment : MP हाई कोर्ट में 7 नए जजों की नियुक्ति पर विवाद! SC-ST प्रतिनिधित्व को लेकर जनहित याचिका दायर

MP High Court Judges Appointment : जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सात नए जजों की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। OBC एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने जबलपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें 26 अक्टूबर 2026 को कॉलेजियम की ओर से की गई सिफारिशों को चुनौती दी गई है। संगठन ने नियुक्ति प्रक्रिया में सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए दोबारा विचार करने की मांग की है।

सात नामों में SC-ST वर्ग का कोई उम्मीदवार नहीं

याचिका के मुताबिक, कॉलेजियम ने सात अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश की है। इनमें छह उम्मीदवार सामान्य वर्ग और एक OBC वर्ग से है। SC और ST वर्ग से किसी उम्मीदवार का नाम शामिल नहीं होने का दावा किया गया है। एसोसिएशन के सचिव रामभजन सिंह लोधी ने यह याचिका दायर की है। संगठन का कहना है कि न्यायपालिका में सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

मौजूदा जजों की संख्या पर भी सवाल

याचिका में हाई कोर्ट के मौजूदा 38 जजों की सामाजिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इनमें 36 सामान्य वर्ग से हैं। SC और OBC वर्ग से एक-एक जज हैं, जबकि ST वर्ग से कोई जज नहीं है। संगठन ने प्रदेश की आबादी में SC, ST और OBC की बड़ी हिस्सेदारी के बावजूद कम प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया है।

राष्ट्रपति सचिवालय को भेजे थे ज्ञापन

एसोसिएशन के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ठाकुर के मुताबिक, संगठन वर्ष 2020 से इस मुद्दे पर ज्ञापन दे रहा है। 15 मई और 4 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और सुप्रीम कोर्ट को भी अभ्यावेदन भेजे गए थे।

नियुक्तियों पर रोक और पारदर्शिता की मांग

याचिका में सात नामों की सिफारिशों पर पुनर्विचार करने और अंतिम फैसले तक नियुक्ति वारंट जारी करने पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही जजों और राज्य विधि अधिकारियों की नियुक्ति में SC, ST और OBC वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए पारदर्शी दिशा-निर्देश बनाने की अपील की गई है। फिलहाल कोर्ट ने इस मामले में कोई फैसला नहीं सुनाया है।