MP में OBC आरक्षण पर सुनवाई फिर टली, हाईकोर्ट ने 13–15 मई की नई तारीखें तय कीं
एमपी में OBC आरक्षण पर कानूनी लड़ाई फिर अटकी। हाईकोर्ट में सुनवाई फिर टली, नई तारीखें तय। कमलेश्वर पटेल ने लगाए गंभीर आरोप, सरकार की कमजोर पैरवी से OBC आरक्षण पर संकट बढ़ा।
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित 27 प्रतिशत आरक्षण मामले में एक बार फिर सुनवाई टल गई है। जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही इस मामले की फाइनल सुनवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13, 14 और 15 मई 2026 की तारीखें निर्धारित की गई हैं। यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में अटका हुआ है और लगातार तारीखों के आगे बढ़ने से पक्षकारों की उम्मीदें भी बार-बार प्रभावित हो रही हैं।
सुनवाई टलने की वजह क्या रही?
मामले की सुनवाई टलने का मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसफर हुई याचिकाओं का पूरा रिकॉर्ड समय पर पेश न होना बताया गया है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सुप्रीम कोर्ट से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड अभी तक पूरी तरह से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
इसके चलते कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट से संबंधित रिकॉर्ड को जल्द से जल्द ट्रांसफर कराए, ताकि मामले की सुनवाई आगे बढ़ सके। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक सभी जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं होते, तब तक अंतिम सुनवाई संभव नहीं है।

पहले भी टल चुकी है सुनवाई
यह पहली बार नहीं है जब इस मामले की सुनवाई टली हो। इससे पहले 27, 28 और 29 अप्रैल को लगातार सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों के चलते दूसरे ही दिन यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। लगातार सुनवाई टलने से मामले को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कमलेश्वर पटेल का सरकार पर हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस नेता और सीडब्ल्यूसी सदस्य एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि OBC आरक्षण मामले में सरकार की भूमिका कमजोर और टालमटोल वाली रही है।
कमलेश्वर पटेल का कहना है कि यदि सरकार की नीयत साफ होती, तो 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर मजबूत कानूनी पैरवी की जाती और इसे वर्षों तक लटकाया नहीं जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को जानबूझकर कमजोर कर रही है, जिससे ओबीसी समाज के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

वकीलों की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
कमलेश्वर पटेल ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा अपने ही विशेष अधिवक्ताओं को अंतिम समय में बदलना चिंता का विषय है। उनके अनुसार, जो वकील इस पूरे मामले की बारीकियों को समझते थे, उन्हें हटाना केस को कमजोर करने जैसा है। उन्होंने इसे ओबीसी हितों के साथ खिलवाड़ बताया।
आरक्षण नीति पर राजनीतिक बहस तेज
इस मामले ने राज्य की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस का आरोप है कि पूर्व सरकार द्वारा लागू किया गया 27 प्रतिशत OBC आरक्षण अब खतरे में है और मौजूदा सरकार इस पर प्रभावी बचाव करने में विफल रही है। वहीं, यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि सरकार स्वयं अपनी कानूनी स्थिति को कमजोर बताती है, तो अदालत में उसका बचाव कैसे मजबूत हो सकता है।
अब सभी की निगाहें मई 2026 में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। कोर्ट द्वारा रिकॉर्ड पूरे होने के निर्देश के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि अगली सुनवाई में मामला आगे बढ़ सकता है। हालांकि, लगातार हो रही देरी ने इस पूरे मामले को और अधिक जटिल और संवेदनशील बना दिया है।
Varsha Shrivastava 
