10 माह बाद भी साइबर जांच रिपोर्ट लंबित: 43 लड़कियों से ठगी, शादी के झांसे, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल का आरोप

कोंडागांव में जुलाई 2025 के ब्लैकमेल केस में आरोपी अमान वीरानी पर 43 लड़कियों से जुड़ी ठगी और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप हैं। पुलिस जांच में मोबाइल से कई फोटो-वीडियो और संपर्क नंबर मिले, जिसके बाद तीन एफआईआर दर्ज हुईं। हालांकि 10 महीने बाद भी साइबर लैब में मोबाइल की जांच पूरी नहीं हो पाई है, जिससे जांच प्रक्रिया और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़िताओं ने धमकी और दबाव के आरोप भी लगाए हैं।

10 माह बाद भी साइबर जांच रिपोर्ट लंबित: 43 लड़कियों से ठगी, शादी के झांसे, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल का आरोप

छत्तीसगढ़। कोंडागांव में जुलाई 2025 में दर्ज एक गंभीर मामले ने अब नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां पुलिस जांच पर कई सवाल उठ रहे हैं। इस केस में अमान वीरानी को एक केंद्रीय सरकारी अधिकारी की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था। अधिकारी ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने पहले दोस्ती की, फिर शादी का झांसा देकर निजी फोटो और वीडियो बनाए और बाद में उन्हें इस्तेमाल कर ब्लैकमेल करते हुए पैसे वसूले।

जांच में सामने आए फोटो-वीडियो...

पुलिस और साइबर टीम ने जब आरोपी का मोबाइल जब्त किया, तो जांच में सामने आया कि उसमें 40 से ज्यादा लड़कियों के फोटो और वीडियो मौजूद थे। इसके अलावा, मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट में 43 लड़कियों के नंबर भी मिले। जब इन नंबरों पर संपर्क किया गया तो पता चला कि इनमें कई पीड़िताएं शामिल हैं, जिनमें लगभग 20 नाबालिग, 10 शादीशुदा महिलाएं और 8 वे लड़कियां थीं जिनकी शादी तय हो चुकी थी।

बताया गया कि ये सभी बस्तर संभाग से जुड़ी हुई थीं। जांच के दौरान दो और पीड़िताओं के सामने आने के बाद आरोपी के खिलाफ अलग-अलग शिकायतों पर तीन एफआईआर दर्ज की गई और मोबाइल को आगे की जांच के लिए साइबर लैब नवा रायपुर भेज दिया गया। इसके बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया।

अप्रैल 2026 में फिर उठा मामला...

हालांकि इस मामले में अब जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। अप्रैल 2026 में इस केस ने फिर से तूल पकड़ा, जब पहली पीड़िता ने कोंडागांव के न्यायाधीश और पुलिस अधीक्षक को ई-मेल भेजा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी उस पर केस वापस लेने का दबाव बना रहा है। उसने यह भी आशंका जताई कि हाल ही में हुआ उसका एक्सीडेंट भी इसी दबाव का हिस्सा हो सकता है।

पीड़िता ने बताया कि वह गंभीर हालत में बिस्तर पर है और थाने जाकर बयान देने में असमर्थ है। इसके बाद जब मामले की आगे जांच की जानकारी ली गई तो पता चला कि शिकायत दोबारा मिलने के बावजूद पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज नहीं किया। इसी वजह से अब पूरे केस की जांच, खासकर साइबर क्राइम एंगल को लेकर, गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है।

कई पीड़िताएं सामने नहीं आ रहीं...

जमानत के बाद अमान कुछ समय जगदलपुर में रहा और अब केशकाल में रह रहा है, जहां वह परिवार की मदद से स्पेयर पार्ट्स की दुकान में काम कर रहा है। रिपोर्टर जब उसके मस्जिद गली स्थित घर पहुंचा तो वहां ताला लगा मिला। इस दौरान कुछ पीड़िताओं से संपर्क की कोशिश हुई, लेकिन उन्होंने बदनामी और परिवार के डर से सामने आने से इनकार कर दिया और कहा कि वे इस घटना को भूलना चाहती हैं। जांच में ऐसे फोटो और वीडियो भी मिले हैं, जिनमें अमान अलग-अलग लड़कियों के साथ दिखाई दे रहा है।

10 महीने बाद भी साइबर जांच अधूरी...

अमान के खिलाफ दर्ज तीनों एफआईआर में उसका मोबाइल मुख्य सबूत माना गया था। इस मोबाइल को जांच के लिए नवा रायपुर साइबर लैब भेजा गया, लेकिन पेंडेंसी के कारण 10 महीने बाद भी इसकी जांच शुरू नहीं हो पाई है। लैब के इंचार्ज रवि गुप्ता के अनुसार, यदि जिले से प्राथमिकता के आधार पर पत्र आता है तो ही जांच आगे बढ़ाई जाती है। इसी वजह से कोंडागांव और केशकाल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं कि मामले को गंभीरता से लिया गया या नहीं। मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें धारा 64(1), 64(2)(डी), 308(2), 324(4), 115(2) और 351(2) शामिल हैं।

पीड़िताओं के आरोप...

पीड़िता ने बताया कि वह कॉलेज में पढ़ती थी, तभी अमान से उसकी जान-पहचान हुई। बातचीत और मुलाकातें बढ़ीं, लेकिन बाद में उसने फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और 25 हजार रुपये वसूले। हर महीने पैसे की मांग की जाती थी। वहीं एक सरकारी नौकरी करने वाली पीड़िता ने बताया कि आरोपी से दोस्ती के बाद उसने पैसे ऐंठे, मारपीट की और फोन तोड़ दिया, जिसके बाद उसे ट्रांसफर लेना पड़ा। शिकायत करने पर भी वह धमकियां देता रहा।

विदेश भागने की योजना बना रहा था... 

एक अन्य पीड़िता (जो पहले निजी कंपनी में काम करती थी) ने बताया कि शादी के बाद भी आरोपी ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर रिश्ता तोड़ने का दबाव बनाया और बाद में इंस्टाग्राम अकाउंट का गलत इस्तेमाल कर अन्य पीड़िताओं को मैसेज किए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के मोबाइल में कई लड़कियों के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिले थे और वह विदेश भागने की योजना बना रहा था। जांच अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल में मौजूद डेटा इस केस में सबसे अहम सबूत है, जिसकी साइबर जांच अभी तक लंबित है।