रीवा में 200 जर्जर भवन बने खतरा, बारिश में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

रीवा नगर निगम क्षेत्र में करीब 200 जर्जर भवन चिन्हित हैं। बारिश के मौसम में इनके गिरने का खतरा बढ़ गया है। कई भवन मुख्य सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में मौजूद हैं।

रीवा में 200 जर्जर भवन बने खतरा, बारिश में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

रीवा। बारिश का मौसम शुरू होते ही रीवा शहर में जर्जर भवनों का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। नगर निगम क्षेत्र में करीब 200 ऐसे भवन चिन्हित किए गए हैं, जो बेहद कमजोर और खतरनाक स्थिति में हैं। इनमें से कई भवन व्यस्त सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों के आसपास मौजूद हैं। इसके बावजूद इन्हें सुरक्षित करने या गिराने की कार्रवाई बेहद धीमी गति से चल रही है। ऐसे में इन भवनों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ आसपास से गुजरने वाले राहगीरों की जान भी जोखिम में बनी हुई है।

शहर में कई जर्जर मकान ऐसे हैं, जिनके ठीक बगल से सड़क गुजरती है। इन रास्तों से हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं और बच्चे भी स्कूल जाते हैं। बारिश के दौरान पुराने और कमजोर भवनों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नगर निगम की धीमी कार्रवाई किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।

पिछले हादसे के बाद भी नहीं चेता प्रशासन

जर्जर भवनों का खतरा रीवा के लिए नया नहीं है। पिछली बरसात में रीवा के गढ़ क्षेत्र में स्कूल जा रहे बच्चों पर एक जर्जर मकान गिर गया था। इस दर्दनाक हादसे में तीन बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद जर्जर भवनों को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बावजूद शहर में बड़ी संख्या में खतरनाक भवन आज भी मौजूद हैं।

नगर निगम क्षेत्र के अलग-अलग वार्डों में करीब 200 जर्जर मकान पहले से चिन्हित किए गए हैं। इनमें से कुछ भवन मालिकों को नोटिस जारी कर मकान खाली करने और स्वयं भवन गिराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, अधिकांश मामलों में न तो भवन मालिकों ने मकान गिराए और न ही नगर निगम की ओर से प्रभावी कार्रवाई की गई।

203 में से सिर्फ पांच भवनों पर हुई कार्रवाई

कुछ समय पहले शहर में कुल 203 जर्जर भवन चिन्हित किए गए थे। इनमें से भवन स्वामियों ने केवल दो भवनों को स्वयं गिराया, जबकि नगर निगम की ओर से तीन भवनों को गिराने की कार्रवाई की गई। यानी बड़ी संख्या में खतरनाक भवन अब भी शहर में खड़े हैं।

लगातार बारिश पुराने भवनों की दीवारों, छतों और नींव को और कमजोर कर देती है। तेज बारिश और आंधी के दौरान ऐसे भवनों के गिरने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। शहर के कई जर्जर भवन मुख्य सड़कों, व्यस्त बाजारों और घनी आबादी वाले इलाकों में स्थित हैं। ऐसे में इनका खतरा केवल इनमें रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास से गुजरने वाले राहगीरों पर भी बना हुआ है।

मजबूरी में जर्जर मकानों में रह रहे लोग

शहर में कई लोग ऐसे जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं, जिनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। पुराने भवनों की छतों में लगी लकड़ियां सड़ चुकी हैं और दीवारों में सीलन दिखाई देने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान पानी भीतर तक पहुंच जाता है। लगातार बारिश होने पर भवन के कमजोर हिस्सों के गिरने का डर बना रहता है।

इसके बावजूद कई परिवार जान जोखिम में डालकर इन्हीं मकानों में अपना जीवन यापन कर रहे हैं। वहीं सड़क किनारे मौजूद जर्जर इमारतें राहगीरों के लिए भी खतरा बनी हुई हैं। सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन पहले से इन खतरनाक भवनों को लेकर ठोस कदम क्यों नहीं उठा रहा है?

जर्जर भवन में नगर निगम का कामकाज

विडंबना यह भी है कि लोगों को जर्जर भवनों से सावधान करने और खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई करने वाला नगर निगम स्वयं पुराने और कमजोर भवनों में काम कर रहा है। कई सरकारी भवन काफी पुराने हो चुके हैं। कुछ जगहों पर छतों में लगी लकड़ियां सड़ चुकी हैं और बारिश के दौरान सीलन तथा पानी भीतर तक पहुंचने की समस्या सामने आती है।

लगातार बारिश के दौरान ऐसे भवन भी खतरा पैदा कर सकते हैं। भवनों की स्थिति धीरे-धीरे खराब होती जा रही है, लेकिन समय रहते मरम्मत या अन्य सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में गंभीर हादसा हो सकता है।

कलेक्टर ने दिए कार्रवाई के निर्देश

इस पूरे मामले में रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने जर्जर भवनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के मुताबिक विशेष रूप से स्कूलों के आसपास मौजूद जर्जर भवनों और जर्जर इमारतों में संचालित स्कूलों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि ऐसे खतरनाक भवनों को हटाने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। निर्देशों का पालन नहीं करने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यह है कि प्रशासन के निर्देश जमीन पर कितनी तेजी से लागू होते हैं। क्योंकि बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और शहर में करीब 200 जर्जर भवन अब भी खतरे के रूप में खड़े हैं। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो एक छोटी-सी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।