पद्म विभूषण पंडवानी गायिका पंचतत्व में विलीन, तीजन बाई का राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, नाना से महाभारत सुनाने की प्रेरणा मिली, 13 की उम्र में पहली बार मंच पर आईं

पद्म विभूषण पंडवानी गायिका पंचतत्व में विलीन, तीजन बाई का राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई पंचतत्व में विलीन हो गई, उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 70 साल की उम्र में छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। उन्होंने 4 जुलाई की रात 3.15 बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बीमार थीं।

प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर शोक जताया। उन्होंने X पर लिखा- उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली, Teejan Bai के निधन पर पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी की महान कलाकार तीजन बाई के निधन पर मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इसे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी विलक्षण प्रतिभा और पंडवानी गायन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। 

तीजन बाई ने पंडवानी को विदेशों तक नई पहचान दिलाई

तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत करने की उनकी कला ने उन्हें भारतीय लोक संस्कृति की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में शामिल किया। भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। आज पैतृक गांव गनियारी में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने पंडवानी के जरिए देश-दुनिया में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया।

पीएम मोदी ने ली थी स्वास्थ्य की जानकारी

तीजन बाई के स्वास्थ्य की जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ली थी। 1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी ने तीजन बाई की बहू वेणू देशमुख को फोन लगाकर उनका हालचाल पूछा था। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने चिंता जताई और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया था।

फोन पर नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले अपना परिचय देते हुए कहा- नमस्कार वेणू जी, मैं देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोल रहा हूं। तीजन बाई जी की तबीयत कैसी है? वेणू देशमुख ने बताया कि 'मम्मी की तबीयत इन दिनों ठीक नहीं है, वे काफी कमजोर हो गई हैं।' इस पर प्रधानमंत्री ने अफसोस जताते हुए कहा था कि उनका ध्यान रखिए, और अगर किसी भी चीज की जरूरत हो तो सीधे मुझसे संपर्क कीजिए।

 वेणू देशमुख ने बताया था कि प्रधानमंत्री ने तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता दिखाई और कहा कि देश के लिए उन्होंने जो योगदान दिया है, वह अमूल्य है। तीजन बाई जी छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा की धरोहर हैं।

डॉ तीजन बाई को साल 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को भिलाई के गनियारी गांव में हुआ था। देश-विदेश में पंडावनी लोक गायिकी को पहचान दिलाने वाली तीजन बाई की जिंदगी का सफर आसान नहीं रहा है। इसी गायिकी की वजह से उन्हें समाज ने बेदखल कर दिया था। समाज से निकाले जाने के बाद भी उन्होंने गाना नहीं छोड़ा।

नाना को सुनकर बढ़ी गाने के प्रति रुचि

तीजन और पंडावनी एक-दूसरे के पूरक रहे। पिता का नाम चुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था। पारधी जनजाति की तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते-सुनाते देखतीं थी। धीरे-धीरे उन्हें ये कहानियां याद हो गई। उनकी लगन और प्रतिभा को देखकर गायक उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें प्रशिक्षण दिया। 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय में महिला पंडवानी गायिकाएं केवल बैठकर गा सकती थीं जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं, जिन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी की।

कभी स्कूल नहीं गईं, 4 बार मिली डी. लिट.

बचपन में स्कूल का मुंह न देख पाने वाली पंडवानी गायिका तीजन बाई साक्षरता अभियान में किसी तरह पांचवीं की सीढ़ी ही चढ़ पाईं, लेकिन उनकी पंडवानी की ऐसी धूम रही कि भारत रत्न छोड़ सब पुरस्कार मिल गए। तीजन बाई ऐसी हस्ती हैं, जिन्हें 4 बार डी. लिट.की उपाधि मिली।

तीजन बाई पिछले करीब 2 सालों से बीमार थीं। कुछ दिनों पहले उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई। उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर में भर्ती कराया गया था। एम्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी विशेष निगरानी कर रही थी। जानकारी के मुताबिक तीजन बाई को सांस लेने में तकलीफ और उम्र से संबंधित अन्य जटिलताओं के कारण ICU में रखा गया था।