बकस्वाहा में अवैध रेत कारोबार पर प्रशासन की सख्ती, क्या नए तरीकों से बच रहे हैं रेत माफिया?

बकस्वाहा में अवैध रेत परिवहन पर प्रशासन की कार्रवाई तेज है। मुखबिर तंत्र, बिना ट्रांजिट पास परिवहन और लंबी दूरी की टीपी के कथित दुरुपयोग को लेकर क्या हैं बड़े सवाल, पढ़ें पूरी खबर।

बकस्वाहा में अवैध रेत कारोबार पर प्रशासन की सख्ती, क्या नए तरीकों से बच रहे हैं रेत माफिया?

बकस्वाहा क्षेत्र में अवैध रेत के कारोबार के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। ताजा मामला रविवार सुबह सामने आया, जब अधिकारियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर कथित तौर पर एक डंपर चालक सड़क पर ही रेत गिराकर वाहन लेकर फरार हो गया। इसके बाद प्रशासन ने सड़क से रेत हटवाकर यातायात बहाल कराया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।

अब सवाल यह है कि लगातार कार्रवाई के बावजूद अवैध रेत का परिवहन आखिर कैसे जारी है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि रेत के कारोबार से जुड़े कुछ लोग प्रशासन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मुखबिरों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

सबसे पहली वजह यह बताई जा रही है कि अधिकारियों की आवाजाही की जानकारी समय रहते कुछ लोगों तक पहुंच जाती है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार प्रमुख मार्गों और चौराहों पर ऐसे लोग सक्रिय रहते हैं, जो राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की गतिविधियों की सूचना तत्काल पहुंचा देते हैं। यदि ऐसा होता है तो कार्रवाई से पहले वाहन चालकों को सतर्क होने का मौका मिल सकता है।

दूसरी बड़ी बात बिना वैध ट्रांजिट पास के रेत परिवहन को लेकर सामने आ रही है। क्षेत्रीय सूत्रों का दावा है कि कई ट्रक और हाइवा प्रतिदिन आसपास के इलाकों तक रेत पहुंचा रहे हैं। यदि इन दावों में सच्चाई है तो इससे न केवल शासन के राजस्व पर असर पड़ सकता है, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े हो सकते हैं।

इसके अलावा लंबी दूरी के ट्रांजिट पास यानी टीपी के कथित दुरुपयोग की भी चर्चा है। जानकारी के अनुसार कुछ वाहन दूर के जिलों के लिए जारी टीपी का इस्तेमाल करते हैं। आरोप है कि लंबी अवधि वाले ट्रांजिट पास का लाभ उठाकर कुछ वाहन निर्धारित मार्ग से अलग अतिरिक्त फेरे लगाते हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

यही कारण है कि अब जीपीएस रिकॉर्ड और ट्रांजिट पास की जांच की मांग भी उठने लगी है। माना जा रहा है कि यदि वाहनों की आवाजाही और टीपी के रिकॉर्ड का मिलान किया जाए तो पूरे नेटवर्क की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। फिलहाल प्रशासन ने इस संबंध में किसी विस्तृत जांच रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

इस पूरे मामले में प्रशासन का रुख स्पष्ट दिखाई देता है। नायब तहसीलदार सुनील कुमार ने कहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर अवैध रेत परिवहन में शामिल वाहनों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उनका कहना है कि अवैध खनन और परिवहन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन की लगातार कार्रवाई से अवैध रेत कारोबार पर कितना प्रभाव पड़ता है। साथ ही, जिन आरोपों की चर्चा स्थानीय स्तर पर हो रही है, क्या उनकी पुष्टि जांच में हो पाएगी या नहीं। आने वाले दिनों में यही इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकती है।