मऊगंज में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल, 41 हजार वेतन और सरकारी दर्जे की मांग
मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का आक्रोश शुक्रवार को मऊगंज में सड़कों पर दिखाई दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन मध्यप्रदेश के आह्वान पर जिलेभर की सैकड़ों कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं और प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर काला दिवस मनाया।
राजेंद्र पयासी, मऊगंज
यूनियन की जिला अध्यक्ष साधना त्रिपाठी के नेतृत्व में निकले इस प्रदर्शन में उपाध्यक्ष अर्चना द्विवेदी, सविता द्विवेदी, विभा मिश्रा, स्नेहलता मिश्रा, मनोरमा चौरसिया सहित जिले के विभिन्न ब्लॉकों से आई महिलाएं शामिल रहीं। प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी कलेक्टर रश्मि चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपते हुए मांगों पर त्वरित विधिक कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में यूनियन ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2018 के पश्चात मानदेय में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि कार्यक्षेत्र और उत्तरदायित्वों में निरंतर वृद्धि हुई है। संविधान एवं श्रम कानूनों के अंतर्गत न्यूनतम वेतन के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए अपनी मांगें रखते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्रेड-3 एवं सहायिकाओं को ग्रेड-4 के अंतर्गत सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्रदान किया जाए।
नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक कार्यकर्ताओं को 41,000 रुपए एवं सहायिकाओं को 35,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। सेवानिवृत्ति के उपरांत 18,000 रुपए प्रतिमाह पेंशन की व्यवस्था की जाए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में ग्रेच्युटी लागू की जाए। सेवानिवृत्ति की आयु सीमा समाप्त कर सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। फेस रिकग्निशन सिस्टम एवं ई-केवाईसी की अनिवार्यता समाप्त की जाए। डिजिटल कार्य हेतु टैबलेट एवं डेटा सुविधा शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाए। पोषण ट्रैकर ऐप से उत्पन्न तकनीकी समस्याओं का निराकरण किया जाए।

कार्यक्षेत्र और अवसंरचना पर जोर
कार्यकर्ताओं ने कहा कि आईसीडीएस के मूल कार्य के अतिरिक्त उन्हें बीएलओ ड्यूटी, सर्वे एवं जनगणना जैसे गैर-आईसीडीएस कार्यों में संलग्न किया जा रहा है, जिससे 0-6 वर्ष के बच्चों एवं गर्भवती-धात्री महिलाओं की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छ पेयजल, गैस कनेक्शन, रसोई उपकरण, बच्चों हेतु यूनिफॉर्म, पाठ्य सामग्री, खिलौने एवं पौष्टिक आहार की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
यूनियन ने सुपरवाइजर पदों पर वरिष्ठ एवं योग्य कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता एवं सहायिकाओं हेतु पदोन्नति के अवसर सृजित करने का भी आग्रह किया।

जिला अध्यक्ष साधना त्रिपाठी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह संघर्ष वर्षों से लंबित है। यदि शासन द्वारा निर्धारित समय-सीमा में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

