छत्तीसगढ़ आरक्षक भर्ती में गड़बड़ी: ज्वाइनिंग पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
छत्तीसगढ़ में आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने 2023 में 6000 कॉन्स्टेबल पदों पर हुई भर्ती से जुड़े मामले में रोक लगा दी है।
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने 2023 में 6000 कॉन्स्टेबल पदों पर हुई भर्ती से जुड़े मामले में रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने गड़बड़ियों को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई तक नए नियुक्ति पत्र जारी करने पर भी अंतरिम रोक लगाई है। यानी अगली सुनवाई तक पुलिस विभाग किसी भी उम्मीदवार को जॉइनिंग लेटर नहीं दे सकेगा। सरकार को जवाब देने लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। अब मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।
छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग ने सभी जिलों में आरक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए लिखित और शारीरिक परीक्षा ली थी। इसमें गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए याचिकाएं लगाई गई। सक्ति, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली निवासी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्विनी कुमार यादव ने याचिका दायर की। इस याचिका की सुनवाई हाई कोर्ट की न्यायाधीश पार्थ प्रतिम साहू के समक्ष हुई।
याचिकाकर्ता की तरफ से दलील देते हुए अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने कहा कि सरकार द्वारा जो जांच हुई उसमें स्वयं सरकार यह मान रही है कि कुछ नाम एक या दूसरी जगह पर भी पाए गए हैं, जिसमें कुछ गड़बड़ियों की आशंका है। सरकार यह भी मान रही है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान जिस कंपनी को डाटा रिकॉर्डिंग का काम दिया गया था, रिजल्ट जारी होने से पहले ही फिजिकल टेस्ट का डाटा रिकॉर्डिंग करने वाली कंपनी ने संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए। जिसके पीछे की साफ मनसा ही इसमें भ्रष्टाचार करने की थी।
129 अभ्यर्थियों के सामने आ चुके नाम
कोर्ट के सामने पक्ष रखते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि अभी तक 129 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं। जिन्हें अनुचित लाभ देने का कार्य किया है। पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के तहत उप नियम 7 का हवाला देते हुए यह कहा गया है कि भर्ती में यदि अनियमितता पाई जाती है तो पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर नई भर्ती की जानी चाहिए। इसी के तहत कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अपील करते हुए कहा कि जारी की गई मेधावी सूची की जांच होनी चाहिए ताकि इसकी स्थिति स्पष्ट हो सके।
2500 उम्मीदवारों को बांटा गया नियुक्ति पत्र
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि कुल 6000 पदों में से अब तक लगभग 2500 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र बांटे जा चुके हैं। ऐसे में यदि नियुक्तियां नहीं रोकी गईं, तो जांच प्रभावित हो सकती है।
याचिकाकर्ता की पूरी दलील सुनने के बाद न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिमा साहू ने इस भर्ती प्रक्रिया में आगे किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दिया है। जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई तक किसी भी तरह के नियुक्ति पत्र को जारी करने पर रोक रहेगा।
pushpendra 
