पब्लिक वाणी पड़ताल : 33 घंटे वाले एक ही ई-टीपी पर 3-3 बार दौड़ रहे डंपर, सरकार को करोड़ों की चपत
Public Vani Investigation : सीधी में ई-ट्रांजिट पास (ई-टीपी) के दुरुपयोग का गंभीर मामला, प्रशासन व खनिज अधिकारी मौन
भोपाल / सीधी
सीधी जिले में रेत खनन और परिवहन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी एवं राजस्व हानि का मामला सामने आया है। जिले के रेत खनन ठेकेदार (एमडीओ) मेसर्स शक्ति एंटरप्राइजेज पर एक ही ई-ट्रॉजिट पास (ई-टीपी) का इस्तेमाल बार-बार कर नियम विरुद्ध तरीके से अवैध रेत परिवहन कराने का आरोप है। इस सम्बंध में उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। मामले की शिकायत प्रमुख सचिव खनिज साधन तथा एमडी खनिज निगम से की गई है। उनसे जिला खनिज अधिकारी कपिल मुनि शुक्ला के खिलाफ शिकायत की गई है।
एआई चेकगेट और सीसीटीवी कैमरों पर सवाल
सीधी-रीवा एवं सीधी-मऊगंज मुख्य मार्गों पर खनिज विभाग द्वारा अत्याधुनिक एआई आधारित चेकगेट एवं सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। यदि इन चेकगेट्स के सीसीटीवी रिकॉर्ड, वाहनों के पंजीकरण नंबर और पोर्टल पर दर्ज ई-टीपी विवरण का मिलान किया जाए, तो एक ही पास पर बार-बार हुए रेत परिवहन का सच तत्काल सामने आ जाएगा। इस पूरे मामले की तत्काल उच्च स्तर पर जांच कराने की मांग शासन-प्रशासन से की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि यदि जांच में अनियमितता और अवैध परिवहन की पुष्टि होती है, तो संबंधित एमडीओ एवं इसमें संलिप्त अधिकारियों व व्यक्तियों के विरुद्ध खनिज नियमों के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा शासन को हुई राजस्व हानि की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित की जाए। इसका असर आसपास के जिलों पर भी पड़ रहा है।
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ईसी मात्रा और निविदा राशि विवाद
जानकारी के अनुसार सीधी जिले का रेत खनन ठेका मेसर्स शक्ति एंटरप्राइजेज को वार्षिक 16.00 लाख घनमीटर रेत मात्रा के लिए 82.00 करोड़ की वार्षिक निविदा राशि पर आवंटित किया गया है। हालांकि, वर्तमान में खदानों के लिए मात्र 3.18 लाख घनमीटर वार्षिक मात्रा की ही पर्यावरणीय स्वीकृति उपलब्ध है। उक्त आधार पर एमडीओ द्वारा जबलपुर उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत प्राप्त की गई है। इसके तहत उपलब्ध ईसी मात्रा के अनुपात में लगभग 20.00 करोड़ वार्षिक राशि का भुगतान मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम को किया जाना है, जो कि मूल निविदा राशि 82.00 करोड़ से काफी कम है।
गौरतलब बात यह है कि 33 घंटे की वैधता वाले एक ही ईटीपी पर कई चक्कर लगाने का सबसे गंभीर मामला उजागर हुआ है। ईसी की सीमित स्वीकृत मात्रा होने के बावजूद 33 घंटे की समय-सीमा/वैधता वाले एक ही ई-ट्रांजिट पास ईटीपी पर गाड़ियों से 3 से 4 बार तक रेत का परिवहन कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह गतिविधि 14 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर लगातार बढ़ रही है।
शिकायतकर्ताओं ने प्रमाण स्वरूप 5 वाहनों के 33 घंटे की वैधता वाले ईटीपी संलग्न करते हुए इसे निविदा शर्तों और मध्यप्रदेश खनिज परिवहन नियमों का प्रत्यक्ष उल्लंघन बताया है। पब्लिक वाणी की टीम द्वारा की गई जांच में कई और सनसनीखेज जानकारियां सामने आई है, जिसमें प्रतिदिन एक टीपी पर तीन से चार चक्कर लगाने वाली गाडियों की फोटो और गाडी मालिक के नाम भी है।
14 अक्टूबर 2026 : 14 वाहनों द्वारा एक ही ईटीपी पर 3-4 बार परिवहन।
15 अक्टूबर 2026 : 20 वाहनों द्वारा एक ही ईटीपी पर 3-4 बार परिवहन।
116 अक्टूबर 2026 : 22 वाहनों द्वारा एक ही ई-टीपी पर 3-4 बार परिवहन।
82 नहीं 20 करोड़ मिलेंगे
प्रारम्भिक जांच में तीस से पैंतीस हाइवा द्वारा गलत तरीके से रेत का परिवहन किया जा रहा है। अचानक 13 अक्टूबर के बाद सात घंटे के स्थान पर तैंतीस घंटे की टीपी क्यों दी जाने लगी। क्या सीधी से सहारनपुर रेत लेकर जा ।कता है। यह दूरी लगभग 950 किलोमीटर है। यदि इस पर लगाम नहीं लगाई गई तो 82 करोड़ के ठेके में शासन को 20 करोड ही मिलेगे।
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इनका कहना है
6 एक टीपी पर यदि एक से अधिक गाड़ी जाती है, तो गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - ए फ्रेक
नोबल, एमडी खनिज निगम मप्र

