USDA ने डराया : अल-नीनो के असर से गन्ने की फसल को नुकसान, महंगी हो सकती है शक्कर

India Sugar Production : यूएसडीए ने 2026-27 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन 2.95 करोड़ मीट्रिक टन रहने का अनुमान लगाया है। यह पिछले अनुमान से 41 लाख मीट्रिक टन कम है।

USDA ने डराया : अल-नीनो के असर से गन्ने की फसल को नुकसान, महंगी हो सकती है शक्कर

पब्लिक वाणी @ नई दिल्ली। 

भारत में बारिश की कमी का असर अब गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन (India Sugar Production) पर पड़ने की आशंका है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने अक्टूबर 2026 से शुरू हुए 2026-27 सीजन के लिए भारत के चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 2.95 करोड़ मीट्रिक टन कर दिया है। इससे पहले उत्पादन 3.36 करोड़ मीट्रिक टन रहने का अनुमान था।

इस तरह उत्पादन के अनुमान में करीब 41 लाख मीट्रिक टन की कटौती की गई है। इसकी प्रमुख वजह 2026 में बारिश की कमी और गन्ने की फसल पर उसका संभावित असर बताया गया है। यूएसडीए के मुताबिक, कम बारिश से गन्ने की पैदावार घट सकती है। इसके साथ ही गन्ने में सुक्रोज यानी चीनी की मात्रा भी प्रभावित होने की आशंका है। 

गन्ने में मौजूद सुक्रोज से ही चीनी तैयार की जाती है। यदि फसल कम होती है और गन्ने में चीनी की मात्रा घटती है, तो मिलों में कुल उत्पादन पर दोहरा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गन्ने का उत्पादन पिछले सीजन के करीब 45.5 करोड़ मीट्रिक टन से घटकर 2026-27 में 43.4 करोड़ मीट्रिक टन रह सकता है। यानी गन्ने की पैदावार में लगभग 2.1 करोड़ मीट्रिक टन की कमी का अनुमान है। 

पानी की कमी से चीनी मिलों का संचालन भी प्रभावित हो सकता है। चीनी बनाने की प्रक्रिया में पानी की जरूरत होती है। यदि 2027 की शुरुआत में सूखे जैसे हालात बने रहते हैं, तो गन्ने की पेराई और मिलों के कामकाज में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अल-नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव से जुड़ी मौसमी घटना है, जो कई क्षेत्रों में बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, यूएसडीए ने भारत में चीनी उत्पादन के अनुमान में कटौती का प्रमुख कारण बारिश की कमी को बताया है। इस सीजन का वास्तविक उत्पादन गन्ने की उपलब्धता, उसमें सुक्रोज की मात्रा और पानी की स्थिति पर निर्भर करेगा।

गन्ने में सुक्रोज घटने का खतरा

गन्ने में मौजूद सुक्रोज वह प्राकृतिक शर्करा है, जिससे चीनी तैयार की जाती है। फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिलने पर उसकी वृद्धि और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में गन्ने की कुल पैदावार के साथ उससे मिलने वाली चीनी की मात्रा भी घटने का खतरा रहता है।

यूएसडीए ने 2026-27 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन 2.95 करोड़ मीट्रिक टन रहने का अनुमान लगाया है। यह पिछले अनुमान से 41 लाख मीट्रिक टन कम है। हालांकि, वास्तविक स्थिति का आकलन फसल की कटाई और मिलों में पेराई के बाद ही हो सकेगा।

पानी की कमी बढ़ाएगी मिलों की परेशानी

चीनी मिलों को गन्ने की पेराई और चीनी बनाने की विभिन्न प्रक्रियाओं में पानी की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय तक पानी की कमी बनी रहने पर उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यदि खेतों से कम गन्ना पहुंचता है, तो मिलों को अपनी क्षमता के अनुसार काम करने के लिए पर्याप्त कच्चा माल भी नहीं मिल पाएगा। यूएसडीए ने 2027 की शुरुआत में सूखे जैसी स्थिति बनने पर पेराई संबंधी कठिनाइयों की आशंका जताई है। हालांकि, इसका वास्तविक असर क्षेत्रवार पानी की उपलब्धता और गन्ने की आपूर्ति पर निर्भर करेगा।