43 साल पुरानी अनूठी परंपरा: दशहरे पर इंदौर में सीवर चैंबरों की पूजा, मां कालका से सफाई मित्र मांगते हैं सलामती की दुआ

इंदौर में दशहरे के दिन ड्रेनेज विभाग के सफाई कर्मचारी गैंती, फावड़ा, तगाड़ी और सफाई में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का पूजन करते हैं। इसके साथ ही सीवर चैंबर को मां कालका का स्वरूप मानकर विधि-विधान से पूजा की जाती है।

43 साल पुरानी अनूठी परंपरा: दशहरे पर इंदौर में सीवर चैंबरों की पूजा, मां कालका से सफाई मित्र मांगते हैं सलामती की दुआ

दशहरे पर देशभर में बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया जाता है, लेकिन इंदौर में एक ऐसी परंपरा है, जो सफाई मित्रों की आस्था के साथ उनकी सुरक्षा की कामना से भी जुड़ी है। यहां पिछले 43 वर्षों से दशहरे पर सीवर चैंबर और सफाई के औजारों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि चैंबरों में मां कालका का वास है। जहरीली गैसों और जानलेवा परिस्थितियों के बीच काम करने वाले सफाई कर्मचारी मां से अपने और साथियों के सुरक्षित रहने की प्रार्थना करते हैं।

सीवर चैंबर और सफाई के औजारों का पूजन

दरअसल, इंदौर में दशहरे के दिन ड्रेनेज विभाग के सफाई कर्मचारी गैंती, फावड़ा, तगाड़ी और सफाई में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का पूजन करते हैं। इसके साथ ही सीवर चैंबर को मां कालका का स्वरूप मानकर विधि-विधान से पूजा की जाती है। भोग-प्रसादी, कद्दू की बलि और मदिरा का भोग लगाने की परंपरा भी निभाई जाती है।

होल्कर कालीन चैंबर हैं आयोजन का खास आकर्षण

इस आयोजन का खास आकर्षण होल्कर कालीन पुराने चैंबर हैं, जिनकी गहराई 28 से 35 फीट तक बताई जाती है। इन चैंबरों में सफाई के दौरान जहरीली गैस, दूषित पानी और अन्य खतरों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह पूजन कर्मचारियों की सुरक्षा की कामना का प्रतीक है।

राजू गोहर, चैंबर सुपरवाइजर

सफाई मित्रों की सुरक्षा भी जरूरी

हालांकि, आस्था के साथ सुरक्षित उपकरण, गैस की जांच और सुरक्षा नियमों का पालन भी बेहद जरूरी है। वहीं, 43 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा संदेश देती है कि शहर को स्वच्छ रखने वाले सफाई मित्रों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है, जितनी स्वच्छता।