Iran का सख्त ऐलान : एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम नहीं जाएगा देश से बाहर, अमेरिका से पहले भरोसा जरूरी
Iran Nuclear Policy : ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सेक्रेटरी मोहसिन रजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका भरोसा जीतने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता और ईरान की सभी शर्तें नहीं मानता, तब तक बातचीत नहीं होगी।
Iran Nuclear Policy : तेहरान। ईरान ने साफ कहा- एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम किसी देश को नहीं भेजेंगेईरान ने दोहराया है कि वह अपना एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम किसी दूसरे देश को नहीं भेजेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका ठोस कदम उठाकर भरोसा नहीं जीतता और ईरान की सभी शर्तें नहीं मानता, बातचीत नहीं होगी। सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई भी कह चुके हैं कि हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंचा यूरेनियम देश से बाहर नहीं जाना चाहिए।
अमेरिका के सामने रखी गईं सात शर्तें
संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका तब तक ईरान का भरोसा नहीं जीत सकता जब तक वह सात शर्तें पूरी नहीं करता। ये शर्तें पिछले महीने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दोबारा खोलने के लिए रखी गई थीं। प्रमुख मांगों में बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करना, तेल निर्यात पर प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकना शामिल है।
परमाणु कार्यक्रम पर गहरा विवाद
ईरान का परमाणु कार्यक्रम समझौते (Nuclear program agreements) की राह में बड़ी रुकावट बना हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन क्षमता में ठोस कमी करनी होगी। यह अमेरिकी मांगें मानने और आठ महीने से चल रही जंग खत्म करने के लिए जरूरी है। 3-5 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम बिजली बनाने में लगता है। 20 प्रतिशत उच्च स्तर है लेकिन हथियार नहीं बनता। 60 प्रतिशत को नियर वेपन ग्रेड कहा जाता है। 90 प्रतिशत या ज्यादा वेपन ग्रेड होता है।
ट्रम्प का सख्त रुख और पाकिस्तान की मध्यस्थता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (President Donald Trump) ने 15 अक्टूबर को कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने पहाड़ के नीचे बने ठिकाने पर हमले की संभावना भी जताई, लेकिन साफ किया कि अमेरिका परमाणु बम का इस्तेमाल नहीं करेगा।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Marshal Asim Munir) बातचीत फिर शुरू कराने के लिए ईरान दौरे पर हैं। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और स्पीकर गालिबाफ से मुलाकात हुई। पाकिस्तान पहले भी मध्यस्थ रहा है। जून में अंतरिम शांति समझौता हुआ था, लेकिन कुछ हफ्तों बाद फिर लड़ाई शुरू हो गई।
28 फरवरी से जारी है सैन्य टकराव
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। ईरान ने जवाब में इजराइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका का मकसद ईरान की परमाणु क्षमता कमजोर करना बताता है।
ईरान कहता है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और उसे परमाणु तकनीक का अधिकार है। अमेरिका, इजराइल और पश्चिमी देश 60 प्रतिशत संवर्धन पर चिंता जताते हैं, जबकि ईरान हथियार बनाने से इनकार करता है।

