अटलांटिक महासागर में क्रूज शिप पर हंतावायरस का कहर: 3 मौतें

अटलांटिक महासागर में क्रूज शिप MV Hondius पर खतरनाक हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जिसमें 3 लोगों की मौत हो चुकी है और कई यात्री बीमार हैं। जहाज को अफ्रीका के केप वर्डे तट के पास क्वारंटीन कर दिया गया है और किसी भी यात्री को उतरने की अनुमति नहीं दी गई है।

अटलांटिक महासागर में क्रूज शिप पर हंतावायरस का कहर: 3 मौतें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को पुष्टि की कि नीदरलैंड के झंडे वाली क्रूज शिप MV होंडियस पर संदिग्ध हंतावायरस (चूहों वाला वायरस) संक्रमण फैल गया है। इस महामारी में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती है। कुल छह लोगों में संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं – एक की लैब में पुष्टि हो चुकी है और पांच संदिग्ध हैं।

जहाज पर कुल 170 यात्री और 71 क्रू सदस्य सवार हैं। फिलहाल जहाज को अफ्रीकी देश केप वर्डे की राजधानी प्राया के तट पर रोका गया है। यात्रियों और क्रू को उतरने की अनुमति नहीं दी गई है, ताकि संक्रमण का आगे प्रसार रोका जा सके। स्थानीय अधिकारी और WHO जांच में जुटे हुए हैं।

यात्रा की कहानी..
7 हफ्तों का रोमांचक सफर, MV होंडियस 20 मार्च 2026 को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुआ था। यह एक पोलर एक्सपीडिशन शिप है, जो ओशनवाइड एक्सपेडिशंस कंपनी द्वारा संचालित की जाती है। यात्रा का रूट दक्षिणी ध्रुव (अंटार्कटिका) के आसपास के क्षेत्रों, फॉकलैंड द्वीप, साउथ जॉर्जिया, सेंट हेलेना और अन्य जगहों से होकर स्पेन के कैनरी द्वीप्स तक जाना था। लगभग 45-50 दिनों की इस लंबी यात्रा में जहाज अटलांटिक महासागर पार कर रहा था। लेकिन बीच में यह वायरस ने सब कुछ बदल दिया।


मौतों का सिलसिला..

पहली मौत:
70 वर्षीय डच नागरिक। जहाज पर ही बीमार पड़े और साउथ अटलांटिक में ब्रिटिश क्षेत्र सेंट हेलेना में शव उतारा गया।

दूसरी मौत:
उनकी 69 वर्षीय पत्नी। साउथ अफ्रीका पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर बेहोश हुईं और अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

तीसरी मौत:
एक अन्य डच यात्री। शव अभी भी जहाज पर है। कंपनी प्रयास कर रही है कि शव को स्वदेश भेजा जाए।

एक ब्रिटिश यात्री (69 वर्षीय) फिलहाल आईसीयू में है। दो अन्य क्रू सदस्यों को भी मेडिकल सहायता की जरूरत है।

हंतावायरस क्या है? कैसे फैलता है?..
हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों से मनुष्यों में फैलता है। चूहों को खुद इस वायरस से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन इंसान में यह घातक साबित हो सकता है। CDC के अनुसार, संक्रमण मुख्य रूप से चूहे के मूत्र, मल या लार के संपर्क से होता है।

फैलने के तीन मुख्य तरीके..

  • चूहे का काटना (दुर्लभ)।
  • वायरस युक्त सतह को छूने के बाद नाक-मुंह छूना।
  • दूषित भोजन या पानी का सेवन।

यह वायरस हवा से नहीं फैलता, जो कोविड से अलग है। लेकिन इसका कोई स्पेसिफिक इलाज या वैक्सीन नहीं है। लक्षणों के आधार पर सपोर्टिव केयर दी जाती है – ऑक्सीजन, वेंटिलेटर आदि। गंभीर मामलों में 38% तक मौत का खतरा है। कुछ स्ट्रेन में डेथ रेट 40-54% तक पहुंच जाता है। बीमारी 7-10 दिनों में जान ले सकती है।

संक्रमण का स्रोत..
अभी अनसुलझा रहस्य, सबसे बड़ा सवाल- वायरस आया कहां से? जहाज अर्जेंटीना से चला, जहां हंतावायरस के मामले दर्ज नहीं हैं। न ही यात्रा के दौरान ऐसे क्षेत्र आए जहां यह वायरस आम हो। एक्सपर्ट्स का मानना है कि संक्रमण जहाज के अंदर ही हुआ होगा – शायद कहीं छिपे चूहों से। जहाज पर चूहों की मौजूदगी की जांच हो रही है। WHO और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी एपिडेमियोलॉजिकल जांच, लैब टेस्टिंग कर रहे हैं।

हंतावायरस का इतिहास..

  • 1993: अमेरिका में पहली बड़ी महामारी। एक कपल की मौत के बाद सैकड़ों मामले आए।
  • अमेरिका में 1993-2023 तक सिर्फ 890 मामले दर्ज, ज्यादातर न्यू मेक्सिको में।
  • 2025: अमेरिकी अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा की मौत हंतावायरस से हुई। उनके घर के आसपास चूहों के निशान मिले थे।

क्रूज शिप पर वायरस का खतरा: क्यों बढ़ गई चिंता..
क्रूज शिप बंद जगह होती हैं। साझा भोजन, केबिन, डेक – हर जगह संक्रमण फैलने का खतरा। हालांकि हंतावायरस व्यक्ति-से-व्यक्ति नहीं फैलता, लेकिन अगर जहाज पर चूहे हैं तो स्थिति गंभीर हो सकती है। ओशनवाइड एक्सपेडिशंस ने बयान जारी कर कहा कि वे “गंभीर मेडिकल स्थिति” से निपट रहे हैं। कंपनी यात्री परिवारों के संपर्क में है। केप वर्डे सरकार और दक्षिण अफ्रीका स्वास्थ्य विभाग सहायता दे रहे हैं। ब्रिटेन का विदेश मंत्रालय भी ब्रिटिश यात्रियों पर नजर रखे हुए है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट..
वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्दी डिटेक्शन और सपोर्टिव केयर से कई जानें बचाई जा सकती हैं। बुजुर्ग और पहले से बीमार लोगों में जोखिम ज्यादा है। यह घटना क्रूज इंडस्ट्री के लिए नई चुनौती है। पहले कोविड महामारी में क्रूज शिप्स हॉटस्पॉट बने थे। अब यह दुर्लभ लेकिन घातक वायरस सामने आया है।


आगे क्या..
सभी यात्रियों और क्रू की स्क्रीनिंग।
जहाज की पूरी सैनिटाइजेशन।
चूहों और कीटों का सर्वे।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से वायरस स्ट्रेन की पहचान।

यात्री अभी जहाज पर ही हैं। उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति चिंता का विषय है। कई यात्री इस रोमांचक यात्रा को यादगार बनाने निकले थे, लेकिन अब यह जीवन-मृत्यु का संघर्ष बन गया है।