अमेरिका ने जब्त ईरानी जहाज पाकिस्तान को सौंपा, होर्मुज में US नेवी का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने जब्त किए गए ईरानी जहाज को पाकिस्तान के हवाले कर दिया है। यह जहाज चीन से लौटते समय पकड़ा गया था, जिस पर हथियारों से जुड़ा सामान होने का दावा किया गया था। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने का ऐलान किया है।
मध्य पूर्व के तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिकी सेना ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जब्त किए गए ईरानी जहाज टूस्का को पाकिस्तान को सौंप दिया है। इस जहाज को उसके क्रू सदस्यों के साथ जल्द ही ईरान वापस भेजा जाएगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की है। यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रोजेक्ट फ्रीडम नामक नया अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
जहाज जब्ती और रिहाई का पूरा मामला..
अमेरिका ने 21 अप्रैल को चीन से लौट रहे ईरानी कंटेनर जहाज टूस्का को जब्त कर लिया था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा था कि जहाज पर हथियार निर्माण से संबंधित सामग्री ले जाई जा रही थी। ईरान ने इस कार्रवाई की तीखी निंदा करते हुए इसे “समुद्री डकैती” करार दिया था। अब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि अमेरिका ने जहाज के 22 ईरानी क्रू सदस्यों को पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया है। इन सभी को आज ईरान के हवाले कर दिया जाएगा। जहाज की जरूरी मरम्मत के बाद उसे पाकिस्तानी जलक्षेत्र में लाया जाएगा और फिर उसके असली मालिकों को लौटा दिया जाएगा। इस रिहाई को कूटनीतिक राहत के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर जब पाकिस्तान ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है।

ट्रंप का बड़ा ऐलान:
हॉर्मुज में फंसे जहाजों का रेस्क्यू, राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर घोषणा की कि कई देशों ने अमेरिका से मदद मांगी है क्योंकि उनके जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट में फंस गए हैं। ट्रंप ने इन जहाजों और क्रू सदस्यों को “निर्दोष” बताया और कहा कि वे हालात की वजह से मुश्किल में हैं। प्रोजेक्ट फ्रीडम सोमवार सुबह से शुरू होगा। अमेरिकी नौसेना इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता प्रदान करेगी ताकि वे बिना किसी खतरे के अपना काम जारी रख सकें। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान ने इस ऑपरेशन में कोई रुकावट डाली तो अमेरिका सख्त जवाब देगा।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया..
ईरान ने इस पूरे संकट को “गैरकानूनी” बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि अमेरिका-इजराइल का यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका बातचीत में लगातार अत्यधिक मांगें करता रहा है।
ईरान खुद को हॉर्मुज स्ट्रेट का संरक्षक मानता है। IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स) ने हाल ही में हॉर्मुज का नया नक्शा जारी किया है, जिसमें केश्म द्वीप से लेकर UAE के विभिन्न अमीरातों तक अपना नियंत्रण बताया गया है। IRGC के पूर्व कमांडर मोहसिन रजाई ने तो अमेरिका को खुली चेतावनी दी है कि हॉर्मुज को “अमेरिकी सेना की कब्रगाह” बना दिया जाएगा।

क्षेत्रीय तनाव और आरोप-प्रत्यारोप..
ईरान ने UAE पर भी विरोधियों का साथ देने का आरोप लगाया है। बघई ने कहा कि पिछले 50 दिनों में UAE का बर्ताव आक्रामक रहा है। वहीं, हॉर्मुज स्ट्रेट में एक बड़े कार्गो जहाज पर छोटी नावों से हमला भी हुआ है, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के बंदरगाहों पर घेराबंदी के दौरान अब तक 49 व्यापारिक जहाजों का रास्ता बदल दिया गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान की ओर से 14-पॉइंट का शांति प्रस्ताव अमेरिका को मिला है, जिसकी समीक्षा ट्रंप प्रशासन कर रहा है। 13 अप्रैल को पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता बिना नतीजे के खत्म हो गई थी।

ईरान में इंटरनेट संकट और आर्थिक असर..
ईरान में लगभग 65 दिनों से इंटरनेट सेवाएं ठीक से काम नहीं कर रही हैं। इससे सूचना का आदान-प्रदान बेहद मुश्किल हो गया है। इंटरनेट महंगा पड़ने के कारण कई लोग काम बचाने के लिए आर्मेनिया और तुर्किये जैसे देशों में जा रहे हैं। दुनिया भर में तेल आपूर्ति प्रभावित होने से अमेरिका में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 4.45 डॉलर प्रति गैलन (लगभग 370 रुपये) हो गई है। 28 फरवरी के बाद से यह 1.47 डॉलर (122 रुपये) तक बढ़ चुकी है।

ट्रंप की चीन यात्रा..
कूटनीति का नया अध्याय, इस पूरे संकट के बीच राष्ट्रपति ट्रंप 14-15 मई को चीन जाएंगे। शी जिनपिंग के साथ बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। अप्रैल में तय यह मुलाकात जंग की वजह से टल गई थी। चीन हॉर्मुज मार्ग पर निर्भर है क्योंकि वहां से उसकी एक तिहाई तेल-गैस जरूरत पूरी होती है। चीनी सूत्रों के मुताबिक, ईरान संकट ने चीन की बातचीत की स्थिति को कुछ मजबूत किया है, लेकिन बीजिंग पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। सफल बैठक भविष्य में दोनों महाशक्तियों के संबंधों की दिशा तय करेगी।

पृष्ठभूमि और संभावित परिणाम..
4 मार्च को ईरान ने हॉर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण की घोषणा की और दुश्मनों के लिए रास्ता बंद करने का ऐलान किया। 8 अप्रैल को सीजफायर पर सहमति बनी, लेकिन ईरान ने स्ट्रेट बंद रखा। विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचा रहा है। यूरोपीय देशों सहित कई राष्ट्रों ने माना है कि इस जंग से पूरी दुनिया को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। ट्रंप प्रशासन का रुख सख्त है, जबकि ईरान क्षेत्रीय संप्रभुता और प्रतिरोध की भाषा बोल रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता और चीन की भूमिका इस संकट को हल करने में निर्णायक साबित हो सकती है। अभी स्थिति बेहद नाजुक है। प्रोजेक्ट फ्रीडम के शुरू होते ही हॉर्मुज में नई घटनाएं सामने आ सकती हैं। दुनिया की नजरें अब ट्रंप-जिनपिंग बैठक और हॉर्मुज में होने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं।

