बेला अल्ट्राटेक प्लांट की ब्लास्टिंग ने ली महिला की जान, अवैध उत्खनन और 'खाकी' पर सवाल

रीवा के बेला में अल्ट्राटेक प्लांट के पास ब्लास्टिंग की चपेट में आने से सुमित्रा केवट नाम की महिला की जान चली गई। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस पर मामले को दबाने और परिजनों पर दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे इलाके में भारी तनाव और आक्रोश है।

बेला अल्ट्राटेक प्लांट की ब्लास्टिंग ने ली महिला की जान, अवैध उत्खनन और 'खाकी' पर सवाल

जिले के बेला क्षेत्र में स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के पास एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। खबर है कि बैजनाथ क्षेत्र की रहने वाली सुमित्रा केवट नाम की महिला, जो शौच के लिए गई थी, उसकी ब्लास्टिंग की चपेट में आने से मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया है और अब कंपनी से लेकर प्रशासन तक सब कटघरे में हैं।

मौत का खेल और सुरक्षा की अनदेखी

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्लांट के पास की खदानों में सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर ब्लास्टिंग की जा रही है। सड़क से सटी इन खदानों में कब धमाका हो जाए, इसका कोई ठिकाना नहीं रहता। सुमित्रा के परिवार का कहना है कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि अल्ट्राटेक प्रबंधन की लापरवाही की वजह से हुई हत्या है।

अवैध उत्खनन और 'खाकी' पर सवाल

इलाके में चर्चा है कि नौबस्ता क्षेत्र में भू-माफियाओं का राज चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है:

  • अवैध माइनिंग: बेला प्लांट के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध खुदाई हो रही है।

  • पुलिस का संरक्षण: आरोप है कि नौबस्ता चौकी पुलिस इन माफियाओं को संरक्षण देती है, जिसके बदले मोटी रकम का खेल चलता है।

  • जबरन बयान: मृतका के पति रामनरेश केवट ने आरोप लगाया है कि पुलिस उन्हें जबरन चौकी ले गई और अपनी मर्जी से कागजों पर दस्तखत करवाए।

पुरानी रंजिश और कानून व्यवस्था

यह पहली बार नहीं है जब नौबस्ता चौकी विवादों में है। हाल ही में एक समाजसेवी की हत्या के बाद से ही पुलिस की छवि खराब थी, और अब इस मामले में शव को जल्दबाजी में अस्पताल भिजवाने की प्रक्रिया ने शक को और गहरा कर दिया है।

क्या हैं जनता की मांगें?

गुस्साए ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे चुप नहीं बैठेंगे। उनकी मुख्य मांगें हैं:

  1. ब्लास्टिंग और अवैध माइनिंग की हाई-लेवल जांच हो।

  2. पीड़ित परिवार को तुरंत उचित मुआवजा मिले।

  3. दोषी अधिकारियों और माफियाओं पर FIR दर्ज हो।

  4. पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।