मऊगंज में दम तोड़ रही 'आत्मा': करोड़ों खर्च, फिर भी किसान बेहाल, जिम्मेदार मौन

प्रगतिशील किसान सिर्फ कागजों में, भ्रमण के नाम पर बिलों का खेल,वर्षों बाद भी किसानों को नहीं मिला फायदा

मऊगंज में दम तोड़ रही 'आत्मा': करोड़ों खर्च, फिर भी किसान बेहाल, जिम्मेदार मौन

राजेंद्र पयासी @ मऊगंज

शासन की सबसे महत्वाकांक्षी किसान हितैषी योजना सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन 'आत्मा' (Agricultural Technology Management Agency) मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। केंद्र एवं राज्य सरकार की मंशा किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आय में वृद्धि करना है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी योजना का लाभ अंतिम पंक्ति के किसान तक नहीं पहुंच पा रहा है।

योजना के प्रावधानों के अनुसार जिले के प्रत्येक विकासखंड में कृषि परिसर में आत्मा योजना का कार्यालय संचालित होना चाहिए, जहां कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों द्वारा किसानों को उन्नत बीज, जल एवं मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक व कीटनाशी प्रयोग, समेकित खेती प्रणाली, जैविक खेती, संरक्षित खेती, उद्यानिकी, डेयरी एवं पशुपालन की नवीनतम तकनीकों की जानकारी दी जानी थी। परंतु जमीनी हकीकत इसके ठीक विपरीत है।

सूचियों तक सीमित प्रगतिशील किसान

विभागीय रिकॉर्ड खंगालने पर पंचायत स्तर पर प्रगतिशील किसानों की लंबी-चौड़ी सूचियां जरूर मिल जाती हैं। लेकिन यदि इन सूचियों का गांव-गांव जाकर भौतिक सत्यापन किया जाए तो अधिकांश नाम केवल कागजी खानापूर्ति साबित होते हैं। संबंधित किसान को स्वयं पता नहीं होता कि वह प्रगतिशील किसान की श्रेणी में है। इस कारण प्रशिक्षण और अनुदान का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसान से कोसों दूर है।

भ्रमण और प्रशिक्षण के नाम पर घोटाला 

योजना में प्रगतिशील कृषकों के दल को राज्य एवं अंतरराज्यीय भ्रमण कराकर उन्नत कृषि अनुसंधान केंद्रों का अवलोकन कराने का महत्वपूर्ण घटक है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इसी मद में सबसे बड़ा खेल हुआ है। फाइलों में भ्रमण, भोजन, आवास और वाहन के लाखों के बिल लगे हैं, किंतु कितने किसान वास्तव में भ्रमण पर गए, यह जांच का विषय है। यदि जिला प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है।

आत्मा योजना का संचालन मऊगंज की बजाय रीवा से

सबसे गंभीर पहलू यह है कि मऊगंज जिले के लिए स्वीकृत आत्मा योजना का संचालन मऊगंज से नहीं बल्कि रीवा से हो रहा है। आरोप है कि विभाग में पदस्थ कई जिम्मेदार कर्मचारी आज भी मुख्यालय में निवास नहीं करते। विकासखंड स्तर के कार्यालयों में नियमित उपस्थिति नहीं होने से कार्यालयों में अक्सर ताले लटके देखे जा सकते हैं। 

किसानों और अधिकारियों के बीच संवादहीनता के चलते शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष हरिशंकर पांडेय एवं राम सिपाही पटेल ने कलेक्टर मऊगंज का ध्यान आकृष्ट कराते कहा कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए आत्मा योजना के पिछले पांच वर्षों के व्यय, भ्रमण बिलों और प्रगतिशील किसान सूचियों का भौतिक सत्यापन कराया जाय तथा लापरवाह अधिकारियों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाय, ताकि 'आत्मा' योजना वास्तव में किसानों की आत्मा बन सके।

इन्होंने कहा 

जिले में कर्मचारियों की कमी है मऊगंज जिले के तीनों विकास खण्ड में एक-एक कर्मचारी पदस्थ हैं, कर्मचारियों के नियमित न रहने एवं किसानों को योजना संबंधी जानकारी न मिलने की शिकायत मिली है। कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएंगे की योजना अनुसार किसानों को कृषि संबंधी जानकारी प्रदान की जाए और योजनाओं का समय-समय पर लाभ प्रदान किया जाए।

यूपी बागरी, डिप्टी डायरेक्टर , एग्रीकल्चर