IDBI Bank FD Fraud: कोर्ट के आदेश पर जमा रकम गायब, बिना बताए एफडी तोड़ने के आरोप
सतना। शहर के राजेंद्र नगर स्थित IDBI बैंक की शाखा में ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बिना जानकारी रकम निकालने के दो मामले सामने आए हैं। दोनों मामले सड़क और रेल दुर्घटनाओं में मिले मुआवजे की राशि से जुड़े हैं। आरोप है कि कोर्ट के आदेश पर सुरक्षित रखी गई एफडी समय से पहले तोड़ दी गई और रकम का हिसाब नहीं मिल रहा है।
पीड़ित परिवारों की शिकायत पर कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने जांच की जिम्मेदारी लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (LDM) गौतम शर्मा को सौंपी है। वहीं, शुक्रवार को सीएसपी मनीष त्रिपाठी ने दोनों शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए। शिकायतों के सामने आने के बाद बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
पहला मामला: रेल हादसे में मिले मुआवजे की FD पर विवाद
उचेहरा तहसील के जिगनहट निवासी ममता और लल्लूलाल चौधरी के बेटे नीरज की रेल दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद रेल दावा अधिकरण ने परिवार को 11.88 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। मुआवजे में ममता और लल्लूलाल के हिस्से में 5.94-5.94 लाख रुपये आए थे। नियमानुसार राशि का एक हिस्सा IDBI बैंक में एफडी के रूप में जमा कराया गया था।
लल्लूलाल चौधरी का आरोप है कि पत्नी ममता की करीब 3.90 लाख रुपये की एफडी के दस्तावेज दिखाने के बावजूद बैंक ने पहले उसे फर्जी बताया। बाद में उन्हें जानकारी दी गई कि खाता बंद हो चुका है और रकम निकाली जा चुकी है।
परिवार का आरोप है कि एफडी समय से पहले तोड़कर रकम खुर्दबुर्द कर दी गई। अब वे अपनी राशि का हिसाब और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
दूसरा मामला: 2033 में मैच्योर होनी थी FD
दूसरा मामला नागौद तहसील के महकोना निवासी खुशीराम बागरी का है। उनके बेटे देव का दुर्घटना में बायां पैर कट गया था। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर 10.17 लाख रुपये की एफडी कराई गई थी, जिसकी परिपक्वता अवधि वर्ष 2033 थी।
खुशीराम के मुताबिक, एक साल तक ब्याज नहीं मिलने पर वे बैंक पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि मूल खाता मौजूद नहीं है। आरोप है कि बाद में नई एफडी खोली गई, लेकिन उसमें ब्याज दर कम कर दी गई। खुशीराम का दावा है कि नई एफडी में भी करीब 60 से 70 हजार रुपये का अंतर है। इस मामले में भी परिवार बैंक से पूरी राशि और ब्याज का हिसाब मांग रहा है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
सूत्रों के मुताबिक, इस शाखा में एफडी से जुड़ी गड़बड़ी का मामला पहले भी सामने आया था। उस समय तत्कालीन सीएसपी देवेंद्र सिंह ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की थी। हालांकि, बैंक प्रबंधन और ग्राहक के बीच समझौता होने के बाद जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
बताया गया था कि बैंक ने मामला लिपिकीय त्रुटि बताते हुए नई एफडी बनवाई थी। अब दो नए मामलों के सामने आने के बाद बैंक की कार्यप्रणाली और एफडी खातों के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बैंक मैनेजर और स्टाफ बदले जाने की चर्चा
मामला सामने आने के बाद शाखा प्रबंधक कपिल अहिरवार समेत पूरे स्टाफ को बदले जाने की जानकारी भी सामने आई है। शनिवार को जबलपुर से महाप्रबंधक (GM) समेत कई अधिकारियों के शाखा पहुंचने की चर्चा है। हालांकि, इन दोनों बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस और बैंक स्तर पर जांच
सीएसपी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि मामले में शिकायत मिली है और शुक्रवार को दोनों पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए हैं। बयानों के आधार पर आगे जांच की जाएगी।
वहीं, एलडीएम गौतम शर्मा बैंक प्रबंधन के प्रतिवेदन का इंतजार कर रहे हैं। पीड़ित परिवारों की मांग है कि उनकी पूरी रकम वापस दिलाई जाए और यदि जांच में गड़बड़ी या जिम्मेदारों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

