BMHRC में अनियमितताओं के आरोप: कांग्रेस ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
भोपाल मेमोरियल अस्पताल में भर्ती से लेकर मशीनों के इस्तेमाल तक पर सवाल, गैस पीड़ितों के इलाज को लेकर भी उठाई आवाज
भोपाल। भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) की व्यवस्थाओं को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने अस्पताल में मरीजों के इलाज, आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, कर्मचारियों के भुगतान और महंगी चिकित्सा मशीनों के इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि अस्पताल में कई स्तरों पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के महासचिव अमित शर्मा ने पत्रकार वार्ता में इन मुद्दों को उठाया। इस दौरान मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, पूर्व प्रवक्ता अभिनव बरोलिया और राहुल राज भी मौजूद रहे। कांग्रेस ने मांग की कि अस्पताल प्रशासन, आउटसोर्स एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाए। यदि किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
डॉक्टर पर आरोपों की जांच की मांग
कांग्रेस की ओर से रखी गई शिकायत में डॉ. अमन चतुर्वेदी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके खिलाफ शिकायतें मिलने के बाद उन्हें अस्पताल से हटाया गया। साथ ही, उन पर शराब और नशीले पदार्थों के सेवन की स्थिति में मरीजों का ऑपरेशन करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
कांग्रेस ने इन आरोपों की स्वतंत्र मेडिकल और प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी स्तर पर मरीजों की सुरक्षा से समझौता किया गया।
आउटसोर्स भर्ती में पैसे लेने का आरोप
अस्पताल में आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भर्ती के नाम पर उम्मीदवारों से 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की रकम मांगी या ली जाती है।

इस मामले में एजेंसी से जुड़े सुपरवाइजर बसंत अवस्थी और सैयद असरफ अली की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया, एजेंसियों के अनुबंध, उम्मीदवारों के चयन और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाए। इससे यह पता चल सकेगा कि भर्ती में नियमों का पालन हुआ या किसी तरह की गड़बड़ी की गई।
पुराने कर्मचारियों को हटाने और भुगतान का मुद्दा
शिकायत में दावा किया गया है कि कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों से छह से आठ महीने या करीब एक साल तक काम कराने के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया जाता है या दूसरी जगह भेज दिया जाता है। वहीं, अस्पताल में 18 से 20 साल तक काम कर चुके कर्मचारियों को हटाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
कर्मचारियों के टीए-डीए, बोनस, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे लाभों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन भुगतानों की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। कांग्रेस ने संबंधित एजेंसियों और अस्पताल प्रशासन के रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच तथा ऑडिट कराने की मांग की है, ताकि कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ और बकाया राशि की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
MRI-CT स्कैन मशीनों के इस्तेमाल पर सवाल
अस्पताल में करोड़ों रुपये की MRI और CT स्कैन मशीनों के इस्तेमाल को लेकर भी शिकायत की गई है। आरोप है कि इन मशीनों का पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है और कुछ मरीजों को जांच के लिए दूसरे केंद्रों पर भेजा जाता है।

कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि अस्पताल में जरूरी जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो मरीजों को बाहर क्यों जाना पड़ता है। पार्टी ने मशीनों के संचालन, तकनीकी स्थिति, जांच की उपलब्धता और मरीजों को बाहर भेजने के रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। साथ ही, यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि रेफरल के पीछे किसी तरह का आर्थिक हित तो नहीं है।
गैस पीड़ितों के इलाज को लेकर भी चिंता
भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित लोगों के इलाज के लिए स्थापित इस अस्पताल में गैस पीड़ितों को प्राथमिकता नहीं मिलने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ मामलों में आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को प्राथमिकता मिलती है, जबकि गैस पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है।
कांग्रेस ने कहा कि गैस पीड़ितों के उपचार से जुड़ी शिकायतों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने, इलाज देने और प्राथमिकता तय करने के नियमों की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि किसी भी मरीज को उसके अधिकारों से वंचित न रहना पड़े।
अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग
कांग्रेस ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में मैडम श्रीवास्तव और देवेन्द्र सिंह का नाम लेते हुए उनकी भूमिका की जांच की मांग की गई है। पार्टी का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता होनी चाहिए और मरीजों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

कांग्रेस ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया, आउटसोर्स एजेंसियों के अनुबंध, कर्मचारियों के भुगतान, MRI और CT स्कैन मशीनों के इस्तेमाल, मरीजों के रेफरल और गैस पीड़ितों के उपचार की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में संबंधित दस्तावेजों, भुगतान विवरण और मरीजों की शिकायतों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
पार्टी का कहना है कि यदि जांच में भ्रष्टाचार, लापरवाही या वित्तीय अनियमितता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, लगाए गए आरोपों पर संबंधित अस्पताल प्रशासन और नामित व्यक्तियों का पक्ष सामने आना तथा जांच के निष्कर्ष आना बाकी है।
Varsha Shrivastava 
