Dussehra 2026: Dehradun में देश का सबसे ऊंचा 181 फीट का रावण जलेगा, Indore में होगा 111 फीट के रावण का दहन

दशहरे पर Delhi में रावण के साथ कॉकरोच का पुतला भी जलेगा,MP में ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाएगी कांग्रेस, Bhopal में 105 फीट का रावण जलेगा, Ujjain में महाकाल की सवारी पर ड्रोन से बरसेंगे 5 क्विंटल फूल

Dussehra 2026: Dehradun में देश का सबसे ऊंचा 181 फीट का रावण जलेगा, Indore में होगा 111 फीट के रावण का दहन

देशभर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। इस मौके पर कई शहरों में रावण दहन, रामलीला, आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। Uttrakhand के Dehradun में 181 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होगा, जो देश में सबसे ऊंचा बताया गया है। इधर मध्य प्रदेश में Indore में 111 फीट, Bhopal में 105 फीट और Ujjain में 101 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा।

वहीं Rajasthan के Kota में 105 फीट और Chhattisgarh की राजधानी Raipur में 101 फीट ऊंचे रावण का पुतला जलाया जाएगा। Delhi के Pitampura में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में कांग्रेस मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाने की तैयारी में है।

MP में कहां कितना ऊंचा होगा रावण दहन?

मध्य प्रदेश में दशहरा उत्सव को लेकर अलग-अलग शहरों में तैयारियां की गई हैं। Indore में 111 फीट ऊंचे रावण के दहन का कार्यक्रम रखा गया है। यहां लंका का विशेष सेटअप और आतिशबाजी भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। Bhopal के Kolar में 105 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। यहां रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार करने में करीब 20 लाख रुपए खर्च किए गए हैं।

Ujjain में 101 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। यहां बाबा Mahakal की दशहरा सवारी चांदी की पालकी में दशहरा मैदान पहुंचेगी, जहां शमी वृक्ष का पूजन किया जाएगा। सवारी मार्ग पर करीब एक लाख वर्गफीट में रंगोली बनाई जाएगी। आयोजन के दौरान ड्रोन से पालकी पर करीब 500 किलो फूल बरसाने की तैयारी है। आतिशबाजी का कार्यक्रम भी होगा।

Mandsaur में 80 फीट ऊंचा रावण बनाया गया है, जिसकी आंखें झपकेंगी, गर्दन घूमेगी और तलवार वाला हाथ भी चलेगा। Jabalpur में 75 फीट और Gwalior में 65 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा। Gwalior में राम जुलूस और आतिशबाजी भी होगी। बारिश की आशंका को देखते हुए कुछ शहरों में पुतलों को सुरक्षित रखने के इंतजाम किए गए हैं।

Kota में 5 हजार किलो का रावण, Raipur में 101 फीट का पुतला

Rajasthan के Kota में दशहरा मेले की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यहां 105 फीट ऊंचे रावण का पुतला बनाया गया है, जिसका वजन करीब 5 हजार किलो बताया गया है। कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले 70-70 फीट ऊंचे हैं। आतिशबाजी पर 4 लाख रुपए से ज्यादा खर्च किए गए हैं। कार्यक्रम के तहत शाम 5:30 बजे Garh Palace से लक्ष्मीनारायण जी की सवारी निकलेगी, जो दशहरा मैदान पहुंचेगी। इसके बाद रावण दहन होगा।

Chhattisgarh के Raipur स्थित WRS मैदान में 101 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। Boriya Khurd में रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी जलाए जाएंगे। पुतले बनाने की लागत में इस साल करीब 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कारीगरों के मुताबिक, बांस, रंगीन कागज, कपड़े और सजावट के सामान की कीमतें बढ़ने से लागत पर असर पड़ा है।

Delhi में रावण के साथ जलेगा 30 फीट का कॉकरोच

Delhi के Pitampura में श्री केशव रामलीला कमेटी ने इस बार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के अलावा 30 फीट ऊंचा कॉकरोच बनाने का फैसला किया है। कमेटी के अध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा के मुताबिक, इसका उद्देश्य घरों और आसपास के इलाकों में गंदगी की समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इस तरह के प्रतीकात्मक पुतलों के जरिए सामाजिक समस्याओं पर संदेश देने की कोशिश की जाती है।

Jharkhand की राजधानी Ranchi के Morabadi मैदान में 80 फीट ऊंचे रावण का दहन होगा। यहां दो मंजिला लंका तैयार की गई है। Argora मैदान में रावण का पुतला 55 फीट और कुंभकर्ण-मेघनाद के पुतले 50-50 फीट ऊंचे होंगे।

MP में कांग्रेस जलाएगी ज्ञानेश कुमार का पुतला

दशहरे के मौके पर मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने का कार्यक्रम तय किया है। यह आयोजन मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर चलाए जा रहे ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान का हिस्सा है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के तय कार्यक्रम के तहत प्रदेश के जिलों में प्रदर्शन और जनसंपर्क किया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता सार्वजनिक सभाओं में मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों के बारे में पर्चे भी बांटेंगे। पार्टी ने अक्टूबर में आंदोलन तेज करने की योजना बनाई है। इस अभियान के तहत ब्लॉक स्तर पर मार्च और पुतला दहन के कार्यक्रम भी निर्धारित किए गए हैं।

200 साल से ज्यादा पुरानी है रावण दहन की परंपरा

दशहरे पर रावण दहन की परंपरा देश के कई हिस्सों में लंबे समय से चली आ रही है। मान्यता है कि 17वीं शताब्दी में तुलसीदास के शिष्य मेघा भगत ने Varanasi में रामलीला की शुरुआत की थी। हालांकि, ऐतिहासिक संदर्भ के तौर पर 1834 में ब्रिटिश कलाकार James Prinsep का एक चित्र भी बताया जाता है। इसमें Ramnagar में बनारस के राजा के सामने रामलीला और रावण दहन का दृश्य दिखाया गया है। यह चित्र London की British Library में मौजूद है।

दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। देशभर में रावण दहन के साथ लोग इस पर्व को मनाएंगे। अलग-अलग शहरों में ऊंचे पुतले, आतिशबाजी, धार्मिक आयोजन और सामाजिक संदेश इस बार के उत्सव का हिस्सा होंगे।