पब्लिक वाणी खास खबर : 20 साल से अटका रखी साढ़े आठ सौ उच्च माध्यमिक शिक्षकों की पदोन्नति
Public Vani Khas Khabar : गलत तरीके से पदोन्नति लेने वाले 88 शिक्षक बन चुके हाईस्कूल प्राचार्य
लोक शिक्षण संचालनालय में धूल खा रही फाइलों की परतें खुलती है, तो बड़े-बड़े कारनामे सामने आ जाते हैं। इनमें कभी आर्थिक, तो कभी शिक्षकों के पूरे जीवनकाल की नौकरी को प्रभावित करने वाले होते हैं। इसी कड़ी में 830 उच्च माध्यमिक शिक्षकों (यूडीटी) की पदोन्नति का मामला भी है। इस श्रेणी के शिक्षक बीस सालों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं, जबकि इसी सूची में गलत तरीके से पदोन्नति लेने वाले 88 शिक्षक आज हाईस्कूल प्राचार्य तक बन चुके हैं।
मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा वर्ष 2013 के पहले तक साल में पदोन्नति के लिए एक बार डीपीसी की जाती थी। इसी के तहत वर्ष 2007 में उच्च माध्यमिक शिक्षक (यूडीटी) से व्याख्याता की डीपीसी के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया। 17 सितंबर 2008 को डीपीसी के लिए सूची जारी कर दी गई। इस सूची में करीब आठ सौ नाम थे। कुछ शिक्षकों ने सूची में अपना नाम नहीं होने को लेकर आपत्ति जताई। इसको लेकर विभाग ने तीन बार 1 अगस्त 2009, 18 जनवरी 2012 तथा 12 दिसंबर 2014 को पुनरीक्षित डीपीसी की थी।
इस सूची में करीब पंद्रह सौ नाम शामिल हो गए। वर्ष 2014 की सूची के आधार पर यूडीटी से व्याख्याता बने शिक्षकों की पदस्थापाना की जाना थी। वर्ष 2015 में सूची के आधार पर पदांकन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें सामने आया कि लिस्ट में पदोन्नति प्रदान करते हुए रोस्टर का पालन नहीं किया गया है। सूची में 84 राजनीति शास्त्र और 4 अर्थशास्त्र विषय में अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लोक सेवकों की गलत ढंग से पदोन्नति प्रदान की गई। यह तथ्य सामने आने के बाद तत्कालीन आयुक्त लोक शिक्षण ने नोटशीट में भी लिखा कि जिन 88 लोगों ने गलत तरीके से पदोन्नति ली है, उन्हें होल्ड कर दिया जाए और शेष की पदांकन सूची जारी कर दी जाए, लेकिन आयुक्त के अधीनस्थ अधिकारियों ने फिर से डीपीसी कर सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
अगले साल यानी वर्ष 2016 में हाईकोर्ट व सरकार के बीच चल रहे पदोन्नति के मामलों में रोक लग गई। इसके बाद विभाग ने भी यूटीडी से व्याख्याता के पद पर शिक्षकों का पदांकन नहीं किया। यह मामला चल रहा था कि हाईकोर्ट ने लोक शिक्षण में पदस्थ रहे एक अधिकारी के मामले में रिव्यू डीपीसी के आर्डर कर दिए। उन्हें पदोन्नति भी दे दी गई, लेकिन इसी समान के प्रकरण यूडीटी से व्याख्याता के मामले में पदोन्नति नहीं दी गई। ऐसे शिक्षक आज भी पदोन्नति से वंचित हैं।
गलत रोस्टर वाले बन गए हाईस्कूल प्राचार्य
यूडीटी से व्याख्याता वाली सूची में 84 राजनीति शास्त्र तथा 4 अर्थशास्त्र विषय में अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लोक सेवकों की गलत ढंग से पदोन्नति प्रदान की गई थी। तत्कालीन आयुक्त लोक शिक्षण ने नोटशीट में भी लिखा कि जिन 88 लोगों ने गलत तरीके से पदोन्नति ली है, उन्हें होल्ड कर दिया जाए। इसके बावजूद उनका पदांकन कर दिया गया। ऐसे शिक्षक आज हाईस्कूल प्राचार्य तक बन गए हैं, जबकि उन्हीं के साथ वाले आज भी यूडीटी के पद पर पदस्थ हैं। पदोन्नति हो जाती तो नहीं देना होती टीईटी मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों पर वर्तमान में टीईटी की तलवार लटकी हुई है। गलत पदोन्नति लेने वाले शिक्षक वर्तमान में हाईस्कूल प्राचार्य तक हो गए हैं। उन्हें अब टीईटी नहीं देनी पड़ेगी, जबकि जिन शिक्षकों की बीस साल से पदोन्नति होल्ड है, वे सब टीईटी के दायरे में आ गए हैं।
2015 की तिथि से DPC कराने की मांग फिर उठी
राज्य कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष शिववीर सिंह भदौरिया का कहना है कि पदोन्नति शासकीय सेवक के सेवाकाल के अच्छे पारिश्रमिक का प्रतिफल होता है। इसी कारण पांच वर्ष की सीआर की बाध्यता है। जब मेहनत का प्रतिफल नहीं मिलता, तो मानसिक वेदना का प्रभाव उसकी कार्यशैली एवं स्थिति को भी प्रभावित करती है। शिक्षकों की व्याख्याता पद पर पदोन्नति की कार्यवाही में उदासीनता एवं लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए। साथ में 3 अक्टूबर 2015 को पदोन्नति के लिए आयोजित डीपीसी की निरस्त उक्त कार्यवाही के क्रम में पुनरीक्षित डीपीसी करते हुये पात्रता प्राप्त शिक्षकों को उसी दिनांक से व्याख्याता पद पर पदोन्नति प्रदान की जाए। इसे लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय अभिषेक सिंह को ज्ञापन प्रेषित कर सहानुभूति पूर्वक निर्णय लेना का आग्रह किया गया है।

