पब्लिक वाणी खास खबर : 105 करोड़ का क्रय आदेश, सिर्फ 60 करोड़ की आपूर्ति हुई
Public Vani Khas Khabar : आयुष विभाग के प्रमुख सचिव ने पीएस वन से हस्तक्षेप का किया आग्रह, कहा-एमएफपी पार्क से दवाइयां उपलब्ध कराएं
आयुष विभाग के एक पत्र ने मध्यप्रदेश में आयुर्वेदिक औषधियों की आपूर्ति की सरकारी व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है। ऐसा इसलिए कि आयुष विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2026-27 के लिए तकरीबन 105 करोड़ रुपए की दवाइयों की खरीदी के लिए क्रय आदेश मध्यप्रदेश लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र (एमएफपी-पार्क) बरखेड़ा पठानी भोपाल को दिया था, लेकिन पार्क प्रबंधन अब तक सिर्फ 60 करोड़ रुपए की दवाइयों की आपूर्ति कर पाया है। तकरीबन 45 करोड़ रुपए की औषधियों की सप्लाई अभी होना है।
आयुष विभाग ने आगाह किया कि इस देरी से आयुष चिकित्सालयों और संस्थानों में जरूरी दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर मरीजों की सेहत पर पड़ रहा है। यह पत्र आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभितः जैन ने वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह को लिखा है। इस पत्र के जरिए जैन ने सिंह से शेष औषधियों की आपूर्ति निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित कराने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
अब सवाल यह उठता है कि जब 105 करोड़ रुपये के क्रय आदेश जारी हो चुके हैं, तो उनके मुकाबले 60 करोड़ रुपये की ही दवाएं क्यों पहुंचीं और 45 करोड़ रुपये की आपूर्ति अब तक लंबित क्यों है? लघु वनोपज संघ के सामने चुनौती केवल लंबित आपूर्ति की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि सरकारी खरीद का लाभ समय पर मरीजों को क्यों नहीं मिल रहा है। इसकी जवाबदेही किसकी है और लघु वनोपज संघ ने जिम्मेदारों के खिलाफ अब तक कोई एक्शन क्यों नहीं लिया।
आयुष विभाग के पत्र के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 26.29 करोड़ रुपये, 2025-26 में 55.26 करोड़ रुपये और 2026-27 में 23.78 करोड़ रुपये के क्रय आदेश जारी किए गए थे। इस तरह कुल राशि लगभग 105.33 करोड़ रुपये होती है, जिसे पत्र में लगभग 105 करोड़ रुपये बताया गया है। इसके मुकाबले मध्यप्रदेश लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र (एमएफपी-पार्क) बरखेड़ा पठानी भोपाल ने करीब 60 करोड़ रुपए की औषधियों का प्रदाय किया है।
शेष लगभग 45 करोड़ रुपये की आपूर्ति लंबित बताई गई है। हालांकि पत्र में वर्ष वार क्रय आदेश और आपूर्ति का विवरण संलग्न होने की बात कही गई है। इससे स्पष्ट होना बाकी है कि किस वित्तीय वर्ष के कितने ऑर्डर की आपूर्ति लंबित है।
इनका कहना है...
हां, पत्र मिला है। जितनी हमारी क्षमता है. उसे हिसाब से बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
- राघवेंद्र कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वन विभाग मध्यप्रदेश
दवाओं की कमी से मरीजों पर असर बजट लैप्स होने का भी खतरा
प्रमुख सचिव जैन ने चिंता जताई है कि समय पर औषधियां नहीं मिलने से आयुष चिकित्सालयों और संस्थाओं में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर आम मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। मामला केवल दवाओं की आपूर्ति तक सीमित नहीं है।
आयुष विभाग को राज्य बजट और राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्राप्त राशि का निर्धारित समय में उपयोग करना होता है। भारत सरकार को उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) भी समय पर भेजना अनिवार्य है। आपूर्ति में देरी से आवंटित राशि के उपयोग में बाधा आ रही है और बजट की राशि अप्रयुक्त रहने या लैप्स होने की आशंका बन रही है।
MFP केंद्र बरखेड़ा पठानी की CEO की भूमिका जांच के दायरे में
एमएफपी केंद्र बरखेडा पठानी की सीईओ गीतांजलि जे. की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सीईओ की यह व्यक्तिगत लापरवाही भले नहीं हो, लेकिन यह सवाल तो है कि उत्पादन, आपूर्ति और लक्ष्य की मॉनिटरिंग व्यवस्था लचर क्यों है और लंबित दवाइयों की आपूर्ति की क्यों नहीं हुई।
आयुष विभाग ने वन विभाग से शेष औषधियों की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर समय-सीमा में पूरी कराने के निर्देश देने का आग्रह पीएस से किया है। बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के क्रय आदेशों बावजूद आपूर्ति व्यवस्था निर्धारित गति से क्यों नहीं हुई। क्या उत्पादन क्षमता, कच्चे माल, गुणवता परीक्षण या वितरण व्यवस्था में कोई बाधा है।

