Public Vani Exclusive : प्रदेश के 4 लाख शिक्षकों-कर्मचारियों को त्वरित न्याय दिलाने बनेगा ट्रिब्यूनल
Public Vani Exclusive : स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दी सहमति
प्रदेश के शिक्षकों व कर्मचारियों को त्वारित न्याय दिलाने के लिए ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी सहमति दे दी है। जल्द ही मामला कैबिनेट में लाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल मध्य प्रदेश के सभी विभागों में सबसे ज्यादा कर्मचारियों की संख्या स्कूल शिक्षा विभाग में है। विभाग में करीब चार लाख शिक्षक व कर्मचारी कार्यरत हैं। इसी विभाग के सबसे ज्यादा न्यायालीयन मामले भी हैं। इसी कारण विभाग के अफसरों का समय भी ज्यादा लगता है। शिक्षक व कर्मचारी भी लंबे समय तक न्यायालय में उलझे रहते हैं। इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर शिक्षकों व कर्मचारियों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए ट्रिब्यूनल के गठन का प्रस्ताव तैयार किया है। ट्रिब्यूनल के गठन समेत अन्य बिंदुओं को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीते मंगलवार को समीक्षा बैठक भी ली थी।
बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, संचालक राज्य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह समेत विभाग के आला अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सामने शिक्षकों एवं कर्मचारियों के न्यायिक प्रकरणों के शीघ्रता से समाधान के लिए ट्रिब्यूनल का गठन करने का बिंदु रखा। इसमें बताया गया कि ट्रिब्यूनल के गठन से शिक्षकों व कर्मचारियों के सेवा विवादों का त्वरित निराकरण होगा और न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम होगा। मुख्यमंत्री ने ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया जल्द पूर्ण करने के लिए सहमति दे दी है।
कांग्रेस सरकार ने 23 साल पहले बंद किया ट्रिब्यूनल
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा विवादों के निपटारे के लिए 23 साल पहले तक राज्य प्रशासनिक अधिकरण अस्तित्व में था। वर्ष 2001 में राज्य विभाजन के बाद तत्कालीन दिग्विजय सरकार ने राज्य प्रशासनिक अधिकरण को बंद करने का निर्णय लिया था। इसके बाद 17 अप्रैल 2003 में इस बंद कर दिया गया। इसके बंद होने के बाद कर्मचारियों से जुड़े भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से संबंधित विवादों के लिए कोई अलग वैकल्पिक व्यवस्था नहीं रही। अधिकरण बंद होने के बाद कर्मचारी सेवा संबंधी मामलों के लिए सीधे न्यायालयों का रुख करने लगे। इससे न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ बढ़ा और न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। समय-समय पर न्यायालयों की ओर से राज्य सरकार को कर्मचारियों के सेवा विवादों के लिए प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए गए।
भर्ती से लेकर पेंशन तक के विवाद होंगे शामिल
वर्ष 2001 तक अस्तित्व में रहते राज्य प्रशासनिक अधिकरण में सरकारी कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न सेवा मामलों की सुनवाई होती थी। इनमें भर्ती, वेतन निर्धारण, पदोन्नति, पेंशन, सेवा शतों और अन्य विभागीय विवाद प्रमुख रूप से शामिल रहे हैं। वर्तमान में इन मामलों के लिए कर्मचारियों को न्यायालयों की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। नया अधिकरण बनने से ऐसे मामलों के लिए अलग मंच उपलब्ध होने की उम्मीद है।
राज्य प्रशासनिक अधिकरण भी शुरू करने की तैयारी
स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों व कर्मचारियों के त्वरित न्याय के लिए ट्रिब्यूनल का प्रस्ताव तैयार किया है, जबकि सामान्य प्रशासन विभाग ने भी नए अधिकरण का प्रारूप तैयार किया है। इसमें राज्य के सभी सरकारी कर्मचारी शामिल होंगे। इससे सभी सरकारी कर्मचारियों के सेवा विवादों का त्वरित निराकरण होगा और न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम होगा।
विभागीय सूत्रों की मानें तो सामान्य प्रशासन विभाग नए अधिकरण की संरचना और कार्यप्रणाली का खाका लगभग तैयार कर चुका है। प्रारंभिक स्तर पर इसके कार्यालय भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में स्थापित किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यरत कर्मचारियों को अपने सेवा संबंधी मामलों के लिए दूर की यात्रा न करनी पड़े।
ट्रिब्यूनल अलग-अलग होंगे या एक, संशय बरकरार
स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए अलग से ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है, जबकि सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी शासकीय कर्मचारियों के लिए खाका बनाया है। अब यह ट्रिब्यूनल अलग-अलग होंगे या एक ही होगा, इस पर अभी संशय बरकरार है।

