MP Drug Control Campaign : मप्र में नशे के नेटवर्क पर 3 साल में होगा बड़ा प्रहार, कॉलेजों में बनेंगी एंटी ड्रग समितियां

MP Drug Control Campaign : मध्यप्रदेश में नशे के अवैध कारोबार को खत्म करने के लिए तीन साल का अभियान चलेगा। कॉलेजों में एंटी ड्रग समितियां बनेंगी और हेल्पलाइन 1933 का प्रचार होगा।

MP Drug Control Campaign : मप्र में नशे के नेटवर्क पर 3 साल में होगा बड़ा प्रहार, कॉलेजों में बनेंगी एंटी ड्रग समितियां

MP Drug Control Campaign : भोपाल। मध्यप्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए राज्य सरकार तीन साल का विशेष अभियान चलाएगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने मंत्रालय में पांचवीं राज्य स्तरीय NCORD बैठक में संबंधित विभागों को मिलकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। शुरुआती चरण में 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां गठित की जाएंगी। इनमें शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी, पुलिस और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

ड्रग नेटवर्क खत्म करने के लिए बनेगी कार्ययोजना

मुख्य सचिव ने कहा कि मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए सभी विभाग अपने लक्ष्य निर्धारित करें और समयबद्ध कार्ययोजना बनाएं। उन्होंने नार्कोटिक्स विभाग, एसआईबी और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया। सूचना तंत्र मजबूत करने के साथ ही अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

दो साल में 2.74 लाख किलो मादक पदार्थ नष्ट

बैठक में बताया गया कि मादक पदार्थों के विनष्टीकरण में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा है। वर्ष 2025 में 2,073 प्रकरणों में 1,44,025 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। वहीं, वर्ष 2026 में 30 सितंबर तक 2,756 प्रकरणों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थों का विनष्टीकरण हुआ। इस तरह दोनों वर्षों में कुल 2,74,405 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। इसी वर्ष 30 सितंबर तक NDPS के 2,986 मामलों में 4,091 आरोपियों से 50,933 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए।

कॉलेजों और स्कूलों में चलेगा नशामुक्ति अभियान

सरकार ने शासकीय और निजी शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। एंटी ड्रग समितियां विद्यार्थियों और शिक्षकों को जागरूक करेंगी। नशे से जुड़ी सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। समितियों के नोडल अधिकारी स्थानीय थाने के बीट प्रभारी होंगे। मादक पदार्थों की जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।

18 गुप्त प्रयोगशालाओं पर कार्रवाई

बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2025 और 2026 के दौरान मध्यप्रदेश में मादक पदार्थ बनाने वाली 18 गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया गया। इस कार्रवाई में मध्यप्रदेश पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) शामिल रहे। मानस पोर्टल और 1933 हेल्पलाइन के माध्यम से नशे से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है।

446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच

अवैध मादक पदार्थ कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई भी की गई है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025 में NDPS के 54 मामलों में 300 करोड़ रुपये और वर्ष 2026 में 38 मामलों में 146 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई। इस तरह कुल 446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई हुई। सितंबर 2026 तक 201 विशेष मुकदमों की निगरानी की जा रही थी।

नशामुक्ति केंद्रों और दवाओं की निगरानी पर जोर

मुख्य सचिव ने जिन जिलों में नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं, वहां 31 अक्टूबर तक प्रस्ताव लेने के निर्देश दिए। वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं। साथ ही, कोडीन आधारित कफ सिरप की आपूर्ति और वितरण पर निगरानी बढ़ाने तथा रासायनिक कारखानों में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था बनाने को कहा गया।

जागरूकता अभियान में 2.58 करोड़ लोगों की भागीदारी

बैठक में बताया गया कि नशे के खिलाफ जन-जागरूकता के लिए प्रदेश में 30,339 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें लगभग 2.58 करोड़ लोगों ने भाग लिया। ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान को सोशल मीडिया पर 58 करोड़ से अधिक व्यूज मिले। इसके अलावा लगभग 10 हजार युवाओं को विभिन्न खेल गतिविधियों से जोड़ा गया। सरकार का लक्ष्य नशे की रोकथाम, जागरूकता और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को एक साथ आगे बढ़ाना है।