पब्लिक वाणी खास खबर : 11 SFS अफसरों के IFS बनने का रास्ता साफ, 8 के लिफाफे बंद

Public Vani Khas Khabar : डीपीसी में पांच अधिकारी अयोग्य घोषित; विभागीय जांच और पात्रता के फेर में अटकी पदोन्नति की उम्मीदें

पब्लिक वाणी खास खबर : 11 SFS अफसरों के IFS बनने का रास्ता साफ, 8 के लिफाफे बंद

गणेश पाण्डेय @ भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य वन सेवा (एसएफएस) के अधिकारियों की भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में पदोन्नति के लिए हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) में 11 अफसरों के नामों पर हरी झंडी मिल गई है। आठ अधिकारियों के लिफाफे बंद कर दिए गए, जबकि पांच अधिकारियों को अयोग्य घोषित किया गया। इस फैसले ने आईएफएस बनने की दौड़ में शामिल अधिकारियों के बीच पदोन्नति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। डीपीसी में एक ओर 11 अधिकारियों के लिए आईएफएस बनने की उम्मीद मजबूत हुई, तो दूसरी ओर आठ अफसरों के नाम सीलबंद लिफाफे में रखे जाने और पांच को अयोग्य घोषित किए जाने से पदोन्नति प्रक्रिया में जांच और पात्रता की अहमियत सामने आई है। एसएफएस से आईएफएस में पदोन्नति वन विभाग के अधिकारियों के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब निगाहें अंतिम पदोन्नति आदेश और सीलबंद लिफाफों के मामलों में आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। डीपीसी ने 'पब्लिक वाणी समाचार-पत्र' में प्रकाशित खबर पर अपनी मुहर लगाई है।

इन 11 अफसरों के नाम पर मुहर

डीपीसी में जिन 11 अधिकारियों के नामों पर हरी झंडी मिलने की जानकारी है, उनमें राकेश लहरी, फतेह सिंह निनामा, संजीव शर्मा, धीरज सिंह चौहान, जीपी कुदारे, अविनाश जोशी, हमीदुल्लाह खान, संजय पाठक, संदेश माहेश्वरी, जितेन्द्र गुप्ता और संतोष कुमार शुक्ला शामिल हैं। इन अधिकारियों के लिए अब पदोन्नति की औपचारिक प्रक्रिया बाकी है।

पांच अधिकारी अयोग्य घोषित

डीपीसी में मनोज कटारिया, प्रियंका चौधरी, मनीष पोरवाल, प्रमोद सिंह और प्रदीप कुमार कच्छावा को अयोग्य घोषित किए जाने की जानकारी है। इन अधिकारियों के संबंध में अयोग्यता के कारणों का आधिकारिक विवरण सामने आने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

आठ अधिकारियों के लिफाफे बंद

डीपीसी में रामकुमार अवधिया, सुरेश कुमार अहिरवार, बालक राम सिरसाम, संतोष कुमार रनसोरे, मानसिंह मरावी, एलविन वर्मन, संदीप गौतम और अंतर सिंह ओहरिया के नामों पर सीलबंद लिफाफे की प्रक्रिया अपनाई गई है। इसमें दिलचस्प पहलू यह है कि सुरेश कुमार अहिरवार का पांचवीं बार लिफाफा बंद हुआ है। अहिरवार पर घरेलू हिंसा का गंभीर मामला है। इसके अलावा मानसिंह मरावी जब होशंगाबाद वन मंडल में पदस्थ थे तब इनकी टेरिटरी के अकेले छीपीखापा बीट में ढाई करोड़ की गोल्डन टीक (सागवान लकड़ी) कट गई और इन्हें पता तक नहीं चला। 

वन विभाग इनसे नुकसानी की वसूली न करते हुए आरोप पत्र जारी किया। इसी प्रकार अंतर सिंह ओहरिया ने गजब कर दिया कि कूट रचित दस्तावेज तैयार कर अपने नाते रिश्तेदारों के खाते में सरकारी राशि जमा की है। जांच में प्रूफ हो गया है। 

वन विभाग धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज करने के पर मंथन कर रहा है। सीलबंद लिफाफे की व्यवस्था में संबंधित अधिकारी के पदोत्रति संबंधी परिणाम का खुलासा नियमानुसार बाद में किया जाता है। ऐसे मामलों में विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्यवाही की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है।