फर्जी कृषि कॉलेजों पर लगेगी लगाम: जल्द बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल; शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलान

शिवराज सिंह चौहान ने एग्रीविज़न के राष्ट्रीय अधिवेशन में फर्जी कृषि कॉलेजों पर कार्रवाई और एग्रीकल्चर काउंसिल के गठन की बात कही. किसानों की आय और आधुनिक खेती पर भी जोर दिया.

फर्जी कृषि कॉलेजों पर लगेगी लगाम: जल्द बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल; शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलान

Agriculture News: देश में बिना मानकों के चल रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियों पर लगाम लगाने की तैयारी है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन किया जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि कृषि की डिग्री लेने वाले युवाओं का भविष्य खराब नहीं होने दिया जाएगा. सरकार इस दिशा में शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म रोडमैप तैयार करेगी,

शिवराज सिंह चौहान बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के पूसा में एग्रीविजन के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कृषि शिक्षा, किसानों की आय, खाद्यान्न उत्पादन और आधुनिक तकनीक के जरिए खेती को मजबूत बनाने की सरकार की योजनाओं पर बात की.

'कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे कृषि कॉलेजों पर लगेगी लगाम'

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में बिना जरूरी मानकों के निजी कृषि कॉलेज खुल रहे हैं. ऐसे संस्थानों पर नियंत्रण जरूरी है, ताकि कृषि शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे और विद्यार्थियों को मिलने वाली डिग्री का महत्व कम न हो. उन्होंने कहा कि सरकार BSC एग्रीकल्चर और MSC एग्रीकल्चर जैसी डिग्रियां हासिल करने वाले युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए काम करेगी. सिर्फ फील लेकर डिग्री बांटने वाले संस्थानों को मनमानी नहीं दी जाएगी.

एग्रीकल्चर काउंसिल के गठन को इसी दिशा में अगम कदम माना जा रहा है. हांलांकि, इसके गठन की समयसीमा और नियामक व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.  

'आप मंथन से अमृत निकालिए, हम लागू करेंगे'

एग्रीविज़न के राष्ट्रीय अधिवेशन में शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विशेषज्ञों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से खेती की चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया.

उन्होंने कहां कि ABVP और भारतीय किसान संध जैसे संगठन जमीनी स्तर पर काम करते हैं. ऐसे संघठनों और विशेषज्ञों के अनुभव से कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी नीतियां तैयार की जा सकती हैं. 

शिवराज ने कहा, 'आप मंथन से अमृत निकालिए, हम उसे लागू करेंगे.'

उन्होंने यह भी घोषणा की कि अधिवेशन में सामने आए सुझावों और निष्कर्षों पर चर्चा के लिए अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक की जाएगी। इसमें कृषि क्षेत्र के लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाओं पर काम करने की बात कही गई।

10 साल में 49% बढ़ा खाद्यान्न उत्पादन: शिवराज

केंद्रीय मंत्री ने भारत की कृषि यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने खाद्यान्न की कमी और आयात पर निर्भरता के दौर से निकलकर आत्मनिर्भरता की दिशा में लंबा सफर तय किया है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश का कुल कृषि उत्पादन 49 प्रतिशत बढ़ा है. उनके मुताबिक, भारत में चावल उत्पादन और निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब चुनौती सिर्फ अधिक उत्पादन करने की नहीं है. उपज का वैज्ञानिक तरीके से भंडारण, बेहतर प्रबंधन और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाना भी जरूरी है.

उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के साथ भारत को दुनिया के 'फूड बास्केट' के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करना होगा.

छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में औसत कृषि जोत करीब 0.96 हेक्टेयर है. ऐसे में छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ दूसरे विकल्पों को भी अपनाना जरूरी है.

उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग यानी एकीकृत कृषि प्रणाली पर जोर दिया. इस मॉडल में किसान अनाज उत्पादन के साथ फल-सब्जियों की खेती, औषधीय पौधों, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक खेती को भी जोड़ सकते हैं.

इससे किसानों की आमदनी के अलग-अलग स्रोत विकसित करने और कृषि पर जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है. मंत्री ने कहा कि किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने के लिए खेती में विविधीकरण जरूरी है.

खेती में AI, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ेगा

कृषि को आधुनिक बनाने के लिए सरकार तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को खेती से जोड़ने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं.

आधुनिक तकनीक से खेती के काम को अधिक प्रभावी बनाने, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और कृषि उत्पादन में सुधार की संभावनाएं हैं. इसके लिए कृषि शिक्षा और अनुसंधान को भी मजबूत करना जरूरी है.

एग्रीविज़न के 10 साल के सफर पर पुस्तिका का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एग्रीविज़न के दस वर्षों के सफर पर आधारित विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया.

इस राष्ट्रीय अधिवेशन में एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रघुराज किशोर तिवारी, एग्रीविज़न के अखिल भारतीय प्रमुख विक्रम सिंह, राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री एस. बालकृष्ण, क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, आयोजन सचिव मनीष फाटे और राष्ट्रीय संयोजक सनथ कुमार समेत देशभर से आए कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे.

अधिवेशन में कृषि शिक्षा की गुणवत्ता, किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और भारत को वैश्विक खाद्य आपूर्ति में मजबूत भूमिका दिलाने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया.