ट्रंप का दावा: ‘पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा’, मैक्रों की इमिग्रेशन नीति पर उठाए सवाल
डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की इमिग्रेशन नीति को लेकर इमैनुएल मैक्रों पर निशाना साधा। पेरिस की आबादी, मुस्लिम समुदाय और फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शनों से जुड़े दावों पर जानिए पूरी खबर।
Donald Trump Paris Statement : फ्रांस में महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को लेकर जारी प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए उन्हें हिंसा और अशांति के लिए जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप ने कहा कि अगर मैक्रों ने उनकी सलाह मानी होती, तो ऐसे हालात से बचा जा सकता था।
ट्रंप ने दावा किया कि बड़ी संख्या में अप्रवासियों के आने से पेरिस की जनसांख्यिकी में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पेरिस जल्द ही मुस्लिम शहर बनने वाला है। वहीं, फ्रांस की धार्मिक आबादी को लेकर सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 46% लोग ईसाई हैं, जबकि मुस्लिम आबादी लगभग 9% बताई जाती है।
ट्रंप ने मैक्रों को लेकर क्या कहा?
व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कथित तौर पर कहा, 'पेरिस बहुत जल्द एक मुस्लिम शहर बनने वाला है, और यह डील नहीं थी।'
ट्रंप ने कहा कि मैक्रों उनके दोस्त हैं और उन्होंने उन्हें काफी पहले चेतावनी दी थी कि दुनिया भर से बड़ी संख्या में लोगों को फ्रांस में आने की अनुमति देना एक बड़ी गलती हो सकती है। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने मैक्रों से कहा था कि इस नीति के कारण फ्रांस में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फ्रांस में कितनी है मुस्लिम आबादी?
फ्रांस में धार्मिक आबादी को लेकर उपलब्ध सर्वेक्षणों के अनुसार, करीब 46% लोग ईसाई हैं और लगभग 9% मुस्लिम हैं। वहीं, हिंदू, बौद्ध और अन्य धर्मों को मानने वाले लोगों की संख्या करीब 1% बताई जाती है। लगभग 43% लोग किसी धर्म को नहीं मानते।
हालांकि, फ्रांस में जनगणना के दौरान नियमित रूप से लोगों के धर्म की जानकारी नहीं ली जाती। इस वजह से अलग-अलग सर्वेक्षणों में धार्मिक आबादी के आंकड़ों में अंतर देखने को मिल सकता है।
फ्रांस के 2019-20 के एक सरकारी सर्वेक्षण के मुताबिक, 18 से 59 वर्ष की आयु के लोगों में 10% ने खुद को मुस्लिम और 29% ने कैथोलिक ईसाई बताया था। वहीं, 51% लोगों ने कहा था कि वे किसी धर्म को नहीं मानते।
फ्रांस में हिंसा और कर्फ्यू के हालात
फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, लूटपाट और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आई है। पेरिस, लिली, नीस समेत कई शहरों में कर्फ्यू और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाने के कदम उठाए गए।
इन घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू की सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दबाव बढ़ने की बात कही गई है।
गृह मंत्री ने की इस्तीफे की पेशकश
हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बीच गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने रविवार को इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उन्हें पद पर बने रहने को कहा।
मैक्रों ने कहा कि मौजूदा हालात में कानून प्रवर्तन एजेंसियों का नेतृत्व लगातार जारी रहना जरूरी है। उन्होंने हिंसा की योजना और खुफिया जानकारी जुटाने में हुई चूकों की जांच तथा पुलिस की नई रणनीतियां लागू करने के निर्देश भी दिए।
मैक्रों बोले- तोड़फोड़ करने वालों को कीमत चुकानी होगी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसक प्रदर्शनों और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद सख्त कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।
मैक्रों ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों की कुछ मांगें जायज हो सकती हैं, लेकिन उनकी मांगों को हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों की गतिविधियों से नहीं जोड़ना चाहिए।
फ्रांस में प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और गिरफ्तारियां
फ्रांस के कई शहरों में 17 अक्टूबर को प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पें हुईं। इस दौरान सरकारी इमारतों में आग लगाने, दुकानों में लूटपाट करने और ऐतिहासिक इमारतों को निशाना बनाने की घटनाओं का जिक्र किया गया है। पुलिस ने 2,400 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया, जबकि हिंसा रोकने की कोशिश में करीब 1,000 पुलिसकर्मी और सेना के जवान घायल हुए।

