151 लावारिस अस्थियों का होगा नर्मदा में विसर्जन : 1997 से लगातार मानव सेवा में जुटी दो संस्थाएं, सर्वपितृ अमावस्या पर विधि-विधान से तर्पण
Sarvapitru Amavasya 2026 : इंदौर में महाकाल मानव समाज सेवा और सुल्ताने इंदौर एकता सेवा समिति इस बार सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर 151 मृतकों की अस्थियों का तर्पण और पूजन कर उन्हें नर्मदा नदी में विसर्जित किया जाएगा।
Sarvapitru Amavasya 2026 : इंदौर। इंसान की जिंदगी में उसके अपने भले ही सबसे अहम होते हैं, लेकिन जब किसी की मौत के बाद उसे कंधा देने वाला और उसकी अस्थियों को विसर्जित करने वाला भी कोई न हो, तो यह पीड़ा और भी गहरी हो जाती है। इंदौर में ऐसी ही लावारिस अस्थियों को सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का काम दो संस्थाएं पिछले कई वर्षों से कर रही हैं। सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर आज 151 लावारिस शवों की अस्थियों का विधि-विधान से तर्पण और पूजन किया जाएगा। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच इन अस्थियों को नर्मदा नदी में विसर्जित किया जाएगा। यह उन लोगों की अस्थियां हैं, जिनके परिजनों का पता नहीं चल सका।
दरअसल, इंदौर में महाकाल मानव समाज सेवा और सुल्ताने इंदौर एकता सेवा समिति वर्ष 1997 से लगातार लावारिस शवों की अस्थियों का विधि-विधान से पूजन और विसर्जन करती आ रही हैं। इस बार सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर 151 मृतकों की अस्थियों का तर्पण और पूजन कर उन्हें नर्मदा नदी में विसर्जित किया जाएगा। इन सभी मामलों में शासन-प्रशासन को मृतकों के परिजनों की जानकारी नहीं मिल सकी।

प्रशासन की अनुमति के बाद दोनों संस्थाएं इन मृतकों को धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम विदाई देती हैं। महाकाल मानव समाज सेवा के अशोक गोयल ने बताया कि संस्था कई वर्षों से यह सेवा कार्य कर रही है और इसमें प्रशासन का भी सहयोग मिलता है। उनका कहना है कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन इन अस्थियों का विधि-विधान से पूजन और विसर्जन करना उनके लिए पुण्य का कार्य है।
वहीं, सुल्ताने इंदौर एकता सेवा समिति के करीम खान ने बताया कि कई बार अंतिम संस्कार के बाद मृतकों के परिजन कई बार संपर्क करते हैं और अपने परिवार के सदस्य की पहचान बताते हैं। यदि अस्थियों के विसर्जन से पहले परिजन संपर्क कर अपनी पहचान की पुष्टि कर देते हैं, तो अस्थियां उन्हें सौंप दी जाती हैं। वही जिन मृतकों को दफनाया गया होता है, उनके मामलों में भी प्रशासन की अनुमति और निगरानी में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर अंतिम संस्कार कराया जाता है।
इन दोनों संस्थाओं की यह पहल बताती है कि किसी इंसान के जीवन का अंत उसकी पहचान और सम्मान का अंत नहीं होना चाहिए। जिन लोगों की अंतिम विदाई के समय उनका अपना कोई साथ नहीं था, उनके लिए ये संस्थाएं आगे आकर मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश कर रही हैं।


