MP OBC Reservation : MP में 27% OBC आरक्षण रद्द, 13% रुके पदों पर अनारक्षित वर्ग को मिलेगी नियुक्ति
MP OBC Reservation : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27% OBC आरक्षण कानून रद्द किया। 13% होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र उम्मीदवारों को तीन महीने में नियुक्ति देने के निर्देश।
MP OBC Reservation : मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने वर्ष 2019 में OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाले कानून को असंवैधानिक मानते हुए रद्द कर दिया है। इसके बाद प्रदेश में OBC आरक्षण की सीमा फिर से 14 प्रतिशत हो गई है। साथ ही, लंबे समय से रोके गए 13 प्रतिशत पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन महीने में पूरी करनी होगी नियुक्ति प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC), कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) और अन्य भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया अधिकतम तीन महीने में पूरी की जाए।
दरअसल, 29 सितंबर 2022 के बाद से सरकारी भर्तियों में 87:13 का फॉर्मूला लागू था। इसके तहत 87 प्रतिशत पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती थी, जबकि बाकी 13 प्रतिशत पदों को OBC आरक्षण विवाद के चलते रोककर रखा गया था। अब कोर्ट के फैसले के बाद इन पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का रास्ता साफ हुआ है।
पहले से नौकरी कर रहे OBC उम्मीदवारों को राहत
अदालत ने उन OBC उम्मीदवारों को भी राहत दी है, जिन्हें मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर सरकारी नौकरी मिली थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी नियुक्तियां रद्द नहीं की जाएंगी। हालांकि, 29 सितंबर 2022 के बाद 14 प्रतिशत से अधिक OBC आरक्षण के आधार पर हुई नई नियुक्तियों को लेकर कोर्ट ने अलग निर्देश दिए हैं। इन मामलों में संबंधित भर्ती एजेंसियों को फैसले के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।
क्यों बढ़ा था OBC आरक्षण का विवाद?
मध्य प्रदेश में वर्ष 2019 में तत्कालीन सरकार ने OBC आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं। याचिकाकर्ताओं ने आरक्षण बढ़ाने की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए थे। मामले में आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक होने और इसके लिए पर्याप्त आंकड़े व असाधारण परिस्थितियां साबित करने का मुद्दा अहम रहा। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 27 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाने वाले कानून को रद्द कर दिया।
इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को राहत की उम्मीद
13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां रुकी होने के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवार लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, नियुक्ति की प्रक्रिया संबंधित भर्ती, पात्रता और कोर्ट के आदेश के अनुसार पूरी की जाएगी।

