हैवानियत की हदें पार: 8 साल की मासूम गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती, उपचार जारी
सिंगरौली के चितरंगी में 8 वर्षीय बालिका से कथित दुष्कर्म और प्रताड़ना का मामला। गंभीर संक्रमण और किडनी में पथरी के बीच अस्पताल में इलाज जारी।
सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी थाना क्षेत्र में 8 वर्षीय बालिका के साथ कथित दुष्कर्म और शारीरिक प्रताड़ना का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, बालिका के पिता पर दुष्कर्म का आरोप है, जबकि सौतेली मां पर गर्म चिमटे से प्रताड़ित करने, मारपीट करने और घर से निकालने के आरोप लगाए गए हैं। बालिका की हालत गंभीर होने के कारण उसे जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है।
बालिका के निजी अंगों में गंभीर संक्रमण और दोनों किडनियों में पथरी की समस्या सामने आने की जानकारी दी गई है। प्रशासन, बाल कल्याण समिति और बाल संरक्षण अधिकारियों की देखरेख में उसके इलाज, सुरक्षा और पुनर्वास के प्रयास किए जा रहे हैं। नाबालिग की पहचान गोपनीय रखी जा रही है।
ताऊ की शिकायत के बाद सामने आया मामला
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, ग्राम गुलहरिया निवासी प्रेम सिंह गोड़ ने अपनी 8 वर्षीय भतीजी के लापता होने के बाद उसकी तलाश शुरू की। 22 अगस्त 2026 को उन्हें सूचना मिली कि बालिका झगरौहा स्कूल के पास है। वहां पहुंचने पर बालिका ने घर से भागने का कारण बताते हुए अपने साथ हुई कथित प्रताड़ना की जानकारी दी।
शिकायत के अनुसार, बालिका ने बताया कि करीब दो महीने पहले उसकी सौतेली मां ने रात लगभग 11 बजे गर्म चिमटे से उसके निजी अंगों को दागा था। इसके अलावा मारपीट करने, पर्याप्त भोजन नहीं देने और घर से निकालने के आरोप भी सामने आए। बालिका के पिता पर भी दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था। मामले में आरोपों की पुष्टि की गई है।
पिता की मौत, सौतेली मां की तलाश
शिकायत के बाद पुलिस ने बालिका के पिता हीरा सिंह गोड़ और सौतेली मां सविता सिंह गोड़ की तलाश शुरू की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसी दौरान पिता की आत्महत्या से मौत हो गई, जबकि सौतेली मां के फरार होने की बात सामने आई है। मामले में आगे की कार्रवाई और आरोपी की वर्तमान स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
कलेक्टर के निर्देशन में बालिका को मिला संरक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देशन में बालिका को बाल कल्याण समिति, सिंगरौली की देखरेख में जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। उपचार के बाद उसकी देखभाल के लिए वन स्टॉप सेंटर में व्यवस्था की गई, जहां भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए।
बालिका की पढ़ाई जारी रखने के उद्देश्य से उसे डे केयर ओएसएच भी भेजा गया। इस दौरान बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राम दयाल पाण्डेय, सदस्य पूनम मिश्रा, देवधर प्रसाद शर्मा, पूनम त्रिपाठी और रीना सिंह परिहार सहित पॉक्सो सपोर्ट पर्सन विनोद सिंह तथा कंप्यूटर ऑपरेटर सीमा सिंह ने देखरेख और सहायता में भूमिका निभाई।
पित्ताशय में पथरी के ऑपरेशन के बाद फिर बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य में सुधार होने पर 10 सितंबर 2026 को बालिका को वीरांगना रानी दुर्गावती कन्या आश्रयशाला, बंजारी में दाखिल कराया गया। कुछ दिनों बाद तेज पेट दर्द होने पर उसे दोबारा जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती कराना पड़ा।
जांच के दौरान उसके पित्ताशय में 12 सेंटीमीटर की पथरी होने की जानकारी सामने आई। जिला चिकित्सालय के सर्जन डॉ. बालेन्दु शाह ने ऑपरेशन कर पथरी निकाली। इसके बाद स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने पर बालिका को फिर आश्रयशाला भेज दिया गया।
हालांकि, कुछ दिनों बाद उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ गई। उसे यूरिन संक्रमण की शिकायत हुई और पेशाब में खून आने लगा। जांच में दोनों किडनियों में पथरी होने की जानकारी सामने आई। इसके साथ ही निजी अंगों में गंभीर संक्रमण की समस्या भी बताई गई है।
फिलहाल बालिका जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती है और चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
बालिका के उपचार और पुनर्वास के लिए लगातार प्रयास
बालिका को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उसके पुनर्वास के लिए बाल कल्याण समिति तथा संबंधित अधिकारियों की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। वन स्टॉप सेंटर में देखभाल के दौरान सीमा द्विवेदी और अनिता ने सहयोग किया। इसके अलावा ओएसएम की सीरीन, अर्चना पाण्डेय, कुमकुम, रोशनी तिवारी, रश्मि सिंह और वंदना द्विवेदी ने भी देखरेख में योगदान दिया।
इस मामले में एसी ट्राइबल रेखा पांचाल, पूर्व जिला कार्यक्रम अधिकारी जीतेन्द्र गुप्ता, वर्तमान जिला कार्यक्रम अधिकारी शैलेन्द्र साकेत और बाल संरक्षण अधिकारी नीरज शर्मा की भूमिका भी बताई गई है।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राम दयाल पाण्डेय और सदस्यों के प्रयासों से बालिका को चिकित्सा सुविधा, भोजन, सुरक्षित आश्रय और शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य में सुधार के बाद उसे आश्रयशाला भेजा गया था, लेकिन तबीयत दोबारा बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
फिलहाल प्राथमिकता बालिका को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, संक्रमण का उपचार करने, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य के लिए उचित पुनर्वास व्यवस्था बनाए रखने की है। मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई और बालिका के स्वास्थ्य की आधिकारिक स्थिति से जुड़ी जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

