Rahul Gandhi MP Visit : 30+ बच्चों की मौत और सरकार सोती रही... अब 1 अक्टूबर को बालाघाट जाएंगे राहुल गांधी

Rahul Gandhi MP Visit : राहुल गांधी बैहर और बिरसा के प्रभावित आदिवासी इलाकों में जाकर मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात करेंगे।

Rahul Gandhi MP Visit : 30+ बच्चों की मौत और सरकार सोती रही... अब 1 अक्टूबर को बालाघाट जाएंगे राहुल गांधी

Rahul Gandhi MP Visit : भोपाल। मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा आदिवासी बच्चों की मौतों के बीच राहुल गांधी एक अक्टूबर को जिले का दौरा करेंगे। वे बैहर और बिरसा के प्रभावित इलाकों में जाकर मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात करेंगे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 32 बच्चों की मौत हो चुकी है। राहुल गांधी का यह 13 दिन में मध्य प्रदेश का दूसरा दौरा होगा। इससे पहले वे 19 सितंबर को इंदौर आए थे।

दौरे का पूरा कार्यक्रम तय

राहुल गांधी गोंदिया के बिस्सी एयरपोर्ट से बालाघाट पहुंचेंगे। वे जगला गांव में दोपहर 2:15 से 3 बजे तक मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद तीन बजे मीडिया से बात करेंगे और शाम 5:45 बजे नई दिल्ली वापस लौटेंगे।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि राहुल गांधी परिवारों से मिलकर जमीनी हालात समझेंगे। वे जानेंगे कि पोषण, दलिया, मच्छरदानी और टीकाकरण जैसी सुविधाएं बच्चों तक क्यों नहीं पहुंचीं।

सिंघार ने कहा कि सिर्फ आर्थिक मदद काफी नहीं है। योजनाएं हर जरूरतमंद तक पहुंचनी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी तय नहीं हुई और मुख्यमंत्री मोहन यादव चुप्पी साधे हुए हैं।

जून से शुरू हुआ मौत का सिलसिला

बिरसा विकासखंड के बैगा बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का सिलसिला जून 2026 से शुरू हुआ। पहली दर्ज मौत 16 जून को बोंदारी गांव में 16 वर्षीय रूपलाल धुर्वे की हुई।

26 जून को कोहनीमोड़टोला की 14 वर्षीय लमनिन धुर्वे और 27 जून को साहिल धुर्वे की मौत हुई। इसके बाद बोंदारी, कुंडेकसा, कोरका और आसपास के गांवों में मौतें बढ़ती गईं।

शुरुआत में मामला स्थानीय स्तर तक सीमित रहा। 22 जुलाई को अडोरी पंचायत के सरपंच ने तीन बच्चों की मौत की जानकारी अधिकारी को दी। 12 अगस्त को जिला प्रशासन ने बीमारी के प्रकोप को लेकर पत्र जारी किया। अगस्त मध्य तक मीडिया रिपोर्टों से मामला प्रदेश स्तर पर चर्चा में आया।

जांच में कई कारण और कमियां सामने आईं

केंद्र और राज्य की स्वास्थ्य टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचीं। रक्त नमूने लिए गए। जांच में सिर्फ मलेरिया नहीं बल्कि खसरा, दोनों का मिश्रण, कुपोषण, एनीमिया, निमोनिया, निर्जलीकरण और शॉक जैसे कई कारण मिले। 

केंद्र की राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) ने 196 मामलों की जांच की। इनमें 156 बच्चे 10 साल से कम उम्र के थे। 64 सैंपल में 25 खसरा पॉजिटिव मिले। 32 मरीजों की मलेरिया जांच में 27 पॉजिटिव रहे। 12 मरीजों में दोनों संक्रमण थे। डेंगू, चिकनगुनिया और एंटरोवायरस भी मिले। प्रभावित घरों में 20 से 25 प्रतिशत बच्चों में गंभीर कुपोषण पाया गया।

मुआवजा, दौरे और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

29 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रभावित गांवों में पहुंचे थे। तब सरकार ने आठ मौतों की पुष्टि की थी। उन्होंने परिवारों को दो-दो लाख रुपये सहायता देने की घोषणा की। बाद में आंकड़ा बढ़ा।

12 सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके भी पहुंचे। उन्होंने परिवारों से मुलाकात की और कहा कि जिम्मेदारी तय नहीं हुई। उन्होंने वास्तविक मौतों की संख्या सरकारी आंकड़े से ज्यादा होने का दावा किया। 

NJORT (राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल ) रिपोर्ट में बैहर में एमआर-1 टीकाकरण सिर्फ 51 प्रतिशत और एमआर-2 49 प्रतिशत रहा। बिरसा में यह 64.8 और 65 प्रतिशत था। जिला प्रयोगशाला और आशा कार्यकर्ता की कमी भी सामने आई। सरकार की स्क्रीनिंग में 27,839 कुपोषित और 3,741 अति कुपोषित बच्चे मिले। दस्तक 2026 में 7,711 गंभीर कुपोषित बच्चे पाए गए।