पब्लिक वाणी खास : बाघों की बढ़ी आबादी, लेकिन कोर जोन से विस्थापित नही हो सके गांव

संजय टाइगर रिजर्व : 54 चिन्हित गांवों में अभी तक केवल 19 का हुआ विस्थापन

पब्लिक वाणी खास : बाघों की बढ़ी आबादी, लेकिन कोर जोन से विस्थापित नही हो सके गांव

बृजेश पाठक @ सीधी

संजय टाइगर रिजर्व के कोर जोन में बसे 54 चिन्हित गांवों में अभी तक केवल 19 गांवों का ही विस्थापन हो सका है। शेष बचे गांवों के विस्थापन की कार्यवाही धीमी चल रही है। इस तरह टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या और कोर जोन की आबादी ने एक अलग समस्या पैदा कर दी है। बाघों के आपसी संघर्ष और बस्तियों की तरफ रूख करने से आबादी पर भी संकट बना हुआ है। इस रिजर्व में बाघों की लगातार बढ़ती संख्या जहां संरक्षण की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, वहीं सिमटते प्राकृतिक आवास ने वन प्रबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

चिन्हित गांवों का विस्थापन अपेक्षित गति से नहीं होने के कारण बाघों के लिए उपलब्ध जंगल का दायरा सीमित होता जा रहा है। इसका असर क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने और बाघों के जंगल से बाहर निकलने की घटनाओं के रूप में दिखने लगा है। टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 1674.511 वर्ग किलोमीटर है। इसमें कोर 812.581 और बफर 861 वर्ग किलोमीटर है। यहां विस्थापन की शुरुआत वर्ष 1985 से हुई थी।

टाइगर रिजर्व के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 की पंचवर्षीय गणना में यहां केवल छह बाघ दर्ज किए गए थे। वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 20 हुई, जबकि विभाग के नवीनतम अनुमान के मुताबिक वर्तमान में रिजर्व में वयस्क, सब-एडल्ट और शावकों सहित 44 बाघ मौजूद हैं। छह वर्षों में सात गुना से अधिक की यह वृद्धि संजय टाइगर रिजर्व के अनुकूल प्राकृतिक वातावरण और सफल संरक्षण प्रयासों को जाहिर करती है, जबकि गांवों के विस्थापन की धीमी रफ्तार प्रशासनिक सुस्ती का संकेत देती है। अब तक 54 चिन्हित गांवों में से केवल 19 गांवों का ही विस्थापन हो सका है। शेष गांवों के कारण कोर क्षेत्र पर दबाव बना हुआ है, जिससे भविष्य में बाघ संरक्षण की चुनौती और गहरा सकती है।

लोकसभा में सांसद ने उठाया विस्थापन का मुद्दा

संजय टाइगर रिजर्व में विस्थापित होने वाले परिवारों के मामले को सांसद डॉ. राजेश मिश्रा लोकसभा में उठा चुके है। बीते सत्र में सांसद ने संजय टाइगर रिजर्व के सामने विस्थापन की गंभीर समस्या को उठाते हुए कहा था कि विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजे के साथ उनके रहवास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। विस्थापन न होने से टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों से आये दिन रहवासियों को दुर्घटना का शिकार होना पड़ रहा है।

पर्यटकों की तादाद में भी इजाफा

पर्यटन के क्षेत्र में भी टाइगर रिजर्व ने उल्लंखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2018-19 में जहां केवल 1,333 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं एक अक्टूबर 2025 से 30 जून 2026 तक 12,653 पर्यटक भ्रमण कर चुके हैं। इसी अवधि में 71.50 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि वर्ष 2018 से जून 2026 तक पर्यटन से कुल 2.12 करोड़ रुपये से अधिक की आय दर्ज की गई।

8 साल में बाघों के हमले में सात लोगों की मौत

पिछले आठ साल में बाघ के हमले से 7 लोगों की मौत हो चुकी है, तो वहीं हाथी के कुचलने से तीन ग्रामीण और भालू के हमले से चार लोगों की मौत हो चुकी है। बता दें कि कोर जोन में बस्ती होने के कारण आये दिन बाघ बस्तियों की ओर रूख करते है और फिर किसी न किसी को दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है।

इनका कहना है

6 संजय टाइगर रिजर्व में विस्थापन प्रमुख समस्या है। विस्थापन होने से जंगल बढ़ेगा। जिससे बाघ सहित अन्य जंगली जानवरों स्वछंद विचरण करने में आसानी होगी। बाघों में आसपी द्वंद के साथ मानव संघर्ष को कम किया जा सकता है।

- सुधीर मिश्रा, सेवानिवृत्त सहायक संचालक संजय टाइगर रिजर्व

संजय टाइगर रिजर्व में कुल 54 गांव है। इनमें 19 गांव पूरी तरह विस्थापित हो गए हैं। शेष गांवों में प्रक्रिया चल रही है। हाल ही में वस्तुआ रेंज रामगढ़ गांव के लोग मकान खाली कर दूसरे गांव चले गए हैं।

- राजेश कन्ना टी, उप संचालक संजय टाइगर रिजर्व, सीधी