न्यूक्लियर प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज: बिना ग्रामसभा की सहमति सर्वे कराने पर उठे सवाल

सिरमौर तहसील के सरई कला और रूझौही गांव में पहुंची सर्वे टीम, ग्रामीणों ने मशीनें लौटाईं; 28 हजार करोड़ की प्रस्तावित परियोजना को लेकर क्षेत्र में बढ़ी हलचल

न्यूक्लियर प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज: बिना ग्रामसभा की सहमति सर्वे कराने पर उठे सवाल

जवा/रीवा। सिरमौर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत सरई कला के रूझौही मौजा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। परियोजना से संबंधित सर्वे और बोरहोल परीक्षण के लिए पहुंची कंपनी की टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया। ग्रामीणों ने मौके पर एकत्र होकर मशीनों से होने वाले कार्य पर आपत्ति जताई और ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी तरह की गतिविधि संचालित नहीं करने की मांग की। विरोध के बाद टीम को वापस लौटना पड़ा।

बोरहोल जांच के लिए पहुंची थीं दो मशीनें

जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम मिश्री परीक्षण और बोरहोल के लिए रुड़की स्थित कंपनी की दो बोरिंग मशीनें गांव पहुंची थीं। इसकी जानकारी मिलते ही सरई कला और रूझौही के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना था कि ग्रामसभा पहले ही प्रस्तावित परियोजना को लेकर अपनी असहमति दर्ज करा चुकी है।

ऐसे में ग्राम पंचायत और ग्रामीणों की स्पष्ट सहमति के बिना बोरिंग मशीनें भेजकर भू-तकनीकी जांच शुरू करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से क्षेत्र में कुल 8 बोरहोल किए जाने की योजना है। इनमें 4 बोरहोल करीब 100 मीटर और चार बोरहोल लगभग 50 मीटर की गहराई तक किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जल, जंगल-जमीन को लेकर ग्रामीण चिंतित

ग्रामीणों ने प्रस्तावित परियोजना से जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ पर्यावरण और स्थानीय आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि किसी भी बड़े औद्योगिक या परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय लोगों की आपत्तियों और ग्रामसभा की भूमिका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

28 हजार करोड़ की परियोजना

प्रस्तावित परियोजना को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, इसे टाटा पावर से जुड़ा न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत करीब 28 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। परियोजना की क्षमता को लेकर अलग-अलग चरणों में 220 मेगावाट से बढ़ाकर 1000 मेगावाट और भविष्य में 2400 मेगावाट तक उत्पादन की योजना की चर्चा है।

प्रशासनिक स्तर पर करीब 169 हेक्टेयर भूमि से संबंधित जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, परियोजना के विभिन्न चरणों, क्षमता और वास्तविक स्वीकृतियों को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत स्थिति स्पष्ट किया जाना अभी बाकी है।

कलेक्टर के पत्र के बाद शुरू हुई भू-तकनीकी जांच

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी पत्र क्रमांक 117/2026, दिनांक 21 अगस्त 2026 के माध्यम से भू-तकनीकी जांच के लिए अनुमति और आवश्यक सहयोग के निर्देश दिए जाने के बाद क्षेत्र में सर्वे की गतिविधियां शुरू हुईं। इसके बाद कंपनी की टीम मशीनों के साथ गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब ग्रामसभा की ओर से परियोजना को लेकर आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है और स्थानीय लोग विरोध जता रहे हैं, तो भू-तकनीकी जांच किस प्रक्रिया और किन शर्तों के तहत कराई जा रही है। उनका यह भी कहना है कि क्या ग्रामीणों की आपत्तियों पर विधिवत सुनवाई की गई है और क्या ग्रामसभा को परियोजना से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

प्रशासन से दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रस्तावित परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेज, सर्वे की अनुमति, भूमि की स्थिति, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय लोगों पर पड़ने वाले संभावित असर की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही ग्रामसभा की आपत्तियों को रिकॉर्ड में लेकर उनकी खुली सुनवाई कराने की मांग भी की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर स्थानीय लोगों की चिंताओं और अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। किसी भी बड़ी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले क्षेत्रवासियों को विश्वास में लेना और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखना जरूरी है।

फिलहाल रूझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर हलचल बढ़ गई है। ग्रामीणों के विरोध के बाद अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के रुख पर नजर है। परियोजना से जुड़े सर्वे, ग्रामसभा की आपत्तियों और प्रस्तावित प्लांट की स्वीकृतियों को लेकर प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है।